संसद में खड़गे-रिजिजू के बीच तीखी बहस, जमकर हुआ वार पलटवार

खबर सार :-

संसद में शुक्रवार को हुए जबरदस्त हंगामें के बाद राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार, 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन में रिजिजू और खड़गे के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
संसद में खड़गे-रिजिजू के बीच तीखी बहस, जानें किसने क्या कहा

खबर विस्तार : -

Kiren Rijiju Vs Mallikarjun Kharge: संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव कम होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और उनके बयान को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि गृह मंत्री सदन में आएं और बयान दें। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू  ने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि सदन में किसी खास विषय पर कौन सा मंत्री जवाब देगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस तीखी बहस के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के इस्तेमाल का विरोध कर रहा है। उनका आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पुलिस ने छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया और वे इस मामले पर गृह मंत्री से जवाब की मांग कर रहे हैं। सभापति को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "गृह मंत्री को सदन में आना चाहिए। मुझे और कुछ नहीं कहना है। हमने पहले भी कहा था कि गृह मंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए।"

खड़गे (mallikarjun kharge) ने कहा कि सभापति ने विपक्ष की बात संसदीय कार्य मंत्री तक पहुंचाई थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से कहा, "आपने विपक्ष की बात संसदीय कार्य मंत्री तक पहुंचाई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आपकी बात का भी सम्मान नहीं किया जा रहा है। यह सदन का अपमान है।"

किरेन रिजिजू ने किया पलटवार 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने सरकार का पक्ष रखा और कहा कि संसदीय प्रणाली के तहत स्पष्ट नियम है कि किसी खास विषय से संबंधित मंत्रालय का मंत्री ही सदन में जवाब देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किसी खास मुद्दे पर सदन में कौन सा मंत्री जवाब देगा। 

रिजिजू ने कहा, "गृह मंत्री सुबह से देर रात तक संसद परिसर में मौजूद रहते हैं; लेकिन सदन में जवाब देने की जिम्मेदारी उस मंत्री की होती है जिसके मंत्रालय का संबंध उस खास विषय से हो। विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किसी खास मुद्दे पर सदन में कौन सा मंत्री आए; यह विपक्ष का अधिकार नहीं है और न ही यह कोई स्थापित परंपरा है।" उन्होंने यह भी कहा कि चेयरमैन ने सिर्फ़ विपक्ष की मांग सरकार तक पहुंचाई थी, कोई आदेश नहीं दिया था।

संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद हंगामा करके सदन से चले जाते हैं, जबकि गृह मंत्री सुबह से देर रात तक संसद में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ विपक्ष की मांग के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि सदन में हर मुद्दे का जवाब गृह मंत्री ही दें।

सरकार जवाब देने से बच रही: खड़गे

खड़गे ने कहा कि सदन की कार्यवाही से जुड़े अहम और जरूरी मुद्दों को उठाना विपक्ष का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष जनता और देश से जुड़े सवाल उठाता है, तो सरकार उनका जवाब देने से बचती है। खड़गे ने कहा कि विपक्ष जब जरूरी मुद्दे उठाता है, तो सरकार उनसे किनारा कर लेती है, जो सही नहीं है। खरगे के इस बयान के दौरान भी सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा जारी रहा।

सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

रिजिजू के जवाब के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया, जिससे कुछ समय के लिए सदन में हंगामा हुआ। गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिससे सदन में तनाव बढ़ गया। इसे देखते हुए चेयरमैन ने कार्यवाही दोपहर 12:00 बजे तक स्थगित कर दी। जब दोपहर में कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो हंगामा जारी रहा, जिसके कारण राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार, 10 अगस्त को सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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