KGMU Trauma Surgery: केजीएमयू के डॉक्टरों ने छाती में चाकू धंसे मरीज की बचाई जान, सुपीरियर वेना कावा की जटिल सर्जरी सफल
खबर सार :-
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने छाती में चाकू धंसे होने के बावजूद एक मरीज की जान बचाकर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
खबर विस्तार : -
Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से चिकित्सा जगत को हैरान करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने अपनी अद्भुत कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एक ऐसे मरीज को नया जीवन दान दिया है, जिसकी स्थिति देखकर किसी की भी रूह काँप जाए। कुशीनगर जिले से एक सत्तावन वर्षीय व्यक्ति को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया था, जिसकी दाहिने हिस्से की छाती में एक खतरनाक चाकू अभी भी पूरी तरह धँसा हुआ था। शरीर की सबसे महत्वपूर्ण रक्त वाहिनियों में से एक पर आए इस संकट को डॉक्टरों ने जिस सूझबूझ से टाला, वह वाकई में किसी चमत्कार से कम नहीं है।
जानलेवा स्थिति और सूझबूझ भरा फैसला
जब वह पीड़ित व्यक्ति अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में दाखिल हुआ, तो उसके सीने में चाकू फंसा हुआ देखकर चिकित्सक भी एक पल के लिए सकते में आ गए। यदि उस धारदार हथियार को बिना किसी योजना के जल्दबाजी में बाहर निकाल लिया जाता, तो शरीर के भीतर से खून का फव्वारा छूट सकता था और मरीज कुछ ही पलों में दम तोड़ सकता था। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए शल्य चिकित्सा दल ने तुरंत मरीज का प्राथमिक उपचार शुरू किया और चाकू को उसी अवस्था में छोड़ दिया गया। इसके बाद अस्पताल में तुरंत सीटी स्कैन किया गया, जिससे यह बात साफ हो गई कि चाकू का सिरा छाती के ऊपरी हिस्से तक पहुँच चुका था और दिल तक खून पहुँचाने वाली मुख्य नस के बेहद करीब था।
जटिल ऑपरेशन और रक्त वाहिनियों की सुरक्षा
जांच की रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ रणनीति तैयार की। चूंकि चाकू का थोड़ा सा भी हिलना मरीज के लिए तुरंत मौत का पैगाम बन सकता था, इसलिए सर्जनों ने पहले शरीर के उन हिस्सों की रक्त आपूर्ति को नियंत्रित किया जो खतरे की जद में थे। इसके बाद बहुत ही बारीक तरीके से उस लोहे के औजार को बाहर निकाला गया। जैसा अंदेशा लगाया जा रहा था, चाकू बाहर आते ही खून का तेज बहाव शुरू हो गया। बिना एक पल गंवाए चिकित्सकों ने तुरंत उस फटी हुई नस की सिलाई करके खून को रोका। लगभग तीन घंटे तक चले इस कड़े संघर्ष और लंबे ऑपरेशन के दौरान मरीज को कई यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार होना शुरू हुआ।
डॉक्टरों का हुनर और चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय
चिकित्सा विज्ञान के जानकारों के अनुसार, दिल तक खून ले जाने वाली इस खास नस पर आने वाले इस तरह के घातक जख्मों से मरीजों का बचना बेहद मुश्किल होता है और दुनिया भर में ऐसे मामलों में मौत का आंकड़ा बहुत ऊंचा रहता है। केजीएमयू के इतिहास में पिछले तीन दशकों में इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है, जिसे डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक संभाल लिया। खास बात यह है कि इसी संस्थान की टीम ने कुछ ही हफ्तों पहले एक अन्य गंभीर और दुर्लभ मामले में भी मरीज की जान बचाई थी। इस पूरी चिकित्सा प्रक्रिया को सफल बनाने में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के कई जाने-माने चिकित्सकों के साथ-साथ निश्चेतना विभाग और नर्सिंग स्टाफ का पूरा सहयोग रहा, जिनके आपसी तालमेल से यह बड़ी सफलता हासिल हो सकी।
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