नगर निगम हनुमानजी की मूर्ति हटएगा, छह दिन में अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ीं, भक्तों ने रख दी शर्त
खबर सार :-
नगर निगम उज्जैन में हनुमानजी की मूर्ति को हटाने की कोशिश कर रहा है। कई दिनों बाद अधिकारी इसे हटा पाने की स्थिति में नहीं रहे। अब इंदौर से इंजीनियर बुलाए गए हैं।
खबर विस्तार : -
उज्जैन : ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियां काफी जोरशोर से की जा रही हैं। इन तैयारियों के बीच एक प्राचीन हनुमानजी की मूर्ति को सुरक्षित स्थानांतरित कर पाना प्रशासनिक के लिए बेहद कठिन हो रहा है।
गहराई नापने के लिए आए वैज्ञानिक
अधिकारियों और कर्मियों का परिश्रम और तकनीकी कवायद छह दिन से लगातार फेल हो रहा है। इसी बीच भगवान बजरंगबली की पूजा करने वालों की संख्या बढ़ रही हैं। नगर निगम की ओर से अब हनुमानजी की मूर्ति हटाने के लिए आईआईटी इंदौर से मदद मांगी गई है।
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छत्री चौक तक हो रहा सड़क चौड़ीकरण
अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाना नगर निगम और जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर बन रहा है। इसीलिए अब हनुमान जी की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम से मदद मांगी गई है। दरअसल, उज्जैन शहर में कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इस कार्य में प्राचीन हनुमान मंदिर चौड़ीकरण की जद में आ रहा है।
निगम इनकोे हटाने के लिए पिछले छह दिनों से कवायद में जुटा हुआ है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही है। इस मूर्ति को उक्त जगह से हिला पाना भी संभव नहीं बन पा रह है। कर्मियों ने क्रेन के अलावा कई और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया। इसके बाद भी जब प्रतिमा को हटाना संभव नहीं हुआ तो नगर निगम ने आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम को बुलाने का फैसला किया। कहा जा रहा है कि उक्त टीम के अधिकारियों से बात भी की जा चुकी है। मिट्टी की जांच के लिए वह आए थे।
बेसाल्ट पत्थर से बनी है मूर्ति
जिस मूर्ति को हटाना है, वह बेसाल्ट पत्थर से बनी हुई है। आस्था का सम्मान करते हुए परमार कालीन मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना है। इसके लिए बुधवार को उज्जैन पहुंची आईआईटी की टीम आधुनिक उपकरणों से मूर्ति की गहराई का पता कर चुकी हैै। तकनीकी का इस्तेमाल करने से पहले यह बहुत जरूरी था। आस्था और तकनीक दोनों का सम्मान करते हुए आगे के फैसले किए जा रहे हैं। इधर आस्था के प्रति विश्वास करने वाले भक्तों का सैलाब मंदिर की ओर लगातार उमड़ रहा है। गुरूवार को भी सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।
उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने मीडिया को बताया कि पुजारी के अनुरोध पर आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट और उनका पूर्व का नतीजा ही यह तय करेगा कि मूर्ति को दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया और तारीख अब वह ही तय करेंगे। हमारी कोशिश यह पता लगा रही है कि क्या मूर्ति को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित हटाया जा सकता है?
बड़ी मूर्तियों को रखने में इंटरलॉकिंग होती थी
अब तक कि प्रयासों में आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों ने तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया है। इसके जरिए मूर्ति की गहराई और आसपास की मिट्टी की जांच की गई है। बताया जा रहा है कि परमार वंश के समय की बड़ी मूर्तियों को रखने में अक्सर इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। खड़े हनुमानजी की मूर्ति मालवा क्षेत्र के मजबूत बेसाल्ट पत्थर से तराशी गई है।
सर्वसम्मति से समाधान निकाला जाएगा
हनुमान जी के प्रति आस्थावानों की संख्या बहुत है। इसलिए इससे संबंधित विषय में प्रशासन सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही कदम बढ़ा रहा है। एसडीएम स्तर पर सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखकर किसी नतीजे पर पहुंचने की कोशिश कुछ धीमी हुई है। इस मामलेे पर एसडीएम एलएन गर्ग ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य महत्वपूर्ण हैं। साथ ही उज्जैन की आस्था और विरासत का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद कर रहा है।
आपत्ति नहीं, लेकिन सम्मान बना रहे
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने मीडिया से बात किया है। उनका कहना है कि मुझे प्रशासन की कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद ली जाए। दूसरी ओर स्थानीय लोगों की संख्या नगर निगम कमिश्नर के कार्यालय पर बढ़ रही है। उनकी मांग है कि मूति को किसी प्रकार से नुकसान न पहुंचाया जाए। इस मांग के बाद अधिकारियों ने बताया कि पुजारी के अनुरोध पर इंदौर की एक टीम ने मंगलवार को मूर्ति का निरीक्षण किया था।
लोगों में हलचल देख उज्जैन जिला प्रशासन ने भी मामले पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। एक प्रेस नोट जारी कर कहा गया है कि श्रद्धालुओं की भावना के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ी है, इसलिए निगम का कहना है कि किसी की भी आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। मंदिर और प्रतिमा अन्य जगह स्थापना का कार्य बगैर सहमति के नहीं होगा।
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