सूरत के गणेशोत्सव में दिखेगा आधुनिकता का संगम, 22 फीट की ईको-फ्रेंडली प्रतिमा बनेगी आकर्षण

खबर सार :-

सूरत में इस साल आयोजित हो रहे भव्य गणेशोत्सव की पूरी जानकारी। जानिए 22 फीट ईको-फ्रेंडली प्रतिमा, महिला नेतृत्व और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी खास बातें।
सूरत गणेशोत्सव 2026: 22 फीट ईको-फ्रेंडली प्रतिमा और भव्य तैयारियां

खबर विस्तार : -

सूरत: गुजरात के सूरत शहर में इस बार गणेशोत्सव को एक बिल्कुल नए और भव्य स्वरूप में आयोजित करने की तैयारियां जोरों पर हैं। लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव मंडल की ओर से बालर फार्म परिसर में करीब 3.60 लाख वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में 11 दिवसीय इस आयोजन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस पूरे उत्सव पर छह करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, जो इसे राज्य के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में शुमार करता है।

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल

इस वर्ष के आयोजन की सबसे खास बात परंपरा और आधुनिक तौर-तरीकों का संगम है। नई पीढ़ी यानी जेन-ज़ी युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भक्ति भाव से जोड़ने के लिए इस बार विशेष प्रयोग किए जा रहे हैं। आयोजकों की योजना के अनुसार, उत्सव के दौरान भजन क्लबिंग और जेमिंग जैसे आधुनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा अपने परिवारों के साथ मिलकर इस पावन पर्व का हिस्सा बन सकें और भक्ति को आधुनिक अंदाज में अनुभव कर सकें।

इस भव्य उत्सव का मुख्य केंद्र बिंदु 22 फीट ऊंची वह विशेष गणेश प्रतिमा होगी, जिसे पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ तैयार किया गया है। यह प्रतिमा पूरी तरह से टिश्यू पेपर से बनाई जा रही है। एक शाही सिंहासन पर विराजमान इस विशाल बप्पा की प्रतिमा को लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।

महिला नेतृत्व और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता

गुजरात के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी बड़े गणेशोत्सव मंडल की कमान एक महिला के हाथों में है। मंडल की अध्यक्ष पूजा पटेल के नेतृत्व में आगामी 11 दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजकों का मानना है कि यह पहल इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं भी इतने बड़े स्तर के सार्वजनिक आयोजनों का कुशल और सफल नेतृत्व कर सकती हैं।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आयोजकों ने निर्णय लिया है कि उत्सव की समाप्ति पर प्रतिमा का विसर्जन किसी प्राकृतिक नदी या समुद्र में नहीं किया जाएगा। इसके लिए बालर फार्म के मुख्य पंडाल परिसर के भीतर ही एक कृत्रिम कुंड का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें पूरी धार्मिक मर्यादा के साथ प्रतिमा का विसर्जन संपन्न होगा।

सुरक्षा, सामाजिक सरोकार और व्यापक पृष्ठभूमि

सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व को ध्यान में रखते हुए इस बार कई सराहनीय कदम उठाए गए हैं। उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संभालने वाले पुलिसकर्मियों का जेन-ज़ी युवाओं द्वारा विशेष सम्मान किया जाएगा। इसके अलावा, दिव्यांग और अनाथ बच्चों की सेवा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक प्रकल्पों में भी युवाओं को सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। यातायात और पार्किंग व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी, क्योंकि इस आयोजन में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है।

किसी भी संभावित अप्रिय घटना या दुर्घटना से निपटने के लिए मंडल ने पुख्ता वित्तीय सुरक्षा का इंतजाम किया है। आयोजन के लिए 100 से 110 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम बीमा कवर लिया गया है। इंश्योरेंस कंसल्टेंट निग्रेश माधवानी के अनुसार, यह पर्याप्त रिस्क कवर इसलिए लिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आयोजकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। भक्ति, युवा सहभागिता, सामाजिक सेवा और पर्यावरण के इस अनूठे संगम के साथ सूरत का यह गणेशोत्सव अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने की पूरी तैयारी में है।

ये भी पढ़ें..युद्ध और समुद्री संकट के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डीजीएमए ने उठाया बड़ा कदम

 

अन्य प्रमुख खबरें