भदोही के कालीन को वैश्विक बाजार में नई पहचान, बोले योगी- कारीगरों को हुनर दिखाने का मिल रहा मंच

खबर सार :-

भदोही में इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तकनीक, डिजाइन, बाजार और बेहतर कनेक्टिविटी से कारीगरों को नई संभावनाएं मिली हैं।
इंडिया कारपेट एक्सपो: बोले योगी- कारीगरों को मिल रहा मंच

खबर विस्तार : -

भदोही: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक, डिजाइन, बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा के कारण प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों को नई संभावनाएं मिली हैं और भदोही का कालीन वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर, भदोही स्थित कारपेट एक्सपो मार्ट में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर एक्सपो का उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉलों पर जाकर कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों के उत्पादों का अवलोकन किया। एक्सपो में 227 से अधिक एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार भी शामिल हैं। इस आयोजन को भदोही के कालीन उद्योग के लिए वैश्विक बाजार से जुड़ने और नए कारोबारी अवसर तलाशने के महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है।

ODOP से कालीन उद्योग को मिला बाजार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल प्रभावित था। उनके मुताबिक, इसका असर कारीगरों और उद्यमियों पर भी पड़ा और खरीदारों का आना कम हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत भदोही के कालीन को प्रमुखता से बढ़ावा दिया और कारीगरों को तकनीक, डिजाइन तथा बाजार से जोड़ने का काम किया। इससे पारंपरिक कालीन उद्योग को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिली। सरकारी आंकड़ों और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में दिए गए विवरण के मुताबिक, संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से करीब 6,100 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई गई।

मुख्यमंत्री के अनुसार, अकेले संत रविदास नगर में करीब 2,500 एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनका वार्षिक कारोबार लगभग 10 हजार करोड़ रुपये है। कालीन उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की बात भी उन्होंने कही।

90 प्रतिशत कालीन विदेशों में निर्यात

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिले में निर्मित करीब 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों में निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी प्राप्त है, जिससे इसकी विशिष्ट पहचान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलती है। कालीन उद्योग में तकनीकी कौशल और डिजाइन क्षमता बढ़ाने के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी की स्थापना का भी उल्लेख मुख्यमंत्री ने किया। यहां कारपेट और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी के साथ डिजाइनिंग तथा डाइंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क, हवाई और जलमार्ग कनेक्टिविटी का सीधा लाभ भदोही के कालीन उद्योग को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने के बाद संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने में करीब छह घंटे लगने की संभावना है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कार्गो सुविधा के जरिए भदोही के कालीनों को देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटरवे और वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की कार्गो सुविधा को भी कालीन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एमएसएमई क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार बताया जाता रहा है। राज्य के आधिकारिक निवेश पोर्टल के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं।

निवेश और एमएसएमई पर भी बोले योगी

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगे नहीं होते तथा माफिया खुले तौर पर लोगों को धमका नहीं सकते। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश को करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। योगी ने कहा कि करीब साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के उद्योग जल्द धरातल पर उतरने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है।

भदोही के कारपेट एक्सपो में देश-विदेश के खरीदारों की भागीदारी को कालीन उद्योग के लिए बाजार विस्तार के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। स्वर्ण जयंती संस्करण के जरिए पारंपरिक हस्तशिल्प, आधुनिक डिजाइन और वैश्विक खरीदारों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर है। इससे स्थानीय कारीगरों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग समझने तथा नए कारोबारी संबंध विकसित करने का अवसर मिल रहा है। भदोही लंबे समय से भारत के प्रमुख हस्तनिर्मित कालीन केंद्रों में शामिल रहा है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में भी पारंपरिक हस्तशिल्प और एमएसएमई क्लस्टरों को तकनीक, कौशल और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

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