झारखंड में नक्सलवाद की लगभग विदाई, अब संगठित अपराध के आर्थिक साम्राज्य पर प्रहार की तैयारी
खबर सार :-
झारखंड में नक्सलवाद कमजोर होने के बाद अब पुलिस का पूरा फोकस संगठित आपराधिक गिरोहों और उनके आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने पर है। जानिए क्या है पूरी रणनीति।
खबर विस्तार : -
रांची: कभी झारखंड की पहचान घने जंगलों में गूंजती गोलियों, बारूदी सुरंगों और नक्सली आतंक से होती थी। शाम ढलते ही ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बलों की चौकसी बढ़ जाती थी और हर विकास कार्य के साथ हिंसा का खतरा जुड़ा रहता था। लेवी की वसूली ने कई क्षेत्रों में एक समानांतर आर्थिक व्यवस्था खड़ी कर दी थी, जहां भय ही सबसे बड़ा हथियार था। लेकिन, वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अब यह तस्वीर काफी हद तक बदल चुकी है। जंगलों में नक्सली गतिविधियां सिमट गई हैं, कई बड़े कमांडर मारे गए या गिरफ्तार हुए हैं और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना है।
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अब तक राज्य में 113 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 50 ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा, सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में 22 माओवादी मारे गए हैं और भारी मात्रा में हथियार व कारतूस बरामद किए गए हैं। आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि झारखंड में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और जहां भी थोड़ी बहुत गतिविधि की सूचना मिलती है, वहां तुरंत अभियान चलाया जाता है।
अपराध का बदला भूगोल और शहर पहुंचते गिरोह
नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद राज्य में अपराध का स्वरूप और भूगोल बदल गया है। अब जंगलों की बजाय शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में संगठित आपराधिक गिरोहों की सक्रियता ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। रंगदारी के लिए धमकी, फायरिंग, जमीन पर कब्जे, कोयला-बालू के कारोबार और ठेकेदारी में वर्चस्व को लेकर विभिन्न गिरोह सक्रिय हैं। प्रिंस खान, राहुल दुबे, अखिलेश सिंह, अमन साव, सुजीत सिन्हा और पांडेय गिरोह जैसे कई नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं।
चूंकि संगठित अपराध केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके तार जेल के भीतर से लेकर बाहर बैठे गुर्गों और आर्थिक मददगारों तक जुड़े होते हैं, इसलिए पुलिस के लिए यह एक दोहरी चुनौती बन गया है। केवल सरगना तक पहुंचने के बजाय इस पूरे तंत्र को भेदना प्रशासन के लिए अनिवार्य हो गया है।
अपराधियों की आर्थिक रीढ़ पर चोट करने की रणनीति
इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस अब केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के वित्तीय साम्राज्य को निशाना बना रही है। कुख्यात अपराधियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध गतिविधियों से कमाया गया धन किन कारोबारों में निवेश किया जाता है। हथियार खरीदने से लेकर गुर्गों को भुगतान करने तक, आर्थिक संसाधन ही इस पूरे आपराधिक तंत्र का ईंधन हैं।
इस दिशा में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 150 से अधिक लोगों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर ली है। इसमें अपराधियों के अलावा उन्हें संरक्षण देने वाले, लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने वाले और ठिकाना मुहैया कराने वाले लोग भी शामिल हैं। एटीएस की टीमें लगातार भौतिक सत्यापन कर रही हैं ताकि इस पूरी आपराधिक कड़ी को एक साथ तोड़ा जा सके।
ये भी पढ़ें.. युद्ध और समुद्री संकट के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डीजीएमए ने उठाया बड़ा कदम
तकनीकी और आधुनिक संसाधनों से लैस होती पुलिस
अपराधियों के इस नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए पुलिस एक ऑनलाइन डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही है, जिसमें अपराधियों के रिकॉर्ड के साथ-साथ उनके सहयोगियों और संपत्तियों की जानकारी भी दर्ज होगी। इसके साथ ही पुलिस के आधुनिकीकरण पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में नए पुलिस थानों, कार्यालयों और आवासों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस बेड़े में लगातार नए वाहनों को शामिल किया जा रहा है।
झारखंड में सुरक्षा और अपराध की बदलती तस्वीर
झारखंड के सुरक्षा इतिहास पर नजर डालें तो पाएंगे कि राज्य को लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद के साए का सामना करना पड़ा है। सुदूर ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था क्योंकि लेवी और हिंसा का आतंक हर तरफ फैला हुआ था। सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों, खुफिया तंत्र की मजबूती और सरकार की आत्मसमर्पण नीतियों के कारण इस समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।
हालांकि, जैसे-जैसे नक्सली ताकतों का दायरा सिमटा, वैसे-वैसे शहरी अपराध और संगठित गिरोहों ने उस खाली जगह को भरने की कोशिश की। आज स्थिति यह है कि पुलिस को एक तरफ बची हुई नक्सली गतिविधियों का पूरी तरह सफाया करना है, तो दूसरी तरफ आधुनिक और संगठित आर्थिक अपराधों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना है। यह लड़ाई अब केवल हथियारों की नहीं, बल्कि उस छिपे हुए वित्तीय और साठगांठ के तंत्र के खिलाफ है, जो अपराध को जीवित रखता है।
ये भी पढ़ें.. एनीमिया का खतरा : क्या आप हर समय थकान और कमजोरी महसूस करते हैं? इसे नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!
अन्य प्रमुख खबरें
-
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए डीजीएमए का सीफेयरर ट्रैकिंग मॉड्यूल शुरू
2026-09-07
-
डाकोर के रणछोड़राय मंदिर और भक्त बोदना की पौराणिक कथा
2026-09-02
-
बलरामपुर में गणेशोत्सव: बंगाल के कारीगरों द्वारा तैयार हो रहीं मूर्तियां
2026-08-31
-
सुरक्षित इलाज और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता संकट: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट
2026-08-24
-
कहीं आपकी थकान के पीछे तो नहीं एनीमिया? जानें आयरन की कमी के अनकहे संकेत
2026-08-17
-
Parliament Monsoon Session संपन्न: 12 बिल पास, पक्ष-विपक्ष में बढ़ा राजनीतिक तनाव
2026-08-14
-
Full Moon : 31 मई को आसमान में फिर दिखेगा चांद का खूबसूरत नजारा, नासा ने शेयर किए फोटोग्राफी टिप्स, मोबाइल से खींच सकते हैं चांद की मनमोहक तस्वीर
2026-05-29
-
Rajiv Gandhi Assassination : 21 मई 1991 की आधी रात को चीख उठा था देश, जब एक आत्मघाती धमाके ने छीन लिया भारत का 'युवा प्रधानमंत्री'
2026-05-21
-
Summer Care Tips for Pregnant Women : लू के थपेड़ों के बीच जच्चा-बच्चा की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
2026-05-13
-
NASA Molecular Cloud Discovery : अंतरिक्ष की 'बर्फीली' गुत्थी, नासा के SPHEREx मिशन ने खींची मॉलिक्यूलर क्लाउड की अद्भुत तस्वीर, खुलेंगे जीवन के राज!
2026-05-07
-
AC Blast Prevention Tips : मौत का सामान न बन जाए आपका AC! इन 10 गलतियों से कंप्रेसर बन सकता है बम, आज ही सुधार लें अपनी आदतें
2026-05-03
-
Vice President Election-2025 : समझे कैसे होता है चुनाव, प्रक्रिया क्या है?
2025-08-26
-
वोटों पर सवाल, चुनाव आयोग पर बवालः क्या है वोट चोरी का पूरा मामला?
2025-08-18
-
Repo Rate में कटौती के बावजूद क्यों नहीं घट रही आपकी EMI ?
2025-07-12
-
बिहार में मतदाता सूचियों की गहन जांच पर संग्राम, महागठबंधन करेगा चक्का जाम !
2025-07-08