सिंहस्थ में दिखेगा आस्था और आधुनिकता का संगम, पहली बार ट्रैफिक और श्रद्धालुओं पर रहेगी रियल-टाइम नजर
खबर सार :-
सिंहस्थ-2028 के लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। शिप्रा नदी के घाटों का विस्तार किया जा रहा है, वहीं ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए काॅरिडोर बनाने की भी योजना है।
खबर विस्तार : -
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सिंहस्थ-2028 से पहले विकास की रफ्तार तेज हो गई है। शहरभर में कई बड़े प्रोजेक्ट आकार ले रहे हैं—जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, घाट, पार्किंग की सुविधाएं, जल परिवहन से लेकर डिजिटल निगरानी और महाकाल क्षेत्र का पुनर्विकास शामिल है। इसका मकसद सिर्फ लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालना नहीं है, बल्कि उज्जैन को एक ऐसे धार्मिक शहर में बदलना है जहां बेहतरीन कनेक्टिविटी और सुविधाएं हों, जो सिंहस्थ आयोजन के बाद भी काम आती रहें।
महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ 2028 के लिए नया रूप दिया जा रहा है। शहर के पुराने इलाकों में सड़कों को चौड़ा करने, बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर और अंडरपास बनाने और नए घाटों के विकास समेत कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सरकार श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए शहर की क्षमता बढ़ाने, ट्रैफिक को सुचारू बनाने और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक मार्ग का चौड़ीकरण
कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक 410 मीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसे 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। कंठाल चौराहे पर 500 वर्ग मीटर इलाके में पेवर ब्लॉक लगाने और सौंदर्यीकरण का काम करने की योजना है, और प्राचीन श्री सती माता गेट का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। इस रास्ते के 310 मीटर हिस्से में PCC (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) सड़क बनाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है। स्थानीय निवासी और दुकानदार इस काम के लिए जगह बनाने के मकसद से अपनी संपत्तियों को हटाकर प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 को भव्य और शानदार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी तरह के विकास और जन-कल्याणकारी पहलों को गति दी जा रही है। सम्राट विक्रमादित्य का ऐतिहासिक शहर एक बार फिर उत्कृष्टता की ओर बढ़ रहा है। नागरिकों का स्वैच्छिक सहयोग न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
5.30 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा
सिहंस्थ के दौरान होने वाली भीड़ को देखते हुए, उज्जैन में लगभग 945.20 करोड़ रुपये की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। यह इंदौर गेट तक जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद पुराने शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में गाड़ियों की भीड़ को कम करना और तीर्थयात्रियों की आवाजाही को आसान बनाना है। महाकाल लोक के बनने के बाद काल भैरव और मंगलनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे एक अहम प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
महाकाल लोक से जुड़ेगा हरिफाटक पार्किंग एरिया
हरिफाटक पार्किंग एरिया को महाकाल लोक से जोड़ने के लिए 650 मीटर लंबे अंडरपास का भी प्रस्ताव है, जिसके लिए 91.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। इस रास्ते का लगभग 450 मीटर हिस्सा जमीन के नीचे होगा, जिसमें गाड़ियों की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग बॉक्स स्ट्रक्चर होंगे। इसका मकसद हरिफाटक ब्रिज के आस-पास ट्रैफिक का दबाव कम करना और पार्किंग एरिया से महाकाल लोक तक तीर्थयात्रियों की आसानी से आवाजाही सुनिश्चित करना है।
शिप्रा घाटों का विस्तार, 18 नई अप्रोच रोड का प्रस्ताव
शिप्रा नदी सिहंस्थ का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र है। नदी के दोनों किनारों पर 778 करोड़ रुपये की लागत से 29.15 किलोमीटर लंबे घाट विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, 120 करोड़ रुपये की लागत से 7.8 किलोमीटर के मौजूदा पक्के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है। जहां, 2016 के सिहंस्थ में लगभग 7 किलोमीटर घाट थे, वहीं आने वाले 2028 के सिहंस्थ के लिए 35 किलोमीटर घाट उपलब्ध कराने की योजना है। घाटों तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए 18 नई अप्रोच रोड का प्रस्ताव है; इनमें गौ घाट, वेधशाला (ऑब्जर्वेटरी) के पीछे, वाकणकर ब्रिज, जीवन खेड़ी और श्री शनि मंदिर के पास के इलाके शामिल हैं।
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पहली बार जल परिवहन से जुड़ेंगे प्रमुख मंदिर
इसके अलावा, सिहंस्थ के दौरान पहली बार शिप्रा के किनारे स्थित प्रमुख मंदिरों को जल परिवहन के जरिए जोड़ने की योजना है। लगभग 13.11 किलोमीटर लंबा नदी परिवहन मार्ग मोबिलिटी मास्टर प्लान का हिस्सा है। शिप्रा को प्रदूषण से बचाने के लिए कान्ह क्लोज्ड डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है; हेड रेगुलेटर का निर्माण पूरा हो चुका है। 4.50 किलोमीटर लंबे 'कट-एंड-कवर' सेक्शन का काम पूरा हो गया है और 10.30 किलोमीटर के हिस्से के लिए प्रीकास्ट सेगमेंट तैयार हैं। 12 किलोमीटर लंबे टनल सेक्शन में से 8.15 किलोमीटर की खुदाई का काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट का मकसद शिप्रा नदी में गंदा पानी बहने से रोकना है।
125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना
सिंघस्थ के लिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के अनुसार, 125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है। इंदौर और आस-पास के शहरों के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उज्जैन स्टेशन पर दो फुट-ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं—एक 6 मीटर चौड़ा और दूसरा 12 मीटर चौड़ा। स्टेशन के दूसरे एंट्री गेट पर लगभग 15,000 से 20,000 वर्ग मीटर का होल्डिंग एरिया बनाया जा रहा है। विक्रम नगर सहित कई स्टेशनों पर विकास कार्य अगले 9 से 10 महीनों में पूरे करने का लक्ष्य है। स्टेशनों पर AI-बेस्ड सर्विलांस सिस्टम और बड़े पैमाने पर CCTV कैमरा नेटवर्क लगाए जाएंगे।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी
सिंघस्थ की तैयारियों का दायरा उज्जैन शहर से आगे आस-पास के इलाकों तक फैला हुआ है। उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए बड़नगर होते हुए 3,839 करोड़ रुपये की लागत से 80.45 किलोमीटर लंबा फोर-लेन हाईवे बनाया जा रहा है। इसके अलावा, 98.73 किलोमीटर लंबे फोर-लेन कॉरिडोर का शिलान्यास भी हो चुका है। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर 48.1 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर 2,935 करोड़ रुपये की लागत आएगी। साथ ही, उज्जैन-इंदौर सिक्स-लेन हाईवे पर 1,692 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। शहर के अंदर ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बाईपास रोड बनाने की योजना भी है।
इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के जरिए भीड़ की निगरानी
सिंघस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन में टेक्नोलॉजी को शामिल करने की तैयारियां चल रही हैं। पहली बार, इस आयोजन की निगरानी और प्रबंधन एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए किया जाएगा। यह सेंटर भीड़ के घनत्व, ट्रैफिक, आपातकालीन स्थितियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रियल-टाइम में नजर रखेगा। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मियों और वॉलंटियर्स को अलर्ट भी जारी किए जा सकते हैं। शहरभर के सौ प्रमुख चौराहों को कैमरे लगाकर आधुनिक बनाया जा रहा है। मेले का मैदान लगभग 3,100 हेक्टेयर इलाके में तैयार किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों की पार्किंग के लिए 30 सेक्टरों में 3,000 हेक्टेयर से ज्यादा जगह तय करने की योजना है। भीड़ को संभालने के लिए तीन-स्तरीय होल्डिंग सिस्टम भी बनाया जा रहा है।
महाकाल मंदिर और शहर की सुविधाओं पर ध्यान
श्री महाकालेश्वर मंदिर के विकास के लिए 299.74 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का लक्ष्य सिंहस्थ कार्यक्रम से एक साल पहले सभी बड़े प्रोजेक्ट पूरे करना है। साथ ही, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होटल, सड़क किनारे बने खाने-पीने की जगहों और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश अग्रवाल को 'सिंहस्थ मेला प्राधिकरण' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर पहले काम कर चुके अग्रवाल को शहर के विकास प्रोजेक्ट्स, जमीनी स्तर की प्लानिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ है। अग्रवाल ने कहा कि यह भूमिका सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "सिंहस्थ उज्जैन के लिए एक भव्य त्योहार है। मैं पूरी लगन से काम करूंगा और लाखों तीर्थयात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दूंगा ताकि किसी को भी कोई परेशानी न हो।"
इंदौर के डीएम को सिंहस्थ का अतिरिक्त प्रभार
इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह को सिंहस्थ मेला अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सिंह ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के लिए तीर्थयात्रियों की सुविधा सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। सभी विकास कार्य तय समय में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएंगे, जिससे उज्जैन और मध्य प्रदेश की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ से पहले शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुव्यवस्थित करने के लिए सभी विभाग तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। भविष्य की जरूरतों के आधार पर विकास प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है और सभी निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगभग 40 करोड़ तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान
अनुमान है कि सिंहस्थ-2028 के दौरान लगभग 40 करोड़ तीर्थयात्री उज्जैन आएंगे। 27 मार्च से 27 मई, 2028 तक होने वाले इस आयोजन के जरिए सरकार का मकसद उज्जैन को सिर्फ दो महीने के मेले के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले सालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी तैयार करना है। सड़क, रेल, घाट, जल परिवहन, पार्किंग और तकनीकी निगरानी से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद उज्जैन का कायाकल्प हो जाएगा, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्रियों का अनुभव और भी यादगार बन जाएगा।
FAQ
1. सिंहस्थ कुंभ कब से शुरू होगा?
सिंहस्थ कुंभ उज्जैन में साल 2028 में 27 मार्च से शुरू होगा।
2. सिंहस्थ कुंभ के लिए शहर में क्या तैयारियां चल रही हैं?
सिंहस्थ कुंभ के लिए तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए कई मोर्चों पर काम चल रहा है। इनमें से ये प्रमुख हैं-
- शिप्रा घाटों का विस्तार- शिप्रा नदी के घाटों का विस्तार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को मेले के लिए 35 किलोमीटर घाट उपलब्ध कराने की योजना है।
- सड़कों का चौड़ीकरण व सौंदर्यीकरण- कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक 410 मीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसे 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इसके अलावा सौंदर्यीकरण की योजना है। घाटों तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए 18 नई अप्रोच रोड का प्रस्ताव है।
- स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना- सिंघस्थ के लिए तीर्थयात्रियों की भीड़ को देखते हुए 125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है।
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी - उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए बड़नगर होते हुए 80.45 किलोमीटर लंबा फोर-लेन हाईवे बनाया जा रहा है। इसके अलावा 98.73 किलोमीटर लंबे फोर-लेन कॉरिडोर का शिलान्यास भी हो चुका है।
- सुरक्षा पर भी फोकस - भीड़ के घनत्व, ट्रैफिक, आपातकालीन स्थितियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रियल-टाइम में नजर रखने के लिए पहली बार अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का इस्तेमाल किया जाएगा। शहरभर के सौ प्रमुख चौराहों को कैमरे लगाए जा रहे हैं।
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