तस्लीमा नसरीन ने फिर मदरसों के औचित्य पर उठाए सवाल, समान नागरिक संहिता की वकालत कर कहा हिंदुओं पर बढ़ रहे अत्याचार

खबर सार :-

बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक बार फिर मदरसों के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर यूनुस सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
19 साल बाद कोलकाता में बोलीं नसरीन, कहा शेख हसीना को वापस बुलाए सरकार

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली : बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक बार फिर मदरसों के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर यूनुस सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। लेखिका बीते दिनों कोलकाता में एक समारोह के दौरान मौजूद थीं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री को भी बुलाने की मांग की। तस्लीमा ने कहा कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने दिया जाए। इससे पहले भी वह ऐसी टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरी रहीं। तस्लीमा नसरीन ने कहा की मुझे नहीं लगता है, मदरसों की कोई जरूरत है।

समान नागरिक संहिता विकसित देशों में लागू

तस्लीमा नसरीन ने भारत में भी यूसीसी लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि समान नागरिक संहिता विकसित देशों में लागू है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को समान नागरिक संहिता की जरूरत है। धर्म या जाति के आधार पर किसी भी देश में कानून नहीं बनाया जाना चाहिए। तस्लीमा नसरीन ने ऐसे समय में यह वक्तव्य दिया है, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार समान नागरिक संहिता पर काफी जोर दे रही है। इस मसौदे की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित कर दी है। सरकार की ओर से जो अभी सूचना जारी की गई है, उसमें प्रस्तावित कानून की व्यापक स्थिति और उसकी जरूरत के आधार पर एक पैनल बनाया गया है।

बांग्लादेश में भी समान कानून बनाए जाने की मांग

इस पैनल में काम करते हुए समिति किसी आगे के लिए ड्राफ्ट बिल की व्यापक जांच करेगी। बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ऐसी तमाम बातें पिछले दिनों मीडिया के सामने रखीं। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने की जरूरत है। यह इसलिए, क्योंकि भेदभाव खासकर महिलाओं के साथ होता है। जब ऐसा कानून बन जाएगा तो सुख सुविधाएं बढ़ जाएंगी। तस्लीमा अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी समान कानून बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरती है। दुनिया यह जानती है कि यहां पर हिंदुओं, सिखों और बौद्धों पर अत्याचार होते हैैं। मगर सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है।

मदरसों की भूमिका की जांच होनी चाहिए

इसलिए, उन्होंने कहा कि ऐसे मदरसों की देश में जरूरत नहीं है। तस्लीमा ने 2007 में कोलकाता छोड़ा था। उनकी एक किताब के प्रकाशन का राज्य में जमकर विरोध हुआ था। इस दौरान कई स्थानों पर हिंसक वारदातें भी हुई थी। राज्य सरकार के फैसले पर तस्लीमा को कहा गया था कि वह बंगाल छोड़ दें। तस्लीमा उसके बाद देश से बाहर चली गईं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में जो भी सरकार आई, उसने बेहतर संबंध बनाने की कोशिश नहीं की। सरकार 2026 में बदली तो भाजपा के शासन में तस्लीमा 19 साल बाद भारत लौटीं। बंगाल के लोगों ने उनका जमकर स्वागत किया। वह काफी प्रसन्न हुईं और बोलीं कि यहां आकर खुशी मिल रही है। उन्होंने कहा कि मदरसों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। इसमें धार्मिक कट्टरवाद पर चिंता जताई। कहा कि बांग्लादेश में मदरसों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। कई मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि मदरसे जिहादी तैयारी कर रहे हैं।

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बच्चों और बड़ों को जमकर पीटा गया

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्नातक है, वह आगे बढ़ने की कोशिश नहीं कर रहा है। पिछले साल भी बांग्लादेश में जमकर हिंसा हुई थी। इसमें हिंदुओं के घर जला दिए गए। महिलाओं से अभद्रता की गई। बच्चों और बड़ों को जमकर पीटा गया। यह सब बातें प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुईं। वह एक कार्यक्रम में कोलकाता आई थीं। व्यावहारिक रूप से उन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य की एक टिप्पणी का समर्थन भी किया और कहा कि मदरसों में आतंकी तैयार किए जाते हैं। 2002 में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी राज्य की सीमावर्ती इलाकों में गैर कानूनी मदरसों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मदरसे आतंकी गतिविधियों का केंद्र बन गए हैं। इसके बाद अब तो 2026 चल रहा है।

विपक्ष में भी बुद्धिमान व्यक्ति होना चाहिए

पिछले साल बांग्लादेश में हुई हिंसात्मक वारदात पर नाराजगी जताते हुए लेखिका ने कहा कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने दिया जाना चाहिए। नसरीन ने कहा कि सरकार आवामी लीग से बैन हटा ले। वह शेख हसीना को बांग्लादेश वापसी चाहती हैैं। सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष में भी मजबूत और बुद्धिमान व्यक्ति होना चाहिए। शेख हसीना व्यावहारिक रूप से कई देशों में बुद्धिजीवी मानी जाती हैं। नसरीन ने उम्मीद जताई है कि भारत बांग्लादेश के संबंध बेहतर होंगे। उन्होंने कहा कि भारत ने बांग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण साथ दिया है। कट्टरपंथी समूहों के प्रभाव में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। जैसे 19 साल पहले वह दिखाई दे रहे थे, आज भी वैसे ही हैं। 

FAQ

1. क्या वास्तव में बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न हो रहा है?

जब से यूनुस सरकार बनी है। हिंदुओं पर अत्याचार की बाढ़ आ गई है। सरकार के पास ना तो कोई कानून है और न ही स्थिति को संभालने वाला साहस। इसलिए हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े हैं।

2 . मदरसों पर सवाल उठाना क्या उचित था?

उन्होंने कोई ऐसी बात नहीं की है, जिससे किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न हो । तस्लीमा ने अच्छी शिक्षा के लिए कहा है कि वह पढ़ाई होनी चाहिए जो लंबे जीवन की यात्रा तक साथ निभाए। उन्होंने कहा कि मदरसों में यह तो जरूर है कि अन्य धर्म के खिलाफ बोलने के लिए कहा जाता है। 

3.  तस्लीमा नसरीन को क्या भारत में संरक्षण देना उचित है

तस्लीमा किसी प्रकार की विवादित नेत्री, कवियत्री या लेखिका नहीं है। वह साहित्यकार हैं। शांत स्वभाव की हैं अपनी बात मंच पर रखती हैं। इस कारण लोग उनसे खफा हैं। मगर, राष्ट्रीय मामलों में वह किसी प्रकार की मुश्किल नहीं बनती हैं।

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