यूसीसी पर ओवैसी और उदित राज का हमला, बोले- पहले जाति व्यवस्था खत्म हो

खबर सार :-

अमित शाह के 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान पर ओवैसी और उदित राज ने सवाल उठाए। ओवैसी ने UCC को हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया।
UCC पर ओवैसी और उदित राज का हमला,  कहा-हिंदू कानून थोपा जा रहा

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस ऐलान के बाद कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला NDA वर्ष 2029 तक 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का लक्ष्य रखता है, विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया है। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि UCC से पहले देश में जाति व्यवस्था खत्म करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

ओवैसी बोले- UCC का मतलब हिंदू कानून थोपना

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर UCC को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से पहले नियुक्त किए गए विधि आयोग ने भी UCC को जरूरी और वांछित नहीं माना था। ओवैसी ने देश की विविधता को उसकी पहचान बताते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का अर्थ गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में लागू कुछ कानूनों का हवाला देते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा समान कानून की बात करती है, जबकि दूसरी ओर उसके ही शासन वाले राज्य अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे प्रावधान लागू करते हैं, जिनके तहत हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

उन्होंने तथाकथित 'लव जिहाद' कानूनों का भी जिक्र किया। ओवैसी का आरोप है कि ऐसे कानूनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ किया गया है। उन्होंने कहा कि UCC समानता का मुद्दा नहीं है, बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाने की राजनीति का हिस्सा है।

भाजपा सहयोगियों को भी ओवैसी की नसीहत

असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा के सहयोगी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अब भाजपा के सहयोगियों के लिए यह दिखाने का समय है कि उनकी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज है और वे केवल 'छोटी भाजपा' बनकर न रहें। ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के मुद्दे को भी UCC से जोड़ते हुए अमित शाह पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की 'क्रोनोलॉजी' और राजनीतिक रुख के कारण वर्ष 2019 में CAA-NRC विरोधी आंदोलन हुआ था। ओवैसी ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना पड़ा था कि NRC नहीं होने वाला है।

SIR को लेकर भी सरकार पर निशाना

ओवैसी ने SIR का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोगों को दस्तावेजों के साथ सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे खास तौर पर अल्पसंख्यकों, SC-ST और प्रवासी लोगों को परेशानी हो रही है।  उन्होंने NRC को लेकर भी चिंता जताई और असम में हुए NRC अनुभव का हवाला दिया। ओवैसी ने कहा कि NRC लागू होने की स्थिति में हर व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज जुटाने पड़ सकते हैं। 

उदित राज बोले-पहले जाति व्यवस्था खत्म हो

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी अमित शाह के UCC संबंधी ऐलान पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश के सामने जाति व्यवस्था जैसी बड़ी चुनौती मौजूद है और सरकार को सबसे पहले इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उदित राज ने सवाल किया कि UCC लागू करने से देश को क्या फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जब तक जाति व्यवस्था खत्म नहीं होगी, तब तक भारत की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। उनके मुताबिक, देश में जाति के आधार पर विभाजन बना रहने से विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकती।

क्रिकेट पर भी उदित राज की प्रतिक्रिया

UCC के अलावा उदित राज ने भारत-अफगानिस्तान टी-20 इंटरनेशनल मैच से पहले राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम' गाए जाने के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसे बड़ा मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, मुख्य बात यह है कि भारतीय टीम ने अच्छा खेला और जीत हासिल की, जिसके लिए टीम को बधाई दी जानी चाहिए। वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा महिला एशिया कप की ट्रॉफी ACC चेयरमैन मोहसिन नकवी से नहीं लिए जाने पर भी उदित राज ने टिप्पणी की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को 'नाटक' बताते हुए सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान की टीम भारत आ चुकी है और खिलाड़ी यहां रहकर मैच खेल रहे हैं, तो ट्रॉफी लेने के मामले में इस तरह का विवाद खड़ा करने का क्या मतलब है।

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