बेटे और भाई के शवों के साथ देवरिया पहुंचा जवान का पार्थिव शरीर, गांव में छाया मातम; अंतिम विदाई देने उमड़े लोग

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुए दर्दनाक हादसे से देवरिया में मातम छाया है। सोमवार सुबह जवान के पार्थिव शरीर के साथ तीन अन्य शव गांव पहुंचने पर शोक की लहर दौड़ गई।
मृतकों के शव पहुंचे देवरिया, अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा पूरा गांव

खबर विस्तार : -

देवरिया: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक दुखद सड़क हादसे के बाद सेना के एक जवान का पार्थिव शरीर लेकर देवरिया लौट रहे चार लोगों की मौत से सोमवार को गहिला दुधैला गांव में मातम छा गया। इस हादसे में जवान के इकलौते बेटे गौरव सिंह (18), उनके बड़े भाई रामसमुझ (55), एक रिश्तेदार राजन सिंह (35) और एम्बुलेंस ड्राइवर जसपाल सिंह की जान चली गई।

सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे जब दो एम्बुलेंस में शव गांव पहुंचे, तो परिवारवालों के रोने-बिलखने से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम सम्मान देने के लिए हजारों ग्रामीण जमा हुए। सेना के जवान सत्यवान सिंह की पत्नी सरोजनी देवी अपने पति का पार्थिव शरीर देखकर गहरे दुख में टूट गईं।

शव लेकर लौटते समय हुआ हादसा

गहिला दुधैला गांव के रहने वाले सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह का चंडीगढ़ के आर्मी कमांड हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के तीन दिन बाद निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से पंचकूला से देवरिया लाया जा रहा था और परिवार के सदस्य भी साथ थे। रविवार सुबह करीब 8:15 बजे, सुल्तानपुर जिले में अयोध्या बॉर्डर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हलियापुर के पास एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

अस्पताल में चारों घायलों ने तोड़ा दम

टक्कर इतनी जोरदार थी कि एम्बुलेंस में सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलने पर पुलिस सभी को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने गौरव सिंह, रामसमुझ, राजन सिंह और ड्राइवर जसपाल को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद सत्यवान सिंह का पार्थिव शरीर हलियापुर थाने में रखा गया, जबकि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद देर शाम शवों को देवरिया भेजा गया।

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शव पहुंचने पर गांव में छाया मातम

सोमवार सुबह जब शव गांव पहुंचे तो गांव में मातम छा गया। परिवार तब बुरी तरह टूट गया जब सत्यवान सिंह का पार्थिव शरीर उनके इकलौते बेटे और बड़े भाई के शवों के साथ पहुंचा। मृतक राजन सिंह एक मौजूदा नगर पार्षद भी थे। उनके शव रुद्रपुर के भरतोली वार्ड में उनके घर लाए गए, जहां शोक में डूबे रिश्तेदारों के रोने-बिलखने से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम सम्मान देने के बाद, सभी शवों को अंतिम संस्कार के लिए रुद्रपुर में बथुआ नदी के किनारे स्थित बैकुंठ धाम ले जाया गया।

चार चिताएं देखकर गमगीन हुआ माहौल

अंतिम संस्कार के जुलूस में हजारों लोग शामिल हुए। रास्ते भर "भारत माता की जय" और "सत्यवान सिंह अमर रहें" के नारे गूंजते रहे। बैकुंठ धाम में चारों शवों के लिए अलग-अलग चिताएं तैयार की गईं। चार लोगों की एक साथ मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

अंतिम संस्कार में शामिल हुए कृषि मंत्री 

परिवार के सदस्यों के अनुसार, वे सत्यवान सिंह के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए गांव ला रहे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में ऐसी त्रासदी उनका इंतजार कर रही होगी। जिस व्यक्ति को आखिरी विदाई देने के लिए वे लौट रहे थे, मौत में उनके साथ उनका इकलौता बेटा, बड़े भाई और एक रिश्तेदार भी शामिल हो गए। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित क्षेत्रीय नेता श्रद्धांजलि देने और सेना के जवान की अंतिम विदाई में शामिल होने पहुंचे।

पत्नी ने पत्र सौंपकर मुआवजे की मांग की

सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह की पत्नी सरोजिनी देवी ने जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें मुख्यमंत्री से प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹5 करोड़ की आर्थिक सहायता देने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने गांव में सत्यवान सिंह के नाम पर एक भव्य प्रवेश द्वार बनाने, उनके नाम पर पेट्रोल पंप आवंटित करने और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है। परिवार ने दुख की इस घड़ी में सरकार से हर संभव मदद की अपील की है।

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