कोलकाता: सीपीआईएम के दफ्तरों में तोड़फोड़, टीएमसी के पूर्व विधायक के परिवार पर हमला

खबर सार :-

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद पिछले डेढ़ महीने में कई ऐसी वारदातें हो चुकी हैं। इनमें विपक्षी नेताओं के घरों और उनके कार्यालयों को निशाना बनाकर हमले किए जा रहे हैं। पुलिस भी ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं करती है।
कोलकाता में राजनीतिक रंजिश के चलते तोड़फोड़, टीएमसी के पूर्व विधायक से अभद्रता

खबर विस्तार : -

 

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भी राजनीतिक रंजिश बंद नहीं हो पा रही है। पिछले डेढ़ महीने में यहां कई ऐसी वारदातें हो चुकी हैं जो राजनीतिक हल्के में तूफान बन रही हैं। नई ताजी घटना दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके की है। यहां पर मोटरसाइकिल सवार अज्ञात लोगों ने सीपीआईएम के कई पार्टी दफ्तरों और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक देवराब्रता मजूमदार के घर और दफ्तर पर तोड़फोड़ कर दी। 

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तोड़फोड़ करने वालोें ने मारपीट भी की

उनके घर पर हमला करके नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। यह इलाका कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के करीब का है। हमलावरों के प्रयास और उनके कृत्य से राजनीति के रंजिश की बू आ रही है। पार्टी की ओर से बताया गया है कि हमलावरों ने पार्टी में तोड़फोड़ कर झंडा जमीन पर फेंक दिया है। दूसरी ओर पूर्व विधायक वार्ड नंबर 96 में लंबे समय से केएमसी पार्षद रहे मजूमदार के घर और दफ्तर में भी तोड़फोड़ की गई है।

इस दौरान घर से निकले लोगों के विरोध करने पर उनसे मारपीट की गई है। सीपीआईएम नेता ने बताया है कि हमलावरों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। वार्ड संख्या 96, 99, 101, 102, 105, 106, स्थित पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई है। हमलावरों ने एक नहीं, 6 कार्यालयों में तोड़फोड़ कर अपनी मंसा स्पष्ट की है। यद्यपि नेता की ओर से यह जानकारी दी गई है कि वार्ड संख्या 96 में तनावपूर्ण माहौल था। यहां पूर्वोत्तर तृणमूल कांग्रेस विधायक के आवास और पार्टी कार्यालय के सामने अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इन कार्यालयों में तोड़फोड़ के अलावा भी और वारदात की गई हैं। इसी वार्ड में सीपीआईएम नेता के शहीद स्मारक पर भी नुकसान पहुंचाया गया है। 

पूर्व विधायक के बड़े भाई को जमीन पर गिरा दिया

जानकारी के अनुसार, तृणमूल के पूर्व विधायक के बड़े भाई को हमलावरों ने धमकाया और उनके साथ धक्का मुक्की कर जमीन पर गिरा दिया। पारिवारिकजनों ने बताया कि घटना के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई, लेकिन पुलिस को बुलाने के बाद भी वह 1 घंटे बाद आई। इस घटना के बाद से वार्ड नंबर 101 और 105 में तनावपूर्ण माहौल है। इसका कारण भी कार्यालयों में तोड़फोड़ ही है। जिन कार्यकर्ताओं ने हमलावरों को रोकने की कोशिश की, उनके साथ मारपीट हुई है। पूर्व पार्षद एवं तृणमूल कांग्रेस के नेता तरुण मंडल के दफ्तर के पास भी माहौल अशांति पूर्ण है। यहां पर बाइक गैंग का उत्पात बना रहा। 

हमलावरों को भाजपा के समर्थन का आरोप

उधर दक्षिण 24 परगना जिले के नरेंद्र पुरी में भी यही माहौल बना हुआ है। आरोप है कि पुलिस ही घटना की मुख्य जिम्मेदार है। सीपीआईएम और कांग्रेस दोनों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इस समय भारतीय जनता पार्टी की राज्य में सरकार है और दोनों विपक्षी पार्टियां भाजपा पर आरोप लगा रही हैं। इनका कहना है कि पार्टी में अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही पुलिस पर आरोप लगाया कि वह भी पुलिस के दबाव में काम कर रही है। मजूमदार ने कहा कि 100 लोग आए और घर में तोड़फोड़ करके चले गए। उन हमलावरों ने धक्का मुक्की की, गालियां दीं। मजूमदार ने कहा ऐसा कभी नहीं हुआ है। हमलावरों के बारे में बताया कि वह सब भाजपा समर्थित हैं।

इससे पहले भी हो चुकी है तोड़फोड़ 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे के बाद से राजनीतिक रंजिश को लेकर कई तोड़फोड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। चुनाव के दौरान भाजपा की जीत और तृणमूल कांग्रेस की हार के साथ ही ममता बनर्जी की सरकार 15 साल के शासन के बाद हटी। उसके बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कई हिंसक झडप भी हुईं।

आसनसोल, कोलकाता, हावड़ा में भी तोड़फोड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। कई जगह में दफ्तरों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने निशाना साधा। कोलकाता के बेलोघटा विजयगढ़ और दक्षिण कोलकाता में भी चुनावी हमले हो चुके हैं। डायमंड हार्बर की घटना के बाद में विपक्षी उम्मीदवार के दफ्तरों को निशाना बनाया जा चुका है।

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