भारत की बांग्लादेश पर नजर, कॉरिडोर के बहाने भारत के करीब आ रहा चीन
खबर सार :-
चीन का सहयोग बढ़ता जा रहा है। करीब एक दशक से बांग्लादेश में चीन की जो पैठ बन चुकी है, वह भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है। चीन ने जिस गति से बांग्लादेश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए औद्योगिक सामरिक और तकनीक क्षेत्र में निवेश बढ़ाया है, उससे वहां का भू-परिवेश के साथ ही राजनीतिक परिदृष्य में भी बदलाव हुआ है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: चीन का सहयोग बढ़ता जा रहा है। करीब एक दशक से बांग्लादेश में चीन की जो पैठ बन चुकी है, वह भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है। चीन ने जिस गति से बांग्लादेश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए औद्योगिक सामरिक और तकनीक क्षेत्र में निवेश बढ़ाया है, उससे वहां का भू-परिवेश के साथ ही राजनीतिक परिदृष्य में भी बदलाव हुआ है। इन दो देशों के बीच में बढ़ती मित्रता एशिया के कई राष्ट्रों को भी प्रभावित कर सकती है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक संबंध भारत से बेहतर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में सरकार से भारत की दूरियां ज्यादा हैं।
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इसलिए हिंद प्रशांत क्षेत्र की ओर राजनीतिक संतुलन स्थानांतरित हो रहा है। इस परिदृश्य में एक बात स्पष्ट नजर आ रही है कि दक्षिण एशिया का सामरिक महत्व बढ़ रहा है। इसमें चीन की दखलंदाजी बड़ा कारण है। अभी तक चीन ने पाकिस्तान को मोहरा बनाकर रखा था, लेकिन अमेरिका कई मामलों में पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है। यही कारण है कि चीन को पाकिस्तान से दूरियां बनानी पड़ीं। अमेरिका आर्थिक रूप से भी पाकिस्तान की मदद करता रहता है। कुछ सालों में चीन ने जिस तरह से बांग्लादेश को अपनी जमीन बनाई है, उसमें भारत की पूर्वी सीमा स्थित पड़ोसी देश के रूप में बांग्लादेश. समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क, हिंद प्रशांत रणनीति के अलावा महाशक्तियों के रूप में प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन रहा है।
सबसे बडा व्यापारिक साझेदार बांग्लादेश
चीन की डिजिटल तकनीकी, ऊर्जा संरचना, रक्षा उत्पादन भी इन क्षेत्रों में सक्रिय हैं। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड का महत्व पूर्ण भाग बनाया है। इसमें औद्योगिक पार्क आर्थिक क्षेत्र में अरब डॉलर का निवेश संयंत्र विकसित करना, पुल, रेलवे, सड़क, बंदरगाह आदि तैयार करने हैं। यह सारी व्यवस्थाएं ऐसी हैं जो बांग्लादेश को समृद्धिषाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैैं। सबसे बडा व्यापारिक साझेदार बांग्लादेश को ही मानता है। सबसे महत्वपूर्ण घोषणा चीन, म्यांमार, बांग्लादेश आर्थिक गलियारे को आगे बढ़ाने की है। इस परियोजना को लेकर माना जा रहा है कि दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी एशिया के बीच व्यापार के संपर्क का नया मार्ग तैयार हो सकता है। इसमें बीजिंग यात्रा के दौरान तीस्ता नदी का व्यापक प्रबंध और पुनर्स्थापना परियोजना पर चीन की विशेष रूप से सफलता होगी।
चीन परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता
भारत और बांग्लादेश के बीच लंबित वार्ता तीस्ता जल बटवारा में भी हस्तक्षेप नजर आ रहा है। यदि चीन इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, तो यह एक विकास परियोजना नहीं रहेगा। भारत बांग्लादेश के सामरिक समीकरणों को भी दरार दे सकता है। सीमा से जुड़े जल संसाधन भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय तो बनेंगे ही, क्षेत्रीय कूटनीति का महत्व बड़ा आधार बन जाएंगे। 21वीं सदी का नया समीकरण नीति के केंद्र बंगाल की खाड़ी रही है। जो आज केवल समुद्र तक ही नहीं, बल्कि इसका विस्तार बहुत बड़ा हो चुका है। यहां पर ऊर्जा समुद्री जल शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल भौगोलिक क्षेत्र को लेकर नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच सामाजिक, भाषा.संस्कृत, इतिहास, विरासत और विश्वास को लेकर भी रहा है।
1971 का वह दौर, संग्राम की स्मृतियां बनीं
1971 का वह दौर, संग्राम की स्मृतियां बनी हुई हैं। कई ऐसे समझौते भी पूर्व के वर्षों में हुए थे, जिससे यह देश काफी करीब रहे। इनमें पैट्रोलियम, पाइपलाइन, ऊर्जा, सहयोग, डिजिटल, संपर्क अंतर्देशीय जल, मार्ग आदि प्रमुख रहे हैं। इसलिए जरूरत इस बात की है कि भारत को चीन के बांग्लादेश में बढ़ते दबाव या हस्तक्षेप पर नजर रखना है। भारत को परियोजनाएं समय पर पूरा करना होगा। भारत में निवेश भी भरपूर होगा, बांग्लादेश आजादी के बाद से कई बार लड़खड़ाया है। इसलिए वहां के लोग विकास चाहते हैं। इसका फायदा चीन उठा रहा है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता केवल सैन्य शक्ति से ही नहीं होगी, बल्कि सुरक्षा, आपदा, प्रबंधन, क्षेत्रीय संपर्क, इकोनामी, व्यवस्था, भारत और बांग्लादेश की साझेदारी पूरी करने के लिए काफी हैं। बंगाल की खाड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मैदान बनने के बजाय क्षेत्रीय समृद्धि का केंद्र बन सकती है।
FAQ...
1. क्या भारत को बांग्लादेश के साथ पड़ोसी संबंध रखने होंगे?
भारत और बांग्लादेश के बीच लंबित वार्ता तीस्ता जल बंटवारा है। चीन इसमें भी गुंजाइश देख रहा है। यदि चीन ऐसी परियोजना में पांव पसारता है, तो यह भारत के लिए शुभ नहीं रहेगा। केवल पड़ोसी ही नहीं कूटनीतिक प्रयास भी रखने होंगे।
2. भारत-बांग्लादेश का सामरिक महत्व क्या है
वैसे तो भारत-बांग्लादेश का सामरिक समीकरण खास नहीं है। हां सीमा से जुड़े जल संसाधन भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं। यदि चीन की ओर उसका झुकाव रहा तो यह चीन को मजबूत करेगा।
3. बांग्लादेश किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है
यह ऊर्जा, समुद्री जल शक्ति और इकोनामी को बेहतर बना रहा है। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र, गलियारे आदि को महत्व दे रहा है। तकनीकी विस्तार यह काफी कर चुका है।
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