E2O Petrol: लोगों की जेब पर सीधे डाका डाल रही सरकार, E20 पॉलिसी पर राहुल गांधी का तंज
खबर सार :-
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार की E20 पेट्रोल पॉलिसी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा ...
खबर विस्तार : -
Rahul Gandhi E2O Petrol: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को E20 ईंधन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना लोगों की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा रही है और सीधे उनकी जेब से पैसे निकाल रही है।
राहुल गांधी ने उठाया E20 पेट्रोल का मुद्दा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो शेयर करते हुए Rahul Gandhi ने कहा, "E20 पेट्रेल का मुद्दा बेहद गंभीर है। आमतौर पर कहावत है कि 'दाल में कुछ काला है', लेकिन यहां तो पूरी दाल ही काली है।" उन्होंने कहा कि किसी भी जन-अभियान में यह तय करना होता है कि किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए; अभी भ्रष्टाचार से जुड़े इतने मामले हैं कि प्राथमिकताओं की एक लंबी सूची बन गई है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस E20 के मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाएगी।
कारों और स्कूटरों को नुकसान पहुंचा रहा E20 ईंधन
राहुल गांधी ने कहा, "E20 लोगों की कारों और स्कूटरों को नुकसान पहुंचा रहा है, उनके जीवन पर असर डाल रहा है और सचमुच उनकी जेब से सीधे पैसे निकाल रहा है।" ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब कांग्रेस ने हाल ही में आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल को बढ़ावा देने की नीति ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला है, जबकि इथेनॉल उत्पादक सबसे ज़्यादा फायदा उठा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि सरकार के सस्ते ईंधन देने के दावों के बावजूद, आम उपभोक्ताओं को ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 से देश भर के ज़्यादातर पेट्रोल पंपों पर लगभग सिर्फ E20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
आम जनता को भुगतना पड़ रहा सरकार की नीति का खामियाजा
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि इथेनॉल मिलाने से ईंधन 50 रुपये प्रति लीटर (डीजल के लिए) और 55 रुपये प्रति लीटर (पेट्रोल के विकल्प के तौर पर) मिलेगा, लेकिन उपभोक्ताओं को ऐसा कोई फायदा नहीं मिला। एक स्वतंत्र विश्लेषण का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने दावा किया कि इथेनॉल-मिश्रित ईंधन से कम माइलेज मिलने के कारण अप्रैल 2023 और मार्च 2026 के बीच देश भर के उपभोक्ताओं पर लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम वाहन चालक सीधे तौर पर सरकार की इस नीति का खामियाजा भुगत रहे हैं।
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