आधी आबादी की सुरक्षा पर बोले योगी, डबल इंजन की सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी के पिंडरा विधानसभा में कामकाजी महिला सम्मान समारोह में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूर्व की सरकारों के छूटे काम भी गिनाए।
बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम: सीएम योगी

खबर विस्तार : -

वाराणसी:  आधी आबादी के सम्मान और उसकी सामर्थ्य का अहसास कराने वाला यह आयोजन बता रहा है कि महिलाओं की भागीदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है। वह प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह बात आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के पिंडरा विधानसभा में कामकाजी महिला सम्मान समारोह में कही। 

मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सम्मान और उनकी सुरक्षा का भरोसा देते हुए कहा कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा। यूपी में छात्राओं के लिए भी उनके संवेदनशील और आत्मबल के लिए प्रशिक्षण चल रहा है। खासकर बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज सरकार सख्त कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधा

 सीएम ने कहा कि महिला की सुरक्षा प्रदेश के विकास में भी प्रभावी होती है। उन्होंने बताया कि जब महिला बिना डरे घर से निकलेगी, तभी वह स्कूल, कॉलेज, नौकरी, कारोबार और सामाजिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। 

कहा कि वोट बैंक के लिए समाज को जातीय आधार पर बांटने और विभाजन की राजनीति करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई की बात आती है तो इनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। सीएम ने कई ज्वलंत मामलों का जिक्र किया और कहा कि महिला घर से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती थी तो उसके सामने रास्ते, कनेक्टिविटी, अवसर और वहां तक पहुंचने की कीमत का सवाल खड़ा होता था। 

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2017 से पहले चिंताओं से घिरी थी महिलाएं

2017 से पहले का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि बेटी को स्कूल भेजना हो तो परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता होती थी। उन्होंने एक-एक कर विपक्ष की कमियां गिनाई। इनमें शौचालय के बारे में कहा कि घर में शौचालय न हो तो बेटी, बहन और मां के सम्मान की चिंता रहती थी। रसोई में धुआं हो तो स्वास्थ्य की चिंता, इलाज कराना हो तो पैसे की चिंता और घर चलाना हो तो आमदनी की चिंता होती थी। प्रदेश की तरक्की में हर वर्ग का साथ रहा है। हर वर्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी पर सीएम ने कहा कि बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। हमारी सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। 

पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई

महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महिला कर्मी बढ़ा रहे हैं। 2017 में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। वर्तमान में यह संख्या 44 हजार हो गई है। नई भर्ती के बाद यह 50 हजार से अधिक हो जानी है। 1090 और 181 जैसी व्यवस्थाएं भी महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित है। महिलाओं के लिए अवसर हर जगह हैं। स्कूल, अस्पताल, बाजार या कार्यस्थल तक पहुंचने के रास्ते उनके सपनों की मंजिल तक जाने के मार्ग हैं। 

कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार हो रहा

पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में हाईवे से एयरपोर्ट और रेलवे से मेट्रो तक कनेक्टिविटी, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक जैसी एक्सप्रेसवे, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इसी दिशा में प्रयास हैं। सीएम ने कहा कि कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपए का पैकेज दिया जा रहा है।

कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार कर 12वीं तक चलाने की दिशा में काम हो रहा है। अटल आवासीय विद्यालयों में बेटियों के लिए आधी सीटें रखी गई हैं। स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ा जाना है। महिला वर्कफोर्स की भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप हैं।

महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन की मिसाल बनीं

इनमें लगभग आधे स्टार्टअप महिलाएं संचालित कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बीसी सखी को बढ़ाया जा रहा है। बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर, बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर, काशी मिल्क प्रोड्यूसर और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर जैसी पहल से चार लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं। 

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