Ram Van Gaman Path : प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के बाद अब उनके वन गमन मार्ग को भी संवारने की कवायद तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने अयोध्या से चित्रकूट तक जाने वाले 'राम वन गमन पथ' पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर इस मार्ग पर किफायती और सुरक्षित विश्राम गृहों के निर्माण की पुरजोर मांग की है। सांसद अमर पाल मौर्य ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि राम मंदिर के लोकार्पण के बाद से राम वन गमन पथ पर श्रद्धालुओं की आवाजाही में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 हजार से अधिक श्रद्धालु इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। विशेष पर्वों और मेलों के दौरान यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। लगभग 210 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पदयात्रियों और दर्शनार्थियों के लिए रात गुजारने हेतु कोई सुव्यवस्थित और सस्ता विकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सांसद ने सुझाव दिया है कि अयोध्या से चित्रकूट के बीच सुलतानपुर, प्रतापगढ़, कौशाम्बी और प्रयागराज जैसे प्रमुख जिलों से होकर गुजरने वाले इस मार्ग पर हर 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर विश्राम गृह बनाए जाएं।
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ODOP) के माध्यम से अब स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने वाली है। अमर पाल मौर्य ने इस परियोजना को ODOP से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जिसके तहत विश्राम गृहों के परिसर में स्थानीय उत्पादों के विशिष्ट स्टॉल लगाए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय शिल्प को न केवल वैश्विक पहचान दिलाना है, बल्कि क्षेत्रीय व्यापारियों और कारीगरों को बिक्री के लिए सीधा मंच उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक लाभ पहुँचाना भी है। इस योजना के धरातल पर उतरने से प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रसिद्ध उत्पादों को नई उड़ान मिलेगी। इसमें विशेष रूप से प्रतापगढ़ के आंवला उत्पाद, सुलतानपुर और प्रयागराज का मूंज शिल्प, कौशाम्बी के केला आधारित उत्पाद, अयोध्या का प्रसिद्ध गुड़ और चित्रकूट के पारंपरिक लकड़ी के खिलौनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इन स्टॉल्स के माध्यम से यात्रियों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और शिल्प विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा, जिससे स्थानीय सूक्ष्म और लघु उद्योगों का कायाकल्प होना तय है।
सांसद मौर्य के अनुसार, इस योजना के धरातल पर उतरने से हजारों स्थानीय युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इन धर्मशालाओं के निर्माण के लिए उचित भूमि का चयन किया जाए, ताकि धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक सहयोग के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सस्ते आवास सुनिश्चित किए जा सकें। इस पहल से न केवल राम वन गमन पथ का धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक मॉडल कॉरिडोर के रूप में भी उभरेगा।
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