जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा? रामदास आठवले के बयान से बढ़ी चर्चा
खबर सार :-
रामदास आठवले ने श्रीनगर में कहा कि जम्मू-कश्मीर को निकट भविष्य में राज्य का दर्जा मिल सकता है। जानें अनुच्छेद 370, विकास योजनाओं और केंद्र सरकार के रुख पर उनका बयान।
खबर विस्तार : -
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने रविवार को श्रीनगर में कहा कि निकट भविष्य में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार इस केंद्र शासित प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आठवले के इस बयान के बाद राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
पीएम मोदी और अमित शाह के वादे का किया जिक्र
श्रीनगर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के वादे से अवगत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, आठवले ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई निश्चित तारीख या समयसीमा नहीं बताई। उनकी ओर से दिए गए बयान को संभावित बहाली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसे केंद्र सरकार की ओर से किसी औपचारिक घोषणा के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और संवैधानिक बहस का हिस्सा रहा है। ऐसे में आठवले का बयान इस विषय पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित करता है।
विकास योजनाओं और फंड आवंटन पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास में राजनीतिक मतभेद बाधा नहीं बनने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। आठवले ने स्थानीय प्रशासन से अपील की कि वह क्षेत्र की विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करे, ताकि केंद्र सरकार के माध्यम से जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उनके मुताबिक, विकास योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर आम लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क, शिक्षा, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदले हालात: आठवले
अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले का उल्लेख करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर भारतीय संविधान के पूर्ण दायरे में आया। उनके अनुसार, इस बदलाव के बाद क्षेत्र में विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का रास्ता मजबूत हुआ है। आठवले ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में पहले की तुलना में हालात बेहतर हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि क्षेत्र के सामने अब भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करने के साथ तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की मांग लगातार उठती रही है।
पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान पर भी बोले
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आठवले ने पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस घटना के जवाब में कदम उठाए हैं और पाकिस्तान से आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने की मांग की है। आठवले ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों की इच्छा हो सकती है, लेकिन राजनीतिक हित सामान्य संबंधों की बहाली में बाधा बन रहे हैं।
जमीनी स्तर पर विकास पहुंचाने की अपील
रामदास आठवले ने बताया कि अपनी पिछली यात्राओं के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कई जिलों का दौरा किया था और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि लोगों की जरूरतों को जानना और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर की प्रगति के लिए सहायता देने को तैयार है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से विकास संबंधी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच सके।
यह भी पढ़ेंः-पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को आया गुस्सा, कहा-चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिशें बंद हों
अन्य प्रमुख खबरें
-
पीड़ितों की गवाही के आधार पर मामले की जांच होगी, रविवार को दो दलों के बीच हुआ टकराव
2026-10-11
-
जनसभाओं के जरिए CEC के इस्तीफे की मांग करना सही नहीं: वेंकैया नायडू
2026-10-10
-
LUCKNOW में राहुल गांधी के खिलाफ भड़का महिलाओं का आक्रोश, पोस्टर पर चप्पल मारी-कालिख लगाई
2026-10-10
-
कृष्णा नदी के पानी को लेकर विजय-चंद्रबाबू नायडू की होगी मुलाकात
2026-10-10
-
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 152 प्रत्याशी, कांग्रेस के मदन मोहन झा पर 13 मामले
2026-10-10
-
भाजपा अध्यक्ष के दो टूक: देश की जनता देगी विपक्ष को जवाब, सख्ती से निपटेगी सरकार
2026-10-10
-
राजधानी में Gyanesh kumars के इस्तीफे की मांग, आंदोलनों के चलते थकने लगे हैं delhiites
2026-10-10
-
अमित शाह का राहुल गांधी और इंडी अलायंस पर निशाना
2026-10-09
-
UP Rajya Sabha Election: यूपी में भाजपा के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
2026-10-09
-
नंदीग्राम में भाजपा की रिकॉर्ड तोड़ जीत, रेजीनगर में भी फहराया भगवा
2026-10-09
-
महापरिनिर्वाण दिवस पर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग दोहरायी
2026-10-09
-
ओडिशा में 12 घंटे का बंद, ट्रेन और ट्रांसपोर्ट सेवाएं प्रभावित
2026-10-08
-
नितिन नवीन की कांग्रेस पर टिप्पणी, ये लोग अराजकतावादी सोच वाले हैं, सिर्फ जहर घोलना जानते हैं
2026-10-08
-
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन
2026-10-08
-
नियमों के तहत कराए जा रहे चुनाव कार्य, CEO कार्यालय बंगाल ने तोड़ी चुप्पी
2026-10-07