होर्मुज जलडमरुमध्य पर बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव: भारतीय क्रू मेंबर की मौत के बाद ईरान पर भारत सख्त, वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट
खबर सार :-
होर्मुज जलडमरुमध्य में बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय सुरक्षा संकट नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। भारतीय नागरिक की मौत ने भारत की चिंता और कूटनीतिक सक्रियता को बढ़ा दिया है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
खबर विस्तार : -
India Iran oil crisis: ओमान के समुद्री क्षेत्र में होर्मुज जलडमरुमध्य के निकट संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत और कई अन्य भारतीयों के घायल होने के बाद भारत ने ईरान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों और व्यावसायिक गतिविधियों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे हमले तत्काल रोके जाएं ताकि वैश्विक व्यापार और समुद्री आवागमन सुरक्षित रह सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख को तलब कर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि इस हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई है, जबकि कई अन्य भारतीय घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है। भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए ईरान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोम्बासा और अल बहियाह नामक दोनों टैंकर होर्मुज जलडमरुमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उन पर दो ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक घायल हुए। चार घायलों की स्थिति गंभीर बताई गई है।
होर्मुज जलडमरुमध्यः वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा
होर्मुज जलडमरुमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा प्रतिदिन इसी मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों का तेल और प्राकृतिक गैस इसी जलमार्ग के जरिए एशिया, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचता है।

पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या समुद्री अवरोध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल की कीमतों और आयात लागत को सीधे प्रभावित कर सकता है। यदि इस मार्ग में लंबी अवधि तक बाधा आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन, उद्योग और महंगाई पर पड़ना तय है। पिछले कुछ वर्षों में होर्मुज जलडमरुमध्य कई बार क्षेत्रीय तनाव का केंद्र बन चुका है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते टकराव, इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां और तेल टैंकरों पर हमलों ने इस क्षेत्र को संवेदनशील बना दिया है। वैश्विक शक्तियां लगातार इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर सक्रिय हैं, क्योंकि यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
वैश्विक भू-राजनीति का सबसे अहम केंद्र बना होर्मुज जलडमरुमध्य
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज केवल क्षेत्रीय विवाद का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का सबसे अहम केंद्र बन चुका है। यदि यहां तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा संकट, समुद्री बीमा लागत में वृद्धि, माल ढुलाई की महंगाई और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। यही कारण है कि भारत सहित अनेक देश अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निर्बाध और सुरक्षित समुद्री आवागमन की वकालत कर रहे हैं। भारत ने दोहराया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नागरिक जहाजों और वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि समुद्री सुरक्षा बहाल करना केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
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