उज्जैन में आधुनिक तकनीक पर भारी पड़ रही आस्था, प्राचीन ‘खड़े हनुमान जी’ की मूर्ति हटाने में मशीनें बेअसर
खबर सार :-
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की जद में आया हनुमान मंदिर चर्चा में है। प्रशासन प्रतिमा हटाने में नाकाम है। दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन को पहुंच रहे हैं।
खबर विस्तार : -
उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आस्था, इतिहास और आधुनिक तकनीक का आमना-सामना होता दिख रहा है। कंठाल चौराहे और छत्री चौक के बीच स्थित प्राचीन 'खड़े हनुमान जी' की मूर्ति को सड़क चौड़ी करने के लिए दूसरी जगह ले जाने की प्रशासनिक कोशिशें शुरू हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मूर्ति अभी भी वहीं है।
मूर्ति को हटाने की कोशिश में क्रेन, पोकलेन मशीनें और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। इन कोशिशों के दौरान मशीनों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ा और चेन टूटने की घटनाएं भी हुईं। इसलिए, अब मूर्ति की सुरक्षा को लेकर तकनीकी और पुरातत्व विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्य सड़कों को चौड़ा करने की योजना
गौरतलब है कि सिंहस्थ की तैयारी के लिए शहर की मुख्य सड़कों को चौड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है। इसी पहल के तहत, कंठाल इलाके के प्राचीन मंदिर को सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। हालांकि, मंदिर का बाहरी ढांचा हटाए जाने के बाद, मूर्ति को दूसरी जगह ले जाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं।
बड़ी-बड़ी मशीनों का हो चुका इस्तेमाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरू में हाइड्रोलिक क्रेन का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद, ज्यादा क्षमता वाली मशीनें और पोकलेन मशीनें मौके पर लाई गईं। मूर्ति को सुरक्षित रूप से उठाने के लिए चेन और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं। कई बार प्रशासनिक और तकनीकी कोशिशों के बाद, अधिकारी अब मूर्ति पर बहुत ज्यादा मैकेनिकल जोर लगाने से बच रहे हैं।
170 साल पुरानी मानी जा रही मूर्ति

स्थानीय स्तर पर, 'खड़े हनुमान जी' की मूर्ति को लंबे समय से लगभग 170 साल पुरानी माना जाता रहा है। हालांकि, मूर्ति की बनावट, पत्थर के प्रकार और कारीगरी के बारे में शुरुआती चर्चाओं से पता चलता है कि यह इससे कहीं ज्यादा पुरानी हो सकती है। कुछ इतिहासकार इसे परमार काल से जोड़ते हैं और अनुमान लगाते हैं कि यह लगभग एक हजार साल पुरानी हो सकती है। नतीजतन, इस जगह को अब सिर्फ पूजा-पाठ की जगह के तौर पर नहीं, बल्कि संभावित ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली जगह के तौर पर भी देखा जा रहा है।
3D स्कैनिंग से गहराई जानने पर विचार
इस बीच, मूर्ति के आधार और जमीन के नीचे के ढांचे की स्थिति का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक 3D स्कैनिंग के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। वहीं, मूर्ति को हटाने की कोशिशों की खबरों के बाद कंठाल इलाके में भक्तों की संख्या बढ़ रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे शहरों से भी भक्त यहां आ रहे हैं। मंदिर के आस-पास हनुमान चालीसा और रामायण का पाठ और भजन-कीर्तन चल रहा है।
फोटो-वीडियो वायरल होने पर चर्चा में आया मामला
भक्तों के लिए, मूर्ति का अपनी मूल जगह पर बने रहना गहरी आस्था का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर मूर्ति को हटाने की कोशिशों के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। स्थानीय स्तर पर, इस मूर्ति को 'सिद्ध प्रतिमा' (आध्यात्मिक शक्ति से युक्त मूर्ति) और इस जगह को 'जाग्रत देवस्थान' (आध्यात्मिक रूप से जागृत या जीवित तीर्थ) माना जाता है।
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सड़क योजना में बदलाव करने की मांग
स्थानीय समुदाय की भावनाएं इन घटनाओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। निवासियों का कहना है कि यह मूर्ति यहां लंबे समय से स्थापित है और पीढ़ियों से लोग यहां पूजा करते आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि मूर्ति को वहीं रहने दिया जाए। मंदिर से जुड़े लोगों का तर्क है कि सड़क योजना में मामूली बदलाव करके इस प्राचीन धार्मिक स्थल को बचाया जा सकता है। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को बचाने के विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
मंदिर के पुजारी बोले- मूर्ति को न हो नुकसान
मंदिर के पुजारी, सुलभ शांतनु शर्मा ने मांग की है कि मूर्ति को हटाने की कोई भी कोशिश करने से पहले पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि मूर्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए और प्रशासन को इस बात की पक्की गारंटी देनी चाहिए। पुजारी का यह भी सुझाव है कि अगर सड़क के आस-पास उपलब्ध जमीन और वैकल्पिक रास्तों की संभावनाओं की जांच की जाए, तो मूर्ति को हटाए बिना विकास कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है। अब भक्तों के बीच भी यह मांग जोर पकड़ रही है।
मूर्ति को हानि पहुंचाए बिना समाधान पर जोर
इस स्थिति ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है: विकास और विरासत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? प्रशासन के सामने सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन की ट्रैफिक व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, 'खड़े हनुमान जी' की मूर्ति स्थानीय और व्यापक धार्मिक आस्था का केंद्र है। भारी मशीनों से मूर्ति को हटाने की कोशिशें नाकाम रहने के बाद, अब विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से एक रणनीति बनाई जा रही है। इससे उम्मीद जगी है कि मूर्ति को नुकसान पहुंचाए बिना कोई समाधान निकाला जा सकता है।
भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक बनी प्रतिमा
उज्जैन में भगवान हनुमान की खड़ी प्रतिमा के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा ने इस पूरी घटना को धार्मिक महत्व प्रदान किया है। दस दिनों तक प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बावजूद इसके अपनी जगह पर मजबूती से कायम रहने की बात भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक बन गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन सिंहस्थ विकास योजनाओं और... के बीच संतुलन कैसे बनाता है।
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