तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में लालू परिवार की "सियासी खिचड़ी", एकता का सन्देश
खबर सार :-
तेज प्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज मकर संक्रांति के बहाने बिहार की राजनीति में एकता और संवाद का प्रतीक बनकर उभरा। लालू यादव, परिवार के अन्य सदस्यों और राज्यपाल की मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया। यह साफ है कि बिहार में अब त्योहार सिर्फ पर्व नहीं, बल्कि सियासी संदेश देने का जरिया भी बन चुके हैं।
खबर विस्तार : -
Dahi-Chuda Bhoj: बिहार में मकर संक्रांति का पर्व सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि अब यह सियासी संदेशों का बड़ा मंच बनता जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी दही-चूड़ा भोज के बहाने राजनीतिक दलों और नेताओं की सक्रियता देखने को मिली। इसी कड़ी में बुधवार को जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज ने खासा ध्यान खींचा, जब इसमें उनके पिता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव शामिल हुए।
तेज प्रताप यादव ने इस भोज से पहले मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर जाकर पिता लालू यादव, मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था। यह निमंत्रण ऐसे समय में दिया गया, जब पारिवारिक और राजनीतिक रिश्तों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। लालू यादव का भोज में पहुंचना इन अटकलों पर विराम लगाने जैसा माना जा रहा है।

नाराजगी की बातों को सिरे से किया खारिज
भोज में शामिल होने के बाद लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मकर संक्रांति का पर्व सबको मिल-जुलकर मनाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर तेज प्रताप यादव को आशीर्वाद दिया और किसी भी तरह की नाराजगी की बातों को सिरे से खारिज कर दिया। उनके इस बयान को पार्टी और परिवार के भीतर एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में उनके मामा साधु यादव भी पहुंचे। हालांकि उन्होंने ज्यादा राजनीतिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा कि परिवार के लोगों को साथ आना चाहिए और एकजुट रहना चाहिए। यह बयान भी अप्रत्यक्ष रूप से पारिवारिक मेल-मिलाप की ओर इशारा करता है।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी रहे मौजूद
इस भोज की अहमियत तब और बढ़ गई, जब बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी इसमें शामिल हुए। राज्यपाल की मौजूदगी ने इस आयोजन को सिर्फ पारिवारिक या दलगत न रखकर एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक स्वरूप दे दिया। गौरतलब है कि बिहार में मकर संक्रांति को लेकर अलग-अलग तिथियों पर आयोजन हो रहे हैं। कुछ लोग बुधवार को पर्व मना रहे हैं, तो कुछ गुरुवार को मनाएंगे। इसी कारण पूरे सियासी गलियारे में दही-चूड़ा भोजों की धूम है। भाजपा प्रदेश कार्यालय, जदयू नेताओं के आवास, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे दलों ने भी अपने-अपने भोज आयोजित किए हैं। इस पूरे माहौल में तेज प्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज चर्चा के केंद्र में रहा, क्योंकि उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी प्रमुख नेताओं को आमंत्रित कर इसे राजनीतिक समरसता का मंच बनाने की कोशिश की।
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