पाकिस्तान के क्वेटा में जल संकट गहराया, सिंध पर पानी रोकने का आरोप, सीएम ने गठित की समिति
खबर सार :-
पाकिस्तान के शहर क्वेटा में पानी की किल्लत है। गत 18 जुलाई को पानी के लिए किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और सिंध प्रांत पर बलूचिस्तान के हिस्से का पानी चोरी करने का आरोप लगाया। वहीं, सिंध सीएम ने बलूचिस्तान सरकार से वार्ता करने के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति का कहना है कि बलूचिस्तान को जल संधि के मुताबिक उसके हिस्से का पूरा पानी मिलना चाहिए।
खबर विस्तार : -
क्वेटा: पाकिस्तान का शहर क्वेटा इन दिनों पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। बुधवार की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शहर में भूजल का स्तर बहुत नीचे गिर गया है और वॉटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (WASA) द्वारा दी जाने वाली सरकारी पानी की सप्लाई कई इलाकों में या तो पूरी तरह बंद कर दी गई है या बहुत कम कर दी गई है।
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार के अनुसार, सरियाब, सिरकी रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरानी रोड, सैटेलाइट टाउन, सबजल रोड और खयाबान-ए-आघा जैसे इलाकों के लोग पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
कई घरों में 6 महीने से नहीं आया पानी
क्वेटा में कई घरों में पिछले छह महीनों से नल का पानी नहीं आया है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय मीडिया को लोगों ने बताया कि वे नियमित रूप से अपना WASA बिल भरते हैं, फिर भी उन्हें पानी नहीं मिलता। बार-बार शिकायत करने के बावजूद यह समस्या हल नहीं हुई है और अधिकारी सिर्फ आश्वासन ही देते रहे हैं।
सिंध पर पानी चोरी करने का आरोप, किसानों का प्रदर्शन
18 जुलाई को पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के बीच पानी का विवाद और बढ़ गया। बलूचिस्तान के तीन मंत्रियों ने सुक्कुर बैराज पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और आरोप लगाया कि सिंध बलूचिस्तान के हिस्से का पानी दूसरी तरफ मोड़ रहा है। मंत्रियों ने कहा कि लंबे समय से पानी की कमी के कारण किसान आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। मंत्रियों ने मांग की कि सिंध सरकार सिंध के भीतर बने अनधिकृत रास्तों से बलूचिस्तान के हिस्से का पानी चोरी किए जाने के खिलाफ कार्रवाई करे। लरकाना डिवीजन के विभिन्न हिस्सों के किसान भी पानी की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में बलूचिस्तान के किसानों के साथ शामिल हुए।
मंत्री बोले- जल संधि के अनुसार बलूचिस्तान को मिले पूरा पानी
सुक्कुर बैराज पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में मोहम्मद सादिक उमरानी ने कहा कि बलूचिस्तान को 1991 के जल समझौते के अनुसार पानी का पूरा हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रांत को किरथर नहर से 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से 6,700 क्यूसेक का पूरा आवंटन नहीं मिल रहा है। उमरानी ने बताया कि पानी की कमी के कारण, बलूचिस्तान के किसान बुवाई के सबसे अहम समय में अपनी फ़सलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होने का खतरा है।
सिंध सरकार से वार्ता को मुख्यमंत्री ने गठित की समिति
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने सिंध सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस समिति में मंत्री मोहम्मद सादिक उमरानी, सलीम अहमद खोसो और मोहम्मद खान लेहरी शामिल हैं।
सिंध सिंचाई विभाग के अधिकारियों के दावे को किया खारिज
सलीम अहमद खोसो ने बताया कि सिंध सिंचाई विभाग के अधिकारियों का दावा है कि बलूचिस्तान को उसके हिस्से से ज्यादा पानी मिल रहा है, लेकिन समिति ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जमीनी हालात साफ तौर पर पानी की भारी कमी की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बलूचिस्तान इस समस्या का स्थायी समाधान चाहता है ताकि इस मुद्दे पर हर साल विरोध-प्रदर्शन न करना पड़े।
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पाकिस्तान का 1991 जल समझौता क्या है
1991 का जल बंटवारा समझौता (Water Apportionment Accord) पाकिस्तान में 21 मार्च 1991 को हुआ एक ऐतिहासिक प्रांतीय समझौता था। इसका मकसद सिंधु नदी प्रणाली के पानी को देश के चार प्रांतों—पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के बीच बांटना था। इस समझौते के तहत, साल भर उपलब्ध औसतन 114.35 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी का बंटवारा तय किया गया था। इस व्यवस्था के अंतर्गत, बलूचिस्तान को पानी का 3.87 MAF (लगभग 3.4%) हिस्सा आवंटित किया गया था।
बलूचिस्तान और सिंध में पानी को लेकर क्यों है विवाद
यह समझौता लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। बलूचिस्तान सरकार और किसान अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि उन्हें समझौते में तय मात्रा से बहुत कम पानी मिल रहा है। पानी कम मात्रा में मिलने की वजह से सिंचाई में भी परेशानी आती है। सुक्कुर बैराज जैसे अहम जगहों पर पानी की चोरी को लेकर सिंध और बलूचिस्तान के बीच अक्सर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा हो जाता है।
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