मानसून सत्र के बीच सरकार का बड़ा दावा: पीएलआई से 2.4 लाख करोड़ का निवेश, विपक्ष का हंगामे पर जोर

खबर सार :-

मानसून सत्र में एक ओर सरकार आर्थिक उपलब्धियों और पीएलआई जैसी योजनाओं की सफलता को प्रमुखता से पेश कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटा है। संसद के भीतर बहस और बाहर प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सक्रियता को दर्शाते हैं। आने वाले दिनों में विधायी कार्य और राजनीतिक टकराव दोनों सत्र की दिशा तय करेंगे।
मानसून सत्र के बीच सरकार का बड़ा दावा: पीएलआई से 2.4 लाख करोड़ का निवेश, विपक्ष का हंगामे पर जोर

खबर विस्तार : -

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र इन दिनों सरकार और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। एक ओर केंद्र सरकार विकास, निवेश, रोजगार और आर्थिक सुधारों से जुड़े आंकड़े सदन में पेश कर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। संसद के भीतर लगातार बहस, विरोध और कार्यवाही में व्यवधान देखने को मिल रहा है, जबकि संसद भवन के बाहर भी अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन जारी हैं।

इसी बीच सरकार ने संसद में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए दावा किया कि इस योजना ने देश में विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। लोकसभा में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लिखित उत्तर में बताया कि 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजनाओं के तहत 14 प्रमुख क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। इसके साथ ही 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं तथा 15.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात संभव हुआ है।

सरकार के अनुसार, पीएलआई योजना 1.91 लाख करोड़ रुपये के स्वीकृत वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू की गई थी। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) इस योजना की नोडल एजेंसी के रूप में समन्वय और निगरानी करता है, जबकि इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों के पास है।

निर्यात में लगातार बढ़ोतरी का दावा

सरकार ने संसद को बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में पीएलआई योजना के तहत निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का निर्यात बढ़कर 2024-25 में 6.5 लाख करोड़ रुपये और 2025-26 में 15.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार का कहना है कि यह भारत की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (ग्लोबल वैल्यू चेन्स) में मजबूत होती भागीदारी का संकेत है।

इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा निवेश

सरकार के मुताबिक, उच्च दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल क्षेत्र में सबसे अधिक 64,873 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके बाद फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में 45,158 करोड़ रुपये, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स में 44,326 करोड़ रुपये, स्पेशियलिटी स्टील में 23,896 करोड़ रुपये और बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में 20,580 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ। मोबाइल निर्माण क्षेत्र को लेकर भी सरकार ने दावा किया कि पीएलआई लागू होने के बाद भारत में मोबाइल फोन उत्पादन लगभग 2.4 गुना बढ़ा है। वर्तमान में देश में बिकने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में ही निर्मित हो रहे हैं, जबकि मोबाइल फोन के आयात में करीब 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

एनडीए सरकार का एजेंडा

मानसून सत्र में केंद्र सरकार का फोकस आर्थिक विकास, निवेश, रोजगार, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, कृषि और सामाजिक कल्याण से जुड़े विधेयकों एवं नीतिगत पहलों को आगे बढ़ाने पर है। सरकार विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से योजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों का ब्यौरा संसद में प्रस्तुत कर रही है तथा निवेश और आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्रमुखता से सामने रख रही है।

विपक्ष का एजेंडा

विपक्ष संसद में विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। विपक्ष का जोर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दों, चुनावी पारदर्शिता, कानून-व्यवस्था तथा अन्य समसामयिक विषयों पर चर्चा कराने पर है। इन मुद्दों को लेकर कई अवसरों पर विपक्षी दलों ने सदन में विरोध दर्ज कराया, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।

दिल्ली में प्रदर्शन भी चर्चा का केंद्र

संसद सत्र के समानांतर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक दलों, कर्मचारी संगठनों, किसान समूहों और सामाजिक संगठनों द्वारा अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है और संसद परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है।

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