अमेरिका-ईरान युद्ध: 100 अमेरिकी सैनिक घायल, बढ़ता सैन्य तनाव; नई भू-राजनीतिक चुनौती के मुहाने पर दुनिया
खबर सार :-
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति की बड़ी परीक्षा बन चुका है। दोनों देशों की लगातार सैन्य कार्रवाई से तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
खबर विस्तार : -
US soldiers injured: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने पहली बार स्वीकार किया है कि ईरान के जवाबी हमलों में 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि ये सभी सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए, जिनमें अधिकांश को हल्की सिर की चोट (कंकशन) आई। राहत की बात यह रही कि लगभग 96 प्रतिशत सैनिक उपचार के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं। हालांकि, इस खुलासे ने युद्ध की वास्तविक स्थिति और अमेरिकी सैन्य नुकसान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शॉन पार्नेल ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट का जवाब दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि रक्षा विभाग युद्ध में घायल हुए सैनिकों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में घायलों और हताहतों से जुड़े सभी आधिकारिक आंकड़े डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (डीसीएएस) के माध्यम से जारी किए जाएंगे।
अमेरिकी सेना को लगातार नुकसान
युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। हाल के दिनों में तीन और सैनिकों ने जान गंवाई। पेंटागन के अनुसार, जॉर्डन स्थित मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर ईरान समर्थित हमले में फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहान और प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस की मौत हुई। वहीं उत्तरी इराक में एक अन्य अमेरिकी सैनिक की मौत गिराए गए ईरानी ड्रोन के बिना फटे विस्फोटक को निष्क्रिय करने के दौरान हुई। दूसरी ओर अमेरिका ने भी ईरान पर अपने सैन्य अभियान की रफ्तार कम नहीं की है। स्थानीय समयानुसार सोमवार शाम अमेरिका ने ईरान पर एक और हवाई हमला किया। यह लगातार दसवां दिन था, जब अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया।
पेंटागन के मुताबिक 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद अब तक कुल 427 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इस संघर्ष के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में दोहराया कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना है। उन्होंने युद्ध में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक राजनीति
अमेरिका-ईरान टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे दी है। इजरायल खुलकर अमेरिका के साथ खड़ा है, जबकि ईरान को क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों और कुछ मित्र देशों का समर्थन मिल रहा है। रूस और चीन लगातार संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन दोनों देश अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना भी कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।
एक्सपर्ट्सः संघर्ष लंबा चला तो पड़ेगा व्यापक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। फारस की खाड़ी और लाल सागर जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में नए सैन्य गठबंधनों और शक्ति संतुलन के बदलते समीकरण अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।
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