झारखंडः धनबाद में तेज धमाके के साथ फिर धंसी जमीन, चार मकान प्रभावित, दो जमींदोज

खबर सार :-

झारखंड के धनबाद में जमीन फटने और धंसने की घटना को लेकर अब प्रशासन परेशान है। रविवार को दो घर जमीन में समा गए। इसमें कई घर क्षतिग्रस्त भी हुए हैं।
झारखंड के धनबाद में फटी जमीन, दो घर समाए, एक महीने में तीसरी बड़ी घटना

खबर विस्तार : -

धनबाद, झारखंड के धनबाद में जमीन धंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब तो यह घटनाएं जानलेवा भी बन रही हैं। रविवार को धनबाद जिले के कोयलांचल में फिर जमीन फटी और इसमें दो घर समा गए। मेहनत करके कमाई गई जिंदगी भर की पूंजी मिट्टी में दफन हो गई। इससे पहले ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें लोगों की जान भी जा चुकी है।

क्षतिग्रस्त मकान अब रहने के लायक नहीं

जानकारी के अनुसार, रविवार को लोयाबाद थाना क्षेत्र के सात नंबर मुस्लिम मोहल्ले में ऐसी घटना हुई है। यहां तेज आवाज जैसी धमाके की सुनाई पड़ी और फिर अचानक जमीन फट गई। इसमें चार मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। दो मकान तो जमींदोज हो गए। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी के अनुसार, जमीन धसने से पहले एक बारूद फटने जैसा धमाका हुआ। इसे सुनते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

आसपास में अफरातफरी का माहौल बन गया था। धमाके की आवाज को लोग इधर-उधर पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान जानकारी मिली की कई घर पास के मोहल्ले में गिरे हैं। घर से बाहर निकले हुए लोगों ने बताया की जैसे ही आवाज हुई, वह एकदम से बाहर भगे। मकान गिरने और जमीन फटने के दौरान वह दूर भगाने की कोशिश करते रहे। दो मकान जमींदोज हुए हैं। इनमें रहने वाले पहले ही घर से बाहर थे। घटना की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। 

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तमाशा बन रही भीड़ को पुलिस ने रोका

ज्यादा भीड़भाड़ के कारण घर के आसपास घेराबंदी कर दी गई। कई जगह पर बड़े गड्ढे और दरारे बन गई हैं। इनके पास न जाने की अपील की जा रही है। बीसीसीएल और स्थानीय प्रशासन भी जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन लोगों ने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार की है।

धनबाद के कोयलांचल में पिछले करीब डेढ़ महीने से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। अगस्त माह में कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में कई ऐसी घटनाएं हुई, इन घटनाओं में यही बताया गया है कि पहले जमीन फटी और मकान घंसते चले गए। कतरास में करीब 12 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सबसे बड़ी मुसीबत उन लोगों के लिए है, जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए या जमींदोज हुए हैं। प्रशासन की मदद से इन लोगों को उचित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। सितंबर में भी छाताबाद में ऐसी घटना हुई थी। 

इससे पहले की घटना में 12 मकान टूटे थे

घटना में करीब एक दर्जन मकान में दरारें पड़ी थी। उनके कुछ हिस्से गिरे भी थे। सितंबर में छाताबाद की घटना बड़ी घटना थी। खुशबू मोहल्ले से मस्जिद रोड तक करीब 12 मकान प्रभावित हुए थे। जमीन और सड़कों में दरारें आज भी बनी हुई हैं। दिक्कत अब इस बात की बढ़ गई है कि जिस स्थान पर मकान बने हुए हैं, वहां रहना मुश्किल हो रहा है। यह बेहद संवेदनशील भूमि बन गई है। बीसीसीएल ने प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही रोकने के लिए कहा है।

इनके पुनर्वास और राहत के इंतजाम प्रशासन की ओर से भी किये जा रहे हैं। 8 सितंबर को भी शिजुका के तीन पत्तियां थोड़ा इलाके में ऐसी घटना हुई थी। इस घटना में पांच लोग मलबे में दबे हुए थे। इनको बड़ी मुश्किल से बाहर निकल गया। बाद में एक बच्चे की मौत हो गई थी।

प्रशासन की ओर से नुकसान हुए मकान की भरपाई के लिए सर्वे किया जा रहा है। इनके पुनर्वास के लिए प्रयास किया जा रहे हैं। अभी सितंबर में ही महेशपुर कोलियरी के ओबीडंपिंग क्षेत्र में भी भूमि हटाने धसने की घटना सामने आई थी। यहां पर जमीन धसने से बीसीसीएल की टीम मौके पर पहुंची और स्थल निरीक्षण किया था। 

प्रशासन कर रहा है पुनर्वास का इंतजाम

अधिकारियों ने बताया कि सितंबर में बरारी 6 नंबर बस्ती लोदना और केशवपुर कुमार पट्टी क्षेत्र में जमींन धंसने तथा खदान धंसने की घटनाएं सामने आईं। इस क्षेत्र में केसवपुरा कुमार पट्टी में तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसे पता चलता है कि इलाके में जमीन धंसने की घटनाएं बड़े पैमाने पर हो रही हैं। बड़ी मुश्किल की बात यह है कि लोग अपने घरों को छोड़कर कहां जाएं? साथ ही किसी और या अन्य स्थान पर जमीन पाने या घर बनवाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है।

ऐसे लोग अपने घरों का निर्माण कैसे कर पाएंगे? प्रशासन से मांग की जा रही कि लोगों को रहने की व्यवस्था दे। बरारी में जमीन में दरारों के साथ गैस और आग निकालने की घटना भी लोगों के सामने हुई है। इससे लोग बेहद डरे हुए हैं। लोग पहले से ही इस बात की चिंता जताते रहे हैं कि भूमिगत खदानों और खाली हुए हिस्से तथा जारी गतिविधियों के कारण अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। ऐसे में खतरनाक स्थान को घेराबंदी की जाए।

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