नेपाल में अब मौत के बाद भी चुकाना होगा टैक्स, मॉर्चरी में शव रखने पर 3% समता शुल्क; सरकार के फैसले का विरोध

खबर सार :-

नेपाल सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में 3 प्रतिशत अतिरिक्त समता शुल्क लगा दिया है। इसके तहत अब प्राइवेट अस्पतालों के माॅचरी में शव रखने पर भी 3 प्रतिशत टैक्स चुकाना होगा। यह शुल्क अस्पताल द्वारा दी जा रहीं सभी सेवाओं पर लागू होगा। सरकार के इस फैसले से निजी अस्पतालों में इलाज महंगा हो गया है।
नेपाल में अब मौत के बाद भी चुकाना होगा टैक्स, मॉर्चरी में शव रखने पर 3% समता शुल्क; सरकार के फैसले का विरोध

खबर विस्तार : -

काठमांडू: नेपाल सरकार की नई टैक्स पॉलिसी के तहत, अब मरने के बाद भी टैक्स देना होगा। शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर पर 3% का अतिरिक्त ‘समता शुल्क’ लगाने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में शवों को मुर्दाघर (मॉर्चरी) में रखने की फीस पर भी 3% टैक्स लगा दिया गया है। यह नियम 20 जुलाई से लागू हो गया है।

इस फैसले से प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई, दोनों ही महंगे हो गए हैं। वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले के लाए गए नियम के अनुसार, यह टैक्स अस्पतालों द्वारा दी जाने वाली सभी स्वास्थ्य सेवाओं पर लागू होता है, जिसमें मुर्दाघर का चार्ज भी शामिल है। काठमांडू के बड़े प्राइवेट अस्पताल जैसे नर्भिक, मेडिसिटी और ग्राण्डी और कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज फीस लेकर मुर्दाघर की सुविधा देते हैं; अब इस फीस पर भी 3% टैक्स लगेगा।

सभी सेवाओं पर लगेगा टैक्स

प्राइवेट अस्पतालों के संगठन के अध्यक्ष डॉ. पदम खड़का के अनुसार, सरकार के फैसले के बाद अस्पताल द्वारा जारी पूरे बिल पर 3% समता शुल्क लगेगा। उन्होंने कहा कि मुर्दाघर के इस्तेमाल और एम्बुलेंस सर्विस से लेकर डॉक्टर से सलाह लेने, दवा खरीदने और दूसरी हेल्थकेयर सर्विस तक सभी पर यह अतिरिक्त 3% चार्ज लगेगा। डॉ. खड़का ने कहा, "सरकार ने मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है। अब किसी भी अस्पताल के बिल में 3% समता शुल्क जोड़ा जाएगा, भले ही वह सिर्फ मुर्दाघर के चार्ज के लिए ही क्यों न हो।" 

सरकार पर अपील न मानने का आरोप

डॉ. खड़का ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को टैक्स वसूलने वाला बना दिया है। उन्होंने आगे कहा, "सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को सजा दी है। हमें इस अतिरिक्त टैक्स को वसूलने का जरिया बना दिया गया है।" डॉ. खड़का ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों ने सरकार से कई बार इस टैक्स को हटाने की अपील की थी, लेकिन सरकार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि अस्पताल अब इस फैसले का विरोध नहीं करेंगे और सरकारी निर्देशों के अनुसार टैक्स वसूलेंगे।

शिक्षा, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा विकास

वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने फाइनेंस बिल के जरिए प्राइवेट शिक्षण संस्थानों (स्कूलों और कॉलेजों) और प्राइवेट अस्पतालों द्वारा लिए जाने वाले सभी सर्विस चार्ज पर 3% स्वास्थ्य एवं शिक्षा समता शुल्क लगाने की घोषणा की। फाइनेंस बिल में यह प्रावधान है कि प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स द्वारा मरीजों से लिए जाने वाले सभी सर्विस चार्ज पर 3% स्वास्थ्य समता शुल्क लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल शिक्षा की क्वालिटी बेहतर करने, हेल्थकेयर सर्विस तक पहुंच बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में किया जाएगा।

निर्धारित समय तक टैक्स जमा न करने पर जुर्माना

बिल के अनुसार, संबंधित संस्थानों को टैक्स मिलाकर बिल जारी करना होगा और इकट्ठा की गई रकम इनलैंड रेवेन्यू ऑफिस में जमा करनी होगी। तय समय के अंदर टैक्स जमा न करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद, अगर किसी अस्पताल की OPD फीस 1,000 रुपये है, तो मरीज को अब 1,030 रुपये देने होंगे। इसी तरह, अगर किसी मरीज के इलाज का खर्च 1 लाख रुपये आता है, तो उन्हें स्वास्थ्य समता शुल्क के तौर पर 3,000 अतिरिक्त रुपये देने होंगे।

सरकार के फैसले का हो रहा विरोध

नेपाल में सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमेश कोइराला ने X पर लिखा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौत के बाद लगने वाले मॉर्चरी चार्ज पर भी टैक्स लगाया जा रहा है, जबकि सरकार अच्छी पब्लिक हेल्थकेयर देने में नाकाम रही है और नागरिकों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अगर कोई सरकारी अस्पताल इलाज न कर पाने की वजह से मरीज को प्राइवेट अस्पताल भेजता है और वहां मरीज की मौत हो जाती है, तो मॉर्चरी चार्ज पर लगने वाला टैक्स अस्पताल के बिल में जुड़ जाएगा, जो बिल्कुल गलत है।

 

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