पाकिस्तान में दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या, परिजनों ने क्वेटा-कराची हाईवे पर किया प्रदर्शन

खबर सार :-

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम कर रहे एक संगठन में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई है। संगठन ने बताया कि शमसाबाद इलाके में हमलावरों ने दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी।
पाकिस्तान में दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या, परिजनों ने क्वेटा-कराची हाईवे पर किया प्रदर्शन

खबर विस्तार : -

इस्लामाबाद: शुक्रवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने इस घटना पर चिंता जताई और कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है।

'वॉयस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) के अनुसार, मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के शमसाबाद इलाके में 21 साल के आयुष मसीह और 24 साल के डोमिनिक मसीह की गोली मारकर हत्या कर दी। यह जगह ईसाइयों की बस्ती से कुछ ही किलोमीटर दूर है। शाम के समय दोनों युवक दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे, तभी हमलावरों ने आकर उन पर गोली चला दी; दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

ISKP के शामिल होने की आशंका

रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए VOPM ने कहा कि इस हमले के पीछे 'इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रोविंस' (ISKP) का हाथ होने का शक है। ISKP, इस्लामिक स्टेट का एक स्थानीय संगठन है जो बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में सक्रिय है और पहले भी अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना चुका है।

स्थानीय ईसाई समुदाय में आक्रोश

VOPM ने बताया कि इन हत्याओं से स्थानीय ईसाई समुदाय में गहरा दुख और गुस्सा फैल गया। परिवार और दोस्त शोक मनाने के लिए इकट्ठा हुए; कई लोग खुद को बेबस और डरा हुआ महसूस कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला कोई क्यों नहीं है।

परिजनों ने जाम किया क्वेटा-कराची हाईवे

संगठन ने बताया कि गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दोनों युवकों के शव एम्बुलेंस में रखे और व्यस्त क्वेटा-कराची हाईवे को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक ट्रैफिक में भारी रुकावट रही। VOPM ने कहा कि आयुष और डोमिनिक की हत्याएं कोई अलग-थलग घटना नहीं थीं, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा के लंबे समय से चले आ रहे सिलसिले का हिस्सा थीं।

एक दशक में 18 ईसाइयों की हत्या

VOPM के अनुसार, "पिछले एक दशक में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या हो चुकी है। कुछ लोगों की जान चर्चों पर हुए बम हमलों में गई, जबकि अन्य को उनके धर्म या जातीय पहचान के कारण निशाना बनाया गया।" संगठन ने कहा कि ईसाई समुदाय न केवल बलूचिस्तान में बल्कि पूरे पाकिस्तान में कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहा है। इनमें ईशनिंदा के झूठे आरोप, भीड़ की हिंसा और लगातार भेदभाव शामिल हैं। VOPM ने कहा कि कराची और पंजाब में हाल की घटनाएं दिखाती हैं कि हालात कितनी तेजी से बिगड़ सकते हैं और तनाव कैसे घरों और परिवारों पर हमलों में बदल सकता है।

 

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