दुनिया की पहचान बनेगा Delhi का Chandnichowk टाउन हॉल, पर्यटन विभाग और नगर निगम के बीच समझौता
खबर सार :-
दिल्ली सरकार चांदनी चौक स्थित दिल्ली के ऐतिहासिक टाउन हॉल को नया रूप देने जा रही है। इसके लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री खुद चाहती हैं कि यह स्थान विश्व पटल पर पहचान बनाए।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, दिल्ली सरकार चांदनी चौक स्थित दिल्ली के ऐतिहासिक टाउन हॉल को लेकर एक समझौता कर रही है। इसे विश्व में विख्यात करने के लिए 30 साल के लिए नया लुक तैयार किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग की नोडल एजेंसी दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) की ओर से एक नई पहल की गई है।
उसके बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने भी समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस हस्ताक्षर प्रक्रिया के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जाहिर की है। वह हस्ताक्षर के दौरान मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि एमओयू के बाद निर्धारित स्थान को ग्लोबल हेरीटेज सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास बहुत तेज होंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल है।
मुख्मंत्री की मौजूदगी में किए गए हस्ताक्षर
इस योजना के तहत टाउन हॉल, प्रेस बिल्डिंग और पार्क का संरक्षण किया जाएगा। इन्हें एक ‘ग्लोबल हेरिटेज सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। हस्ताक्षर प्रक्रिया को दिल्ली सचिवालय में पूरा किया गया। दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही की मौजूदगी रही। इस दौरान कई और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रेस विज्ञप्ति के जरिए मीडिया को दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस परियोजना का विशेष महत्व है। सरकार की ओर से कहा गया है कि टाउन हॉल और इससे संबंधित परिसर चांदनी चौक इस क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल हैं। यह शाहजहानाबाद के ऐतिहासिक क्षेत्र का हिस्सा है।
ग्रेड-वन विरासत में की जाती है इसकी गिनती
वर्ष 1860 से 1866 के बीच इसे बनाया गया था। इसकी गिनती ग्रेड-वन विरासत परिसर में की जाती है। नगर निगम का मुख्यालय लंबे समय तक इसी परिसर में रहा। वर्ष 2010 में यह मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया गया। उसके बाद यह मिंटो रोड स्थित नए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में स्थापित किया गया। तब से इसका बड़ा हिस्सा काफी हद तक खाली रहा है। एमओयू के अनुसार, इस ऐतिहासिक परिसर का स्वामित्व दिल्ली नगर निगम के पास ही रहेगा। इसका क्षेत्रफल लगभग 12180 वर्ग मीटर के करीब है।
परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक भवन की मूल विरासत पहचान को सुरक्षित रखना है। यानी भवन को उसकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप संरक्षित किया जाएगा। इसको तैयार करने में वर्तमान दौर का बराबर ध्यान रखा जाएगा। जहां पर जरूरत होगी संस्कृतिक ज़रूरतें पूरी की जाएंगी। साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी इसका बराबर ध्यान रखा जाएगा। समझौते के अनुसार यह बहुपयोगी बनाया जाएगा।
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विरासत और संस्कृति एक ही जगह दिखेगी
प्रस्तावित ग्लोबल हेरिटेज सेंटर में संग्रहालय, सांस्कृतिक गतिविधियों और पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाना योजना का मकसद है। आने वाले समय में पुरानी दिल्ली में देश-विदेश के लोगों के लिए एक नया पर्यटन स्थल बनकर तैयार हो जाएगा। पर्यटकों को ऐसा नया प्रमुख आकर्षण मिल सकेगा, जहां दिल्ली का इतिहास, विरासत और संस्कृति एक ही जगह दिखाई देगी। इसकी झलक पाने के लिए लोग दूर-दूर से आया करेंगे।
पर्यटन के लिहाज से इसका बड़ा उपयोग किया जाएगा। इसके आसपास भी चांदनी चौक पुरानी दिल्ली जैसे स्थान बहुत ही महत्व रखने वाले हैं। पर्यटकों की बड़ी आवाजाही वाले क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस परिसर का बेहतर उपयोग किया जाएगा। एमओयू के अंतर्गत डीटीटीडीसी इस परियोजना के लिए सर्वे, भवन का स्ट्रक्चरल असेसमेंट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। बाद मैं परियोजना को सार्वजनिक निवेश या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से विकसित करने का विकल्प तय किया जाएगा।
30 साल के लिए किए गए हस्ताक्षर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने का प्रयास सरकार करेगी। साथ ही कोशिश है कि इसे आधुनिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा जाए। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि हमारा प्रयास है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए उन्हें देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए उपयोगी बनाया जाए। नगर निगम के पास रखी जाने वाली समग्री में टाउन हॉल से जुड़ी विरासत, अभिलेखीय, कलाकृतियां और ऐतिहासिक सामग्री हैं। परियोजना में भवन के संरक्षण के साथ-साथ उससे जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को भी सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके लिए डीटीटीडीसी और नगर निगम के प्रतिनिधियों वाला संयुक्त कार्य समूह भी बनाया जाएगा। एमओयू की प्रारंभिक अवधि 30 वर्ष रखी गई है। इसे आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहमति जरूरी है। इसे 30 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित होने के बाद यह परिसर देश-दुनिया का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। चांदनी चौक की ऐतिहासिक विरासत दिल्ली की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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