बांग्लादेश में रंगपुर से लेकर ढाका तक फैली हिंसा, दो छात्र संगठनों में टकराव, करीब 100 लोग घायल
खबर सार :-
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार को जुलाई विद्रोह के दौरान लोकतांत्रिक जागृति का प्रतीक रहे शिक्षण संस्थान दो साल बाद फिर लड़ाई के मैदान में बदल गए। कभी बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के समय यहां शांति रहती थी।
खबर विस्तार : -
ढाका : बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार को जुलाई विद्रोह के दौरान लोकतांत्रिक जागृति का प्रतीक रहे शिक्षण संस्थान दो साल बाद फिर लड़ाई के मैदान में बदल गए। कभी बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के समय यहां शांति रहती थी। दो दिनों के भीतर ढाका में जातीयतावादी छात्र दल (जेसीडी) और इस्लामी छात्र शिविर के कार्यकर्ताओं के बीच खूब झड़पें हुईं। रंगपुर के बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी से लेकर राजधानी के जगन्नाथ यूनिवर्सिटी, ढाका कॉलेज और गवर्नमेंट मदरसा-ए-आलिया तक हिंसा की आग फैल गईं। यह कैंपस में प्रभाव और संगठनात्मक दबदबे को लेकर दो विरोधी छात्र संगठनों के बीच टकराव था।
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ढाका ट्रिब्यून अखबार में छपी पहली खबर कहती है कि बड़ी झड़प सोमवार शाम बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी में जुलाई विद्रोह दिवस के मौके पर हुई। यहां एक प्रदर्शनी आयोजित थी। हिंसा तब शुरू हुई जब छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने न्यायिक हत्या शीर्षक वाले एक बैनर पर आपत्ति जताई। इस बैनर पर जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के छह नेताओं की तस्वीरें थीं। प्रशासन के अनुसार, इनको 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए दोषी माना गया था। देखते-देखते यह विवाद हिंसक हो गया।
करीब पांच घंटे तक लाठी-डंडे चले
जब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस हिंसा को रोकने में नाकाम हुआ तो उसने बड़े पैमाने पर पुलिस फोर्स बुलाई। प्रत्यक्ष दर्शियों का कहना है कि दो छात्र गुट थे और दोनों हिंसात्मक व्यवहार कर रहे थे। उनके पास धारदार हथियार, लोहे, लाठी-डंडे थे। इस दौरान कैंपस के आसपास अफरातफरी मच गई। हिंसात्मक वारदातों को देखकर लोग इधर-उधर भागने लगे। सड़कों पर जाम लग गया। हिंसा की आग दूसरे कालेजों तक पहुंच गई। यह सोमवार का मामला मंगलवार को भी उठा। मंगलवार को ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में एक डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के दौरान विरोधी छात्र आपस में टकरा गए। इस दौरान प्रोफेसर अहमद मौजूद रहे। बताया जाता है कि तनाव इसी जगह से शुरू हुआ था।
छात्र कैंपस में घुसने के लिए लड़ रहे थे
तब जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन और जाति छात्र शक्ति के सदस्य कैंपस में घुसने के लिए लड़ रहे थे। उनके हाथों में प्ले कार्ड थे और यह बराबर ऑडिटोरियम में जाने के लिए कह रहे थे। छात्रों के एक दल ने इन्हें रोका तो बात बिगड़ गई और बड़े पैमाने पर हिंसा भडक उठी। बाद में यही झड़पे नेशनल मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गई। डॉक्टरों के अनुसार 70 से ज्यादा घायलों का उपचार मंगलवार को किया गया। सूत्र बताते हैं कि अब तक सबसे ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं।
स्टूडेंट के अलावा कई पत्रकार भी घायल हुए
इस हिंसा में छात्र दल शिविर के लोग जातीय छात्र शक्ति और यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन के नेता के अलावा कई पत्रकार भी घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लगभग 20 लोग मौके पर ही जख्मी देखे गए। दोपहर तक बक्शी बाजार के गवर्नमेंट मदरसा आलिया में हिंसा फैली। इस हिंसा में बीच बचाव कर रहे प्रिंसिपल भी घायल हुए। राजधानी के शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में पुलिस बुलानी पड़ी। मंगलवार की रात को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस प्रशासन की मदद से एक जांच समिति बनाई है। अब यह जांच समिति मामले की जांच कर कार्रवाई को प्रेषित करेगी।
FAQ...
1. क्या बांग्लादेश में पूर्व पीएम शेख हसीना की वापसी की मांग चल रही है ?
पूर्व पीएम शेख हसीना को देश आने दिया जाए, यह मांग बांग्लादेश में काफी दिनों से चल रही है। उनके दौरान लोकतंत्र बेहतर था। युवकों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता था।
2. यूनिवर्सिटी में उठी हिंसा की आग क्या दूसरे कॉलेज तक पहुंच सकती है ?
पहले सोमवार और फिर मंगलवार को हिंसा की झड़पे हुई हैं। इसकी आंच मंगलवार को एक कॉलेज पहुंच चुकी है। जहां कई छात्र घायल हुए हैं।
3. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पहले पुलिस की मदद क्यों नहीं ली
माना जा रहा है कि पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन मान रहा था कि वह माहौल को नियंत्रित कर लेगा, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे तो प्रशासन ने पुलिस की मदद ली।
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