जम्मू-कश्मीर में आरक्षण पर सियासी घमासान, PDP ने उठाया ओपन मेरिट का मुद्दा

खबर सार :-

जम्मू-कश्मीर में आरक्षण और ओपन मेरिट को लेकर सियासी घमासान तेज। PDP विधायक वहीद पारा ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए आरक्षण ढांचे, EWS और अनारक्षित युवाओं के मुद्दे पर चर्चा की मांग की।
Jammu & Kashmir: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने उठाया ओपन मेरिट का मुद्दा

खबर विस्तार : -

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने विधानसभा में ओपन मेरिट और आरक्षण के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की है। पार्टी विधायक वहीद उर रहमान पारा ने विधानसभा अध्यक्ष को नियम 56 के तहत स्थगन प्रस्ताव की सूचना दी है। वहीं, PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर निशाना साधा है।

इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि PDP ने ओपन मेरिट और जम्मू-कश्मीर के युवाओं पर आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव को लेकर तत्काल बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया था। उनका आरोप है कि सरकार ने इस विषय को विस्तृत चर्चा के योग्य नहीं माना। उन्होंने मेरिट के साथ कथित संस्थागत भेदभाव को खत्म करने की मांग की।

ओपन मेरिट को लेकर MLA पारा की चिंता

PDP विधायक वहीद उर रहमान पारा ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजे अपने प्रस्ताव में मौजूदा आरक्षण ढांचे पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ओपन मेरिट का हिस्सा 40 प्रतिशत से नीचे चला गया है। उनके मुताबिक, इससे आरक्षित श्रेणियों से बाहर आने वाले उम्मीदवारों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक समान पहुंच को लेकर चिंता पैदा होती है। पारा ने स्पष्ट किया कि उनका प्रस्ताव आरक्षण और योग्यता को आमने-सामने खड़ा करने के उद्देश्य से नहीं है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और समान अवसर के बीच संतुलन से जुड़ा विषय बताया है।

EWS प्रमाणपत्रों के आंकड़ों पर सवाल

स्थगन प्रस्ताव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाणपत्रों के वितरण में जम्मू और कश्मीर संभाग के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया गया है। प्रस्ताव में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में कुल 26,558 EWS प्रमाणपत्र जारी किए गए। इनमें 24,545 प्रमाणपत्र जम्मू डिवीजन में, जबकि 2,013 प्रमाणपत्र कश्मीर डिवीजन में जारी किए गए। वहीद पारा ने इन आंकड़ों की तुलना मुफ्त राशन योजना के लाभार्थियों से भी की है। उनके अनुसार, कश्मीर डिवीजन में मुफ्त राशन योजना के 37,64,605 लाभार्थी, जबकि जम्मू डिवीजन में 29,76,027 लाभार्थी हैं। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या मौजूदा EWS व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की वास्तविक स्थिति को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित कर रही है।

EWS नियमों की समीक्षा की मांग

पारा ने EWS के लिए निर्धारित आय, संपत्ति और परिसंपत्ति आधारित पात्रता शर्तों की भी समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह जांच जरूरी है कि मौजूदा मानदंड वास्तव में जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर पा रहे हैं या नहीं। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसके तहत समय-समय पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा सके।

पांच मुद्दों पर तत्काल विचार की मांग

PDP विधायक ने विधानसभा के सामने पांच प्रमुख बिंदु रखे हैं। इनमें मौजूदा आरक्षण ढांचे का युक्तिकरण, अनारक्षित युवाओं पर इसके प्रभाव का आकलन, EWS व्यवस्था के क्रियान्वयन की समीक्षा, EWS पात्रता मानदंडों की समीक्षा और आरक्षण व्यवस्था की आवधिक समीक्षा के लिए तंत्र स्थापित करना शामिल है। पारा का कहना है कि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के जरिए विभिन्न वर्गों की चिंताओं को सामने लाया जाना चाहिए।

सरकार के रुख पर उठे सवाल

स्थगन प्रस्ताव को लेकर PDP ने सरकार के रुख पर सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण और ओपन मेरिट से जुड़ा मुद्दा बड़ी संख्या में युवाओं के शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। वहीं, पूरे विवाद का केंद्र यह सवाल बन गया है कि सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाली आरक्षण व्यवस्था और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाए। अब निगाहें विधानसभा में इस मुद्दे पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर हैं। यदि इस विषय पर विस्तृत चर्चा होती है, तो आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था, EWS मानदंड और ओपन मेरिट के अवसरों से जुड़े कई पहलुओं पर सदन में बहस हो सकती है।

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