पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को आया गुस्सा, कहा-चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिशें बंद हों
खबर सार :-
नई दिल्ली, कुछ राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिशों पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें न तो देश के हित में हैं और न ही लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छी हैं।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, दिल्ली में आज प्रदर्शनों का दौर चला। इसी बीच पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इसे बेहद आपत्तिजनक माना है। उन्होंने कहा है कि यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। इसे रोकना होगा। सीजेपी की ओर से शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का दौर चला।
कभी वोट चोरी तो कभी ईवीएम खराब
प्रशासन की ओर से इस पर सख्ती रही। इस विरोध प्रदर्शन का मकसद वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के दौरान वोटरों के नाम हटाने और कथित “वोट चोरी” के आरोपों को उठाना भी है। बता दें कि राजनीतिक दलों ने एसआईआर के विरोध में आवाज नहीं उठाया, यदि ऐसा होता तो चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आने के बाद शांत हो जाते। यह लोग अलग अलग तरीके की बात कर रहे हैं। कभी वोट चोरी तो कभी ईवीएम खराब कह देते हैं।
इसीलिए कुछ राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिशों पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें न तो देश के हित में हैं और न ही लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छी हैं। वैंकैया नायडू ने कहा कि यह देश या लोकतंत्र के हित में नहीं है। यह बात कांग्रेस की समझ में आ ही नहीे रही है। उनको बस सत्ता चाहिए। भले ही चुनाव में खुद की वोट न डालें। चुनाव हार गए तो गड़बड़ी करा दी गई।
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निर्वाचन आोग को देश का समर्थन मिला
निर्वाचन आोग को देश का समर्थन मिल रहा है। कहा जा रहा है कि वह अपने अधिकारों के लिए कोर्ट जाएं। एक दिन में सब बिखर जाएंग। बिना सबूत आपत्तिजनक बात करना संवैधानिक व्यवस्था को धराशायी कर देगा। विरोध प्रदर्शन कर सड़क पर संवैधानिक व्यवस्था लाना उचित नहीे है। यदि कुछ कर सकते हैं तो महाभियोग लाओ। उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव आयोग एक वैधानिक संस्था है।
चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के जो भी तरीके और साधन हैं, लेकिन उन पर आरोप लगाना, उन्हें बुरा-भला कहना, उनके नाम को विवादों में घसीटना और फिर सार्वजनिक रैलियों के जरिए उनके इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी संस्था यानी संवैधानिक निकाय की इस तरह से छवि खराब हो रही है। अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो चुनाव आयोग अच्छा है। अगर वे चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम खराब, दोषपूर्ण और सरकार के पक्ष में होती हैं। इस तरह के आरोप सही नहीं हैं।
अलग-अलग समय पर ऐसे ही आरोप लगाए
कभी तो लगता है कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहा है। भारतीय चुनाव दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया है। यहां की लाकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी दुनिया में महत्व दिया जाता है। हमारे देश के सेविधान को भी लोगों ने मानौ उन्होंने कहा कि हमारे चुनाव आयोग ने भी बहुत अच्छा नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग वह कर सकते हैं, लेकिन सही तरीका नहीं है। सड़क पर लाने जैसा विषय है ही नहीं।
नायडू ने आगे कहा कि राजनीतिक दलों ने चुनावी नतीजों के आधार पर अलग-अलग समय पर ऐसे ही आरोप लगाए हैं। अलग-अलग पार्टियों ने अलग-अलग समय पर कई आरोप लगाए हैं। बिहार में चुनाव हुए थे। एक भी वोटर ने यह शिकायत नहीं की कि उसका नाम हटा दिया गया है। अब बंगाल की सीएम कह रही हैं के लाखों मतदाताओं के वोट काट दिए गए। यह तो जबरन कही गई बात है।
चुनाव आयोग हर बात का जिम्मेदार नहीं
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रदर्शन सबका अधिकार होता है, लेकिन संवैधानिक दायरे में। अगर सड़क पर आ गए तो सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त नहीं करना चाहिए। सरकार की संपत्ति हो या किसी व्यक्ति की। जिस तरह से दुनिया के लोग भारत के निर्वाचन प्रक्रिया की प्रशंसा कर रहे हैं, उसपर हम सवाल करके अच्छा नहीं कर रहे हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है की वोटर लिस्ट की जांच की बात अपने तरीके से कहना चाहिए।
कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वह घर-घर जाएं वोटर लिस्ट की जांच करें। अगर कोई गड़बड़ी याचूक है तो शिकायत करें। इसे करवाना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है। भारतीय चुनावी व्यवस्था सबसे अच्छी व्यवस्था है। हर चीज के लिए चुनाव आयोग को निशाना बनाना ठीक नहीं है।
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