प्रज्वल रेवन्ना के जेल में जब्त मोबाइल में मिलीं 173 वीडियो फाइलें, कई अश्लील वीडियो की पुष्टि

खबर सार :-

बेंगलुरु सेंट्रल जेल में जब्त प्रज्वल रेवन्ना के मोबाइल की एफएसएल जांच में 173 वीडियो फाइलें मिलीं। पुलिस तीन अश्लील वीडियो और कथित कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
प्रज्वल रेवन्ना केसः मोबाइल में मिलीं अश्लील वीडियो, जांच जारी

खबर विस्तार : -

बेंगलुरु: रेप केस में सजा काट रहे पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बेंगलुरु सेंट्रल जेल में छापेमारी के दौरान जब्त किए गए उनके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में 173 वीडियो फाइलें मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, इनमें तीन अश्लील वीडियो प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े पाए गए हैं। मामले की जांच परप्पना अग्रहारा पुलिस कर रही है।

पुलिस ने बताया कि 11 अगस्त को बेंगलुरु सेंट्रल जेल में तलाशी अभियान के दौरान एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था। आरोप है कि प्रज्वल रेवन्ना और उसी सेल में बंद विचाराधीन कैदी प्रताप राय ने पुलिस के बार-बार पूछने के बावजूद फोन का पासवर्ड साझा नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने डिवाइस को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (एफएसएल) भेज दिया।

मोबाइल में मिलीं 173 वीडियो फाइलें

फॉरेंसिक जांच के दौरान मोबाइल फोन में कुल 173 फाइलें मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें तीन अश्लील वीडियो ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनका संबंध प्रज्वल रेवन्ना से है। पुलिस के अनुसार, फोन में अन्य अश्लील वीडियो के अलावा कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों के क्लिप, वेब सीरीज और दूसरे वीडियो कंटेंट भी मौजूद थे। जांचकर्ताओं ने अब इन डिजिटल फाइलों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फोन में मौजूद सामग्री कब और किस तरीके से सेव की गई तथा जेल में रहते हुए डिवाइस का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

वीडियो कॉल और व्हाट्सऐप कॉल की भी जांच

पुलिस मोबाइल फोन के कम्युनिकेशन रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। शुरुआती जांच में कथित तौर पर पता चला है कि फोन से कई महिलाओं को वीडियो कॉल और व्हाट्सऐप कॉल किए गए थे। जांचकर्ताओं का विशेष ध्यान उन महिलाओं से हुए कथित संपर्क पर है, जिनके बारे में पुलिस का कहना है कि वे गिरफ्तारी से पहले प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो में दिखाई दी थीं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जेल से किए गए कथित संपर्क और बरामद डिजिटल सामग्री के बीच कोई संबंध है या नहीं। सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि पुलिस कुछ महिलाओं को नोटिस जारी कर उनसे पूछताछ करने पर विचार कर रही है। उनसे मोबाइल फोन से किए गए कथित कॉल और वीडियो कॉल के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

पेन ड्राइव में भी 150 से ज्यादा वीडियो

जांच के दौरान एक पेन ड्राइव का भी जिक्र सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर 150 से ज्यादा वीडियो मौजूद हैं। पुलिस इसकी सामग्री की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि मोबाइल फोन और पेन ड्राइव में मौजूद डिजिटल सामग्री के बीच कोई संबंध है या नहीं। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि जेल में रहते हुए प्रज्वल रेवन्ना जिन लोगों के संपर्क में थे, क्या उनका संबंध बरामद सामग्री से है। पुलिस मोबाइल के डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है।

जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, इसकी भी जांच

मामले का एक अहम पहलू यह है कि हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचा कैसे। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में कथित तौर पर एक जेल वार्डर का नाम सामने आया है, जिसने प्रज्वल रेवन्ना को मोबाइल फोन उपलब्ध कराया था। मोबाइल फोन की बरामदगी के संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जेल सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर फोन अंदर कैसे पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

सोशल मीडिया वीडियो वायरल होने के बाद हुई छापेमारी

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें कथित तौर पर प्रज्वल रेवन्ना जेल के अंदर मोबाइल फोन पर बात करते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई और 11 अगस्त को जेल परिसर में तलाशी ली गई। पुलिस के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना ने कथित तौर पर परिवार के सदस्यों से बात करने और वीडियो कॉल करने के लिए भी मोबाइल का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने वकील से संपर्क करने के लिए फोन का इस्तेमाल किया या नहीं, इस पहलू की भी जांच की जा रही है। प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते, पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। रेप मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह जेल में सजा काट रहे हैं।

फिलहाल पुलिस मोबाइल फोन और पेन ड्राइव से बरामद डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच के साथ-साथ कॉल रिकॉर्ड और जेल में मोबाइल पहुंचने के मामले की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद सामग्री और कथित संपर्कों का आपस में क्या संबंध है और जेल नियमों के उल्लंघन के मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।

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