आजम खान के समर्थन में जंतर-मंतर पर सपा का प्रदर्शन, रिहाई और मुकदमे वापस लेने की मांग

खबर सार :-

आजम खान के समर्थन में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। सपा ने उनकी रिहाई, मुकदमे वापस लेने और जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण नोटिस को रद्द करने की मांग की।
आजम के समर्थन में सपा, जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण नोटिस रद्द करने की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के समर्थन में रविवार को सपा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा आजम खान की रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के नोटिस को भी तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।

सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। मोहम्मद अरशद खान ने दावा किया कि प्रदर्शन के लिए उनके पास अनुमति थी, लेकिन पुलिस ने इसे अचानक रद्द कर दिया। उनके मुताबिक, जब सपा कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे तो वहां चारों ओर बैरिकेडिंग कर रास्ते रोक दिए गए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध दर्ज कराया।

2019 के बाद मुकदमों का मुद्दा उठाया

प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद अरशद खान ने आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में तमाम परिस्थितियों के बावजूद आजम खान चुनाव जीतने में सफल रहे थे। इसके बाद अगले कुछ महीनों में आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए गए। सपा नेता ने दावा किया कि करीब 350 मुकदमों का एक साथ दर्ज होना सरकारी साजिश का परिणाम था। उन्होंने कहा कि आजम खान और उनके परिवार के साथ अन्याय हो रहा है और पार्टी इसी मुद्दे को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांग रख रही है। हालांकि, मुकदमों की संख्या और उनके पीछे राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप सपा नेताओं द्वारा लगाए गए दावे हैं। इन दावों पर संबंधित सरकारी अथवा पुलिस पक्ष का विस्तृत पक्ष इस प्रदर्शन के संदर्भ में सामने नहीं आया है।

जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों का मामला

प्रदर्शनकारियों ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े भवनों के ध्वस्तीकरण के नोटिस का मुद्दा भी उठाया। मोहम्मद अरशद खान के अनुसार, रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया है। सपा नेता ने इसे हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उससे जुड़े परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। सपा की मांग है कि संबंधित नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय होने तक किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।

प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी तैयार किया। ज्ञापन में आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ वर्ष 2019 में कम समय के भीतर दर्ज किए गए लगभग 350 मुकदमों का उल्लेख किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि एक ही परिवार के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होने से राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। सपा ने इन मामलों की निष्पक्ष समीक्षा और मुकदमों को वापस लेने की मांग की।

ज्ञापन में जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण नोटिस का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि मामला केवल भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा, शोध, रोजगार और हजारों परिवारों का भविष्य जुड़ा है। सपा नेताओं ने मांग की कि नोटिस को निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शन के जरिए सपा कार्यकर्ताओं ने आजम खान और उनके परिवार से जुड़े कानूनी मामलों तथा जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाने की कोशिश की। पार्टी ने इन मामलों में हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है।

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