शिमला में कांग्रेस को झटका, जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा जीती

खबर सार :-

शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के हुए चुनाव में दोनों पदों पर  भाजपा की जीत हुई है। इस चुनाव में कांग्रेस की बड़ी हार हुई है।
कांग्रेस के गढ़ शिमला में बीजेपी की जीत, जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद पर कब्जा

खबर विस्तार : -

शिमला: शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा ने जीत दर्ज कर कांग्रेस को राजनीतिक झटका दिया है। 25 सदस्यीय जिला परिषद में दोनों प्रमुख पद भाजपा के खाते में गए। इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित निर्दलीय सदस्य भरत सिंह कलांटा निर्वाचित हुए हैं। अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13, कांग्रेस को 10 जबकि, दो मत निरस्त हुए हैं। भरत सिंह कलांटा को उपाध्यक्ष पद के लिए 14, कांग्रेस उम्मीदवार को 10 मत मिले। इसमें एक मत निरस्त हुआ। 

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अपने ही गढ़ में पिट गई कांग्रेस  

शिमला को लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। इस समय भी जिले से कांग्रेस के तीन कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह, अनिरुद्ध सिंह और रोहित ठाकुर को मिलाकर सात विधायक हैं। इसके बावजूद जिला परिषद के दोनों शीर्ष पदों पर कांग्रेस मात खा गई।

पिछली बार जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। इस बार भाजपा ने न केवल अध्यक्ष पद हासिल किया, बल्कि उपाध्यक्ष पद भी अपने समर्थन से जितवा दिया है। अब जिला परिषद चुनाव के नतीजे से भाजपा ने आगे की रणनीति साफ कर दी है।

तीन माह बाद हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ चुनाव

जिला परिषद के चुनाव 31 मई और 1 जून को घोषित हुए थे। तब से यह अटके हुए थे। इसमें स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर उठापटक मची रही। अगस्त के पहले सप्ताह में एक बैठक भी बुलाई गई थी। इसमें भाजपा और कांग्रेस के सदस्य शामिल नहीं हुए थे। इसीलिए चुनाव नहीं हो सके थे। यह मामला हाईकोर्ट ले जाया गया। उसके आदेश के बाद गुरुवार को बचत भवन में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई।

विधानसभा चुनाव में बदल सकती है तस्वीर

अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जिला परिषद के दोनों प्रमुख पदों पर भाजपा की जीत पार्टी के लिए यह खुशी के संकेत हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जो राजनीतिक माहौल बन रहा है, वह शिमला जिले में कांग्रेस को पसोपेश में डाल रहा है। तीन मंत्रियों व चार कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी के बावजूद जिला परिषद की कमान भाजपा के हाथ चली जाए, यह कई लोगों की सियासी दौर के लिए खतरे की घंटी है।

अध्यक्ष पद पर 13-10 और उपाध्यक्ष पद पर 14-10 के अंतर से आए नतीजों ने आगामी तस्वीर साफ कर दी है। यह भी स्पष्ट कर दिया कि निर्णायक समर्थन हासिल करने में भाजपा कांग्रेस से आगे रही। अब यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। शिमला में कांग्रेस छायी रही, इसलिए वह अपने जनाधार को खिसकते हुए नहीं देखना पसंद करेगी। बहरहाल, अभी हालात में उसे आत्म मंथन की जरूरत है। 

बीजेपी सांसद ने कहा, कांग्रेस रिजेक्ट हुई

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का गढ़ शिमला को ही माना जाता है। यहां बीजेपी ने करीब 25 साल के बाद जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल किया है। 10 सितंबर को बचत भवन में चुनाव कराए गए। इसमें बीजेपी समर्थित जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष और निर्दलीय भरत सिंह कलान्टा उपाध्यक्ष पद पर चुने गए हैं। इस चुनाव में बीजेपी सांसद सिकंदर कुमार ने अपनी राय दी है।

उनका कहना है कि भाजपा पर जनता ने भरोसा किया है। उधर शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की सीट पर भाजपा के सदस्यों को चुने जाने पर अतिउत्साह का माहौल है। इसमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को रिजेक्ट माना जा रहा है। वक्ताओं ने इस चुनाव को 2027 की शुरुआत बताया है। सिकंदर कहते हैं कि बीजेपी 2027 में सत्ता में काबिज होने वाली है। शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर कई साल बाद जीत को सुक्खू सरकार के खिलाफ जनादेश बताया है। सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की सीट पर बीजेपी कई साल बाद काबिज हुई है। 

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