जानापाव में भगवान श्रीकृष्ण को मिला था सुदर्शन चक्र: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के जानापाव में ‘परशुराम लोक’ एवं ‘श्रीकृष्ण लोक का विकास करने के लिए आज भूमिपूजन किया गया। इस कार्य में कई करोड़ रूपये खर्च किए जाने हैं।
खबर विस्तार : -
इंदौर/भोपाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिन पर कहा कि जानापाव वह गौरवशाली धरती है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर जिले के जानापाव में लोगों को संबोेधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से दुष्टों का विनाश किया है।
यदि महर्षि परशुराम जी द्वारा प्रदान किया गया सुदर्शन चक्र उनके पास रहा तो उनका जीवन धर्म और सत्य की रक्षा कर पाने में सफल रहा। सुदर्शन चक्र महत्वपूर्ण अस्त्र बना। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में सत्य, धर्म, पराक्रम और पुरुषार्थ का संदेश दिया। कार्यक्रम स्थल के लिए कहा कि यह पवित्र और गौरवशाली स्थान है। बताया जाता है कि महर्षि परशुराम की जन्मस्थली और साढ़े सात नदियों के उद्गम वाला एक मात्र स्थान जानापाव है। इसे पावन स्थल माना जाता है।
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विकास में खर्च होंगे लगभग 17 करोड़
इसीलिए यहां पर जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करना सौभाग्य माना जाता है। एक प्रसंग शिशुपाल के संबंध में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बुआ को दिए वचन के अनुसार शिशुपाल की सौ गलतियों तक क्षमा किया। इतनी गलतियों के बाद भी जब वह नहीं रूके तो धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर दिया। उन्होंने कहा कि जानापाव को भी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र और आध्यात्मिक चेतना पीठ के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर ‘परशुराम लोक’ एवं ‘श्रीकृष्ण लोक’ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।
5000 वर्ष पुराना इतिहास सामने आएगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने त्रेता और द्वापर को एक सूत्र में रखा और कहा कि मध्य प्रदेश का भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम से गहरा संबंध रहा है। यानी त्रेता और द्वापर दोनों युग एमपी में भक्तिवर्षा होती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगभग 5000 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने फिर से लाने के लिए कार्य कर रही है। इसका मतलब कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्य प्रदेश में जहां-जहां अपने चरण रखे, वह सभी स्थलों को वर्तमान सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करेगी।
ऐसे ही भगवान श्रीराम के चरण पडऩे वाले स्थलों के साथ भी होगा। वह सभी स्थान धार्मिक पर्यटन बनाए जाएंगे। चित्रकूट धाम, जानापाव का नाम लेकर कहा कि श्रीराम के वनगमन से जुड़े आश्रम और अन्य पौराणिक स्थलों के साथ भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को भी विकसित करने की योजना है। मध्य प्रदेश में रुक्मिणी हरण से जुड़े क्षेत्र तथा धार जिले में हुए युद्ध से संबंधित स्थान हैं।
धार्मिक पर्यटन के रूप में होगा विकास
यह महाभारत कालीन हैं। इनको भी विकसित कर उनके गौरवशाली इतिहास को जीवंत किया जाएगा। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की सरकार यहां बदलाव लाना चाह रही है। इसीलिए कई स्थानों का सीएम ने जिक्र भी किया है। महाकाल महालोक, उज्जैन भी धार्मिक स्थल माना गया है। यहां पर श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। जहां पर 17 करोड़ खर्च किए जाने हैं, वहां यज्ञ कुंड का पुनर्विकास, भव्य ऑडिटोरियम, ध्यान कुटीर, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग, बहुउद्देशीय भवन का निर्माण कराया जाएगा।
संदेश देते हैं भगवान श्रीकृष्ण
भगवान श्रीकृष्ण के बारे मंें मुख्यमंत्री ने कहा कि गोपाल के रूप में गायों का पालन करते हुए वन-वन विचरण किया। उनकी महानता बताते हुए कहा कि सामान्य जीवन से लेकर महाभारत के विराट प्रसंग तक मानव जीवन को अनेक संदेश दिए। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से दुनिया को कर्म, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सिखाता है कि प्रत्येक परिस्थिति में सत्य और धर्म के लिए खड़े रहना चाहिए।
जिन स्थानों पर काम होने वाला है, उनको सनातन से जोड़ा और कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों का विकास केवल पर्यटन की दृष्टि से नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के लिए भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानापाव स्थित मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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