ग्वालियर में बिना मान्यता चल रहा था दारूल कुरान मदरसा, बाल आयोग ने निरीक्षण कर 26 बच्चों को बचाया
खबर सार :-
ग्वालियर के दारुल कुरान मदरसे में शुक्रवार को बाल आयोग की एक टीम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलीं। टीम ने 26 बच्चों का रेस्क्यू किया है।
खबर विस्तार : -
ग्वालियर: शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (MPSCPCR) की एक टीम ने ग्वालियर में AG कार्यालय के पास स्थित 'दारुल कुरान मदरसा' का औचक निरीक्षण किया। आयोग की अध्यक्ष ने महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति (CWC) के साथ मिलकर मदरसे से 26 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जब मदरसा प्रबंधन से मान्यता के दस्तावेज और सबूत मांगे गए, तो वे कोई भी रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके।
मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में निरीक्षण टीम ने शुक्रवार को झांसी रोड इलाके में AG कार्यालय के पास स्थित 'दारुल कुरान मदरसा' का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं। पता चला कि बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रखा गया था। आयोग की टीम ने 26 बच्चों (18 लड़के और 8 लड़कियां) को सुरक्षित निकाला और उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) की देखरेख में सौंप दिया।
बाल कल्याण समिति को मिली जानकारी
बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि AG कार्यालय के पास 'अंजुमन इस्लाह-ए-मुआशरा समिति' द्वारा संचालित 'दारुल कुरान मदरसा' में बच्चों को अवैध रूप से और बिना किसी आधिकारिक मान्यता के रखा जा रहा है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर खुद इस छापेमारी का नेतृत्व किया। वहां पहुंचने पर पूरी जगह का निरीक्षण किया गया और प्रबंधन से जरूरी दस्तावेज मांगे गए। परिसर में बच्चों के रहने के लिए कई कमरे और अन्य व्यवस्थाएं थीं।
देखभाल के इंतजामों की भारी कमी
निरीक्षण में सुरक्षा और देखभाल के इंतजामों की भारी कमी पाई गई। शुक्रवार दोपहर से शाम तक चली इस कार्रवाई के दौरान, मदरसा प्रबंधन कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इस बीच, प्रबंधन ने बच्चों को तुरंत रिहा करने की मांग की और तर्क दिया कि जरूरी कागजात जुटाने में समय लगेगा। पूछताछ के दौरान, कुछ बच्चों ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा को बताया कि वे वहां खुश नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया था।
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हिंदी और उर्दू भाषा की कई किताबें जब्त
आयोग की अध्यक्ष ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। यह भी सामने आया है कि बच्चों से 500 से 800 रुपये तक की फीस ली जा रही थी। एक कमरे में रखी किताबों की भी जांच की गई; अध्यक्ष ने हिंदी और उर्दू भाषा की कई किताबों को जब्त कर लिया। आरोप है कि हिंदी भाषा की कुछ किताबों में हिंदू, यहूदी और ईसाई धर्मों के खिलाफ सामग्री मौजूद है। इन किताबों में असल में क्या लिखा है और इनके जरिए क्या पढ़ाया जा रहा था, इसकी जांच की जा रही है।
लड़कियां कमरों में बंद मिलीं
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बताया कि एक शिकायत मिली थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मदरसे में बच्चों—लड़कों और लड़कियों दोनों को अवैध रूप से रखा जा रहा है। जांच में पता चला कि मदरसे के प्रबंधन के पास कोई आधिकारिक मान्यता नहीं है। तीन लड़कियां एक कमरे में बंद मिलीं, एक ऐसी बात जिसे प्रबंधन ने छिपा लिया था। जांच के दौरान ही उनके वहां होने का पता चला। आयोग के अनुसार, मदरसे में न केवल ग्वालियर-चंबल संभाग के, बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान के बच्चे भी रह रहे थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि मदरसे में 15 लड़कियां और 42 लड़के पंजीकृत हैं; हालांकि, जांच में सामने आया कि इनमें से कई बच्चे नियमित स्कूलों में नहीं जा रहे थे।
मदरसा प्रबंधन व परिवारों ने जताया विरोध
इस बीच, मदरसे के प्रबंधन ने आयोग की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। मदरसे के एक शिक्षक, मोहम्मद शाकिर ने बताया कि इमारत का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, जिसकी वजह से कुछ अस्थायी कमियां रह गई हैं और इन समस्याओं को दूर करने का काम चल रहा है। उन्होंने आयोग की इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण और "जानबूझकर निशाना बनाने वाला" बताया। कार्रवाई के बारे में पता चलने पर बच्चों के परिजन मौके पर पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। परिवारों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों के रहने, खाने-पीने या पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं थी; फिर भी उनका दावा है कि बच्चों को जबरन वहां से हटा दिया गया।
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