Did You Know : इत्र की खुशबू और ऐतिहासिक विरासत के साथ कन्नौज मना रहा अपना स्थापना दिवस
खबर सार :-
18 सितंबर को अपना स्थापना दिवस मना रहे कन्नौज की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक देग-भपका इत्र निर्माण और परफ्यूम टूरिज्म से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण और तथ्यपरक जानकारियां।
खबर विस्तार : -
कन्नौज: मिट्टी से उठती सौंधी खुशबू, गुलाब की महक, केवड़े की सुगंध और सदियों पुरानी इत्र बनाने की कला इस ऐतिहासिक नगर की पहचान को विशिष्ट बनाती है। 'भारत की इत्र राजधानी' के रूप में विख्यात कन्नौज 18 सितंबर को अपनी स्थापना का उत्सव मनाने जा रहा है। वर्ष 1997 में तत्कालीन फर्रुखाबाद जनपद से अलग होकर कन्नौज स्वतंत्र जिला बना था। इतिहास, पौराणिकता और खुशबू की समृद्ध परंपरा को स्वयं समेटे यह जनपद अपनी प्राचीन इत्र विरासत को 'परफ्यूम टूरिज्म' से जोड़कर पर्यटन के नए आयाम स्थापित कर रहा है। रामायण और महाभारत काल से लेकर गुप्त युग और ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत तक इतिहास के पन्नों में दर्ज यह क्षेत्र आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
कन्नौज देश के सबसे प्राचीन स्थानों में से एक है, जिसमें गहरी पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत समाहित है। वाल्मीकि रामायण, महाभारत और पुराणों के अनुसार इस स्थान का प्राचीन नाम 'कन्या कुज्जा' या 'महोधी' था। समय के साथ बदलते दौर का साक्षी रहा यह नगर महान सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में देश की राजधानी होने का गौरव भी हासिल कर चुका है। आज भी यहां की ऐतिहासिक धरोहर उस स्वर्णिम काल की कहानी बयां करती है। जनपद पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए ये विरासत स्थल इतिहास के गौरवशाली अध्यायों से रूबरू होने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

पारंपरिक 'देग-भपका' विधि और वैश्विक पहचान
कन्नौज की तुलना अक्सर फ्रांस के प्रसिद्ध शहर 'ग्रास' से की जाती है, जिसे दुनिया का परफ्यूम हब माना जाता है। हालांकि, यहां की प्राकृतिक इत्र बनाने की सदियों पुरानी पारंपरिक 'देग-भपका' विधि इसे पूरी दुनिया में अलग पहचान देती है। इस विधि की खासियत यह है कि इसमें इत्र निर्माण की हर प्रक्रिया अपने, आप में एक कला है। भट्टी की आंच नियंत्रित करने से लेकर भाप के प्रवाह और खुशबू को सहेजने तक का अनुभव पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचकर इस पारंपरिक कला को करीब से समझते हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इसी अनूठी परंपरा को 'परफ्यूम टूरिज्म' के रूप में बढ़ावा दे रहा है।
कन्नौज के इत्र की इस पारंपरिक कला को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए पर्यटन विभाग लगातार प्रयासरत है। वर्ष 2014 में कन्नौज के इत्र को जीआई टैग मिल चुका है। लंदन वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट, इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और विभिन्न देशों के व्यापार मेलों में इसकी विरासत को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा, इस अनूठी परंपरा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल कराने के प्रयास भी जारी हैं। राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित आठवीं-नौवीं शताब्दी की दुर्लभ मूर्तियां और कलाकृतियां इसकी शिल्प परंपरा की गवाही देती हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी ख्याति अर्जित की है।

पर्यटन विकास और नई बुनियादी परियोजनाएं
कन्नौज को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की चार प्रमुख विकास परियोजनाओं के लिए 10.76 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है। इनमें ऐदखेड़ा शिव मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, च्यवनऋषि आश्रम और मेहंदीघाट का पर्यटन विकास शामिल है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.90 करोड़ रुपए लागत वाली तीन अन्य धार्मिक परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया है, जिससे पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं और बेहतर होंगी।

सरकार के इन मिले-जुले प्रयासों का सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहा है। वर्ष 2025 में जनपद में 21.73 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ है, जो सरकारी पहलों की सफलता को दर्शाता है। धार्मिक, ऐतिहासिक और इको टूरिज्म के साथ गंगा किनारे स्थित मेहंदीघाट, राजा जयचंद का किला, लाख बहोसी पक्षी विहार, राम-जानकी मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और गौरी शंकर मंदिर जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। मेहंदीघाट से दाईपुर घाट के बीच गंगा डॉल्फिन की मौजूदगी और विकसित हो रहा परफ्यूम पार्क इस क्षेत्र के पर्यटन को और अधिक विशिष्ट बना रहे हैं।

'विकास भी, विरासत भी' का बढ़ता कदम
'विजिट माय स्टेट' अभियान के माध्यम से युवाओं को कन्नौज की समृद्ध विरासत से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जो 'विकास भी, विरासत भी' के संकल्प को आगे बढ़ाता है। प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से कन्नौज अब केवल देश की इत्र नगरी तक सीमित नहीं, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। स्थापना दिवस के इस अवसर पर कन्नौज अपनी गौरवशाली परंपरा और आधुनिक विकास के तालमेल का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जो आने वाले दिनों में पर्यटन मानचित्र पर इस क्षेत्र की स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
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