मत्स्य क्षेत्र में रिकॉर्ड छलांग: पीएम मत्स्य संपदा योजना से 197.75 लाख टन पहुंचा मछली उत्पादन

खबर सार :-

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण, आधुनिक कोल्ड चेन, बेहतर परिवहन और बाजार सुविधाओं के विकास का मजबूत आधार बनकर उभरी है। संसद में पेश आंकड़े संकेत देते हैं कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार बढ़ाने और भारत को मत्स्य उत्पादन एवं निर्यात के क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मत्स्य क्षेत्र में रिकॉर्ड छलांग: पीएम मत्स्य संपदा योजना से 197.75 लाख टन पहुंचा मछली उत्पादन

खबर विस्तार : -

Parliament MonsoonSession: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के प्रभाव से देश का मत्स्य क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि वर्ष 2024-25 में देश का कुल मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन पहुंच गया, जबकि वर्ष 2023-24 में यह 141.64 लाख टन था। सरकार का कहना है कि वर्ष 2020-21 से लागू इस योजना ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजन, महिलाओं की भागीदारी मजबूत करने तथा आधुनिक अवसंरचना विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।

लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र का समग्र और सतत विकास करना है। पिछले छह वर्षों के दौरान इस योजना के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए अनेक परियोजनाओं को लागू किया गया है। सरकार के अनुसार, मत्स्य क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यही कारण है कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भंडारण, परिवहन और विपणन सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में महिला लाभार्थियों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। लाभार्थी-आधारित गतिविधियों में महिलाओं को परियोजना की इकाई लागत का 60 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1,47,654 महिला लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के लिए 4,178.30 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आय के नए अवसर पैदा हुए हैं।

कोल्ड चेन और बाजार सुविधाओं का विस्तार

केंद्र सरकार ने मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए कोल्ड चेन एवं विपणन अवसंरचना पर भी बड़े स्तर पर निवेश किया है। मत्स्यपालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत अप्रैल 2026 तक 2,797 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मछलियों के सुरक्षित भंडारण, परिवहन और विपणन को आधुनिक बनाना है।

देशभर में तैयार हो रहा मजबूत नेटवर्क

सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के तहत देशभर में 775 कोल्ड स्टोरेज एवं आइस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 28,489 मछली परिवहन इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जिनमें आइस बॉक्स से लैस मोटरसाइकिलें, साइकिलें, ऑटो-रिक्शा, इंसुलेटेड ट्रक और रेफ्रिजरेटेड ट्रक शामिल हैं। इसके साथ ही 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयां, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार और 24 थोक मछली बाजार विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन सुविधाओं से मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और उत्पादकों को उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी।

रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। बेहतर अवसंरचना, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं के कारण छोटे मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि की संभावना बढ़ी है। महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस क्षेत्र को अधिक समावेशी बना रही है। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी मत्स्य क्षेत्र में निवेश, उत्पादन क्षमता और निर्यात बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार जारी रहेगा। इससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ लाखों लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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