संसद मानसून सत्र: FCRA, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर गतिरोध बरकरार,सरकार से नहीं बनी सहमति

खबर सार :-

संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में एफसीआरए, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच दो दौर की वार्ता के बावजूद सर्वदलीय बैठक बुलाने और अन्य मुद्दों पर गतिरोध कायम है।
संसद मानसून सत्र: FCRA और परिसीमन बिल पर सरकार-विपक्ष में गतिरोध जारी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: नई दिल्ली में संसद के जारी मानसून सत्र का समापन 13 अगस्त को होना तय है, लेकिन सदन के भीतर विधायी कामकाज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सरकार और विपक्षी दलों के बीच फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने की प्राथमिकताओं पर सहमति नहीं बन सकी है। आगामी पांच कार्य दिवसों को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच संवाद के रास्ते खुले हैं, हालांकि औपचारिक गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विषय पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से लगभग 50 मिनट तक सीधी बातचीत की और बाद में दूरभाष पर भी संपर्क साधा। सरकार का रुख है कि इन संवेदनशीलता वाले कानूनों को बिना चर्चा पारित कराना उचित नहीं होगा। वहीं, राहुल गांधी ने 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों से परामर्श के बाद स्पष्ट किया कि इन विधेयकों पर आगे बढ़ने से पहले सरकार को एक औपचारिक सर्वदलीय बैठक आयोजित करनी चाहिए।

संसदीय गतिरोध और प्रमुख विधेयकों पर पेंच

सरकार का तर्क है कि विधेयकों से जुड़े विभिन्न हितधारकों और राजनीतिक दलों से आवश्यक चर्चा पहले ही की जा चुकी है, इसलिए पृथक सर्वदलीय बैठक की आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन ने तीन प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं। इसमें दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री का वक्तव्य, अयोध्या राम मंदिर निर्माण न्यास से जुड़े वित्तीय आरोपों पर सदन में चर्चा और परिसीमन के वर्तमान प्रारूप की समीक्षा शामिल है। संविधान संशोधन से संबंधित विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की संवैधानिक अनिवार्यता होती है। यद्यपि सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के पास कुछ अन्य दलों के समर्थन के बाद आंकड़े सुधरे हैं, परंतु इस विशेष बहुमत को सुचारू रूप से प्राप्त करने के लिए विपक्ष का सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संवाद की पहल और रणनीतिक विकल्प

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राजनीतिक मतभेदों के बीच संवाद जारी रखने पर जोर देते हुए कहा कि विचार भिन्न हो सकते हैं, किंतु लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बातचीत अनिवार्य है। दूसरी ओर, सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट की है कि विधायी प्रक्रियाओं को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एफसीआरए संशोधन के संदर्भ में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक कर उनकी आशंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया है।

यदि निचले सदन में सहमति बनाने में विलंब होता है, तो सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयक को पहले राज्यसभा में प्रस्तुत करने के विकल्प पर विचार कर रही है। ऊपरी सदन में संख्या बल का समीकरण अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल होने के कारण इस रणनीतिक कदम पर अंतिम निर्णय सत्र के अंतिम दिनों में लिया जा सकता है। संसद का वर्तमान मानसून सत्र पिछले तीन सप्ताह से विभिन्न प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर हंगामे की भेंट चढ़ता रहा है। नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं, छात्र आंदोलनों और स्थानीय विवादों के कारण प्रश्नकाल तथा विधायी कार्य लगातार बाधित हुए हैं। सत्र के अंतिम सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे आगामी दिनों में विधायी प्राथमिकताओं के भविष्य पर निर्णय होना बाकी है।

FAQ...

1: संसद का मानसून सत्र कब समाप्त हो रहा है?

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है।

2: किन मुख्य विधेयकों पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध है?

एफसीआरए (FCRA) संशोधन, परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर पेंच फंसा है।

3: विपक्ष की प्रमुख मांगें क्या हैं?

विपक्ष विधेयकों पर सर्वदलीय बैठक, दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर गृह मंत्री के बयान और राम मंदिर न्यास से जुड़े आरोपों पर चर्चा की मांग कर रहा है।

4: इन विधेयकों को पास कराने के लिए कितने बहुमत की जरूरत है?

संविधान संशोधन विधेयकों को संसद के सदनों में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

5: गतिरोध दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

सरकार विपक्ष के साथ बातचीत जारी रखने के साथ ही परिसीमन विधेयक को पहले राज्यसभा में लाने के विकल्प पर विचार कर रही है।

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