अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस–2026 पर गोविंद झील पर भव्य समारोह का आयोजन

खबर सार :-
अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कई महत्वपूर्ण जानकारियों को आमजन के साथ साझा किया गया।  पर्यावरण संरक्षण सहित  अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।

अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस–2026 पर गोविंद झील पर भव्य समारोह का आयोजन
खबर विस्तार : -

सुलतानपुरः जनपद सुलतानपुर स्थित गोविंद झील पर 2 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं जागरूकता से भरपूर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव” रही, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के महत्व को आम जनता तक पहुँचाना था।

लोगों को किया गया जागरूक

इस अवसर पर गोविंद झील की प्राकृतिक सुंदरता के बीच विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। लोगों को जल-जीवन और वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेश, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक झलकियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें स्थानीय कलाकारों द्वारा लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला की प्रस्तुति भी शामिल थी।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं था, बल्कि आर्द्रभूमियों के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को भी लोगों के सामने लाना था। यह फेस्टिवल गोविंद झील को न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से बल्कि जनपद की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के रूप में भी प्रस्तुत करने का अवसर बना।

कार्यक्रम में कई अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर सुलतानपुर वन प्रभाग द्वारा विशेष रूप से आयोजन किया गया। वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जल-जीवन और जैव विविधता के संतुलन पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उप प्रभागीय वन अधिकारी अंजनी कुमार श्रीवास्तव, वन दरोगा राकेश पांडे, वन दरोगा राहुल, बीट इंचार्ज रेखा सिंह, जयश्याम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने स्थानीय लोगों को संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

दिनभर चले इस फेस्टिवल ने न केवल पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाई, बल्कि लोगों में पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को भी उजागर किया। यह पहल जनपद सुलतानपुर में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन के क्षेत्र में एक सार्थक कदम के रूप में देखी गई।

गोविंद झील पर आयोजित यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन एक साथ संभव है, और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ही यह लक्ष्य प्रभावी रूप से हासिल किया जा सकता है।

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