चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रत गुट को नए नाम व चिह्न दिए, उपचुनाव में होंगे इस्तेमाल

खबर सार :-

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया। दोनों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित। 6 अक्टूबर के उपचुनाव में इनका उपयोग होगा।
ममता और ऋतब्रत गुट को मिले नए चुनाव चिन्ह, उपचुनाव में होंगे इस्तेमाल

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः चुनाव आयोग ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के लिए नए पार्टी नाम और चुनाव चिह्नों की औपचारिक घोषणा कर दी। यह फैसला पार्टी में चल रहे आंतरिक विवाद के बीच आया है, जिसमें एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में है और दूसरा गुट निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में। आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

आयोग ने दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों में राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी है। इसका मतलब है कि ये दोनों गुट इन तीनों राज्यों में अपने नए नाम और चिह्न के साथ चुनाव लड़ सकेंगे। सबसे पहले इनका उपयोग 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में होगा। ये दोनों सीटें क्रमशः पूर्वी मेदिनीपुर और मुर्शिदाबाद जिले में स्थित हैं। उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

क्यों हुआ था विवाद

तृणमूल कांग्रेस में यह विवाद कई महीनों से चल रहा था। ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'मूल लेकिन अल्पमत' वाला गुट कहा जा रहा है, क्योंकि पार्टी के अधिकांश विधायक और संगठनात्मक ढांचा उनके साथ नहीं है। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'बागी लेकिन बहुमत' वाला गुट कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें पार्टी से निष्कासित या असंतुष्ट विधायकों की संख्या अधिक है। दोनों गुटों ने मूल पार्टी नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'घास-फूल' चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा किया था।

गुरुवार रात चुनाव आयोग ने मूल नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया और दोनों गुटों को नए विकल्प देने का निर्देश दिया। आयोग ने विकल्प जमा करने की अंतिम समय सीमा शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तय की थी। ममता बनर्जी के गुट ने गुरुवार आधी रात के बाद तीन-तीन विकल्प आयोग को भेजे। ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने शुक्रवार सुबह अपने विकल्प सौंपे। दोनों गुटों के नेताओं ने विकल्प भेजने की पुष्टि तो की, लेकिन चुने गए नामों और चिह्नों के बारे में कुछ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि वे चुनाव आयोग के आधिकारिक ऐलान का इंतजार करेंगे।

चुनाव चिह्नों का महत्व

'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न ममता बनर्जी के गुट के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल में फुटबॉल का गहरा जुड़ाव है, खासकर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में। यह चिह्न युवाओं और खेल प्रेमियों को आकर्षित कर सकता है। वहीं, 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के गुट के लिए संदेश और पारदर्शिता का प्रतीक हो सकता है। दोनों चिह्न स्थानीय स्तर पर आसानी से पहचाने जा सकते हैं।

उपचुनाव पर प्रभाव

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में अब दोनों गुट आमने-सामने होंगे। ममता बनर्जी का गुट 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न के साथ अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा, जबकि ऋतब्रत बनर्जी का गुट 'लिफाफा' चिह्न के साथ बागी विधायकों के समर्थन को भुनाने का प्रयास करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले ने उपचुनाव को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। दोनों गुटों ने अपने प्रचार अभियान तेज कर दिए हैं और मतदाताओं को लुभाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये नए नाम और चिह्न केवल इन दोनों गुटों के लिए हैं और मूल पार्टी का नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' फिलहाल फ्रीज रहेगा। आगे की कार्यवाही विवाद के कानूनी समाधान पर निर्भर करेगी। अब देखना यह है कि 6 अक्टूबर के उपचुनाव में किस गुट को जनता का समर्थन मिलता है और कौन सा गुट अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर पाता है।

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