गुजरातः कच्छ की खाड़ी बनी डाॅल्फिन का सुरक्षित आशियाना, गीर फाउंडेशन के सर्वे में 193 बार दिखे समुद्री जीव

खबर सार :-

गीर फाउंडेशन के एक सर्वे के दौरान गुजरात के कच्छ खाड़ी के दक्षिणी हिस्से में सबसे ज्यादा डाॅल्फिन देखी गईं। शोधकर्ताओं को नरारा रीफ में 39 डाॅल्फिन नजर आईं।
गुजरात के दक्षिण कच्छ की खाड़ी में सबसे ज्यादा दिखीं डाॅल्फिन

खबर विस्तार : -

गांधीनगर: गुजरात में कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से में डॉल्फिन सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समुद्री स्तनधारी जीव (मैरीन मैमल) बनकर उभरी हैं। गुजरात वन विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्था, गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (GEER) फाउंडेशन ने अक्टूबर 2023 और फरवरी 2025 के बीच एक व्यापक स्टडी की, जिसमें शोधकर्ताओं ने डॉल्फिन को सबसे ज्यादा बार देखा।

‘स्टेटस सर्वे ऑफ डुगोंग एंड अदर मरीन मैमल्स, एंड इकोलॉजिकल असेसमेंट ऑफ सीग्रास हैबिटेट्स अराउंड नरारा एंड एडजसेंट आइलैंड, गल्फ ऑफ कच्छ’ नाम की इस स्टडी में मरीन नेशनल पार्क, मरीन सैंक्चुअरी और कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से के आस-पास के इलाकों का सर्वे किया गया। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक विरासत और समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। 

सर्वे के दौरान 64 बार देखी डॉल्फिन

वन और पर्यावरण मंत्री ने बताया कि सर्वे के दौरान शोधकर्ताओं ने 64 बार डॉल्फिन देखीं और कुल 193 डॉल्फिन दर्ज की गईं। नाव से किए गए इस सर्वे में रीफ के किनारे, ज्वारीय चैनल (टाइडल चैनल), द्वीपों के किनारे और उथले तटीय इलाकों को शामिल किया गया। समुद्री जानवरों के समूहों को कुल 177 बार देखा गया, जिनमें 342 समुद्री स्तनधारी शामिल थे। इनमें डॉल्फिन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा, यानी 36.2 प्रतिशत थी। वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने स्टडी के लिए GEER फाउंडेशन की टीम और समुद्री बड़े जीवों (मेगाफ़ौना) के संरक्षण के प्रयासों के लिए वन विभाग की तारीफ की।

नरारा रीफ पर 39 डॉल्फिन देखी

वन और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने बताया कि नरारा रीफ डॉल्फिन देखने के लिए मुख्य इलाका था, जहां 14 अलग-अलग मौकों पर 39 डॉल्फिन देखी गईं। इसके बाद, डेडका-मुंडेका द्वीप समूह में 12 बार में 41 डॉल्फिन, पिरोटन द्वीप पर 32 डॉल्फिन, धनी द्वीप पर 9 बार में 28 डॉल्फिन और सिक्का के तटीय इलाकों में 8 बार में 26 डॉल्फिन देखी गईं। सर्वे की अन्य जगहों पर 10 बार में 27 डॉल्फिन देखी गईं।

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देड़का-मुंडेका द्वीप समूह अहम रास्ता

GEER फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पाटी ने बताया कि डॉल्फिन मुख्य रूप से रीफ के किनारों, द्वीपों के किनारों, ज्वारीय चैनलों और खुले समुद्री पानी में देखी गईं। उनके अनुसार, ये इलाके डॉल्फिन की आवाजाही और खाने की तलाश के लिए सबसे अच्छे हैं। खाड़ी की तेज ज्वारीय धाराएं पोषक तत्वों और मछलियों को एक जगह इकट्ठा करती हैं, जिससे डॉल्फिन के लिए शिकार करना आसान हो जाता है। स्टडी में देड़का-मुंडेका द्वीप समूह को डॉल्फिन के लिए आवाजाही का एक अहम रास्ता माना गया है; यहां उन्हें अक्सर गहरे रीफ के किनारों और ज्वारीय चैनलों से गुजरते हुए देखा गया, जहां मछलियों के बड़े झुंड जमा होते हैं।

सालभर यहां मौजूद रहते हैं डाॅल्फिन

बी.पी. पाटी ने बताया कि इस स्टडी की सबसे अहम बात दक्षिणी कच्छ की खाड़ी में सालभर डॉल्फिन का मौजूद रहना है। इससे पता चलता है कि डॉल्फिन आबादी का एक हिस्सा इस इलाके में स्थायी या अर्ध-स्थायी रूप से रहता है, न कि सिर्फ़ खास मौसमों में यहां आता है। सर्वे के दौरान कई दिलचस्प व्यवहार भी देखे गए। रिसर्चर्स ने उन्हें झुंड में तैरते, बार-बार सतह पर आते, ज्वारीय धाराओं के साथ दिशा बदलते और खाने की तलाश के लिए शिकार के खास तरीके अपनाते हुए देखा। झुंड का आकार एक-दो डॉल्फिन से लेकर 16 डॉल्फिन तक का देखा गया, जो उनके सामाजिक व्यवहार को दिखाता है।

समुद्री प्रजातियों के लिए अनुकूल कच्छ की खाड़ी

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने कहा कि दक्षिणी कच्छ की खाड़ी एक गतिशील समुद्री आवास है जिसमें रीफ, समुद्री घास के मैदान और ज्वारीय चैनल शामिल हैं, जो कई समुद्री प्रजातियों के लिए अनुकूल माहौल देते हैं। उनके अनुसार, ज्वारीय चैनल और खुले तटीय पानी डॉल्फिन के लिए खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि ये उनकी आवाजाही और खाने की तलाश के लिए मुख्य इलाके हैं। गिर फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर अमितकुमार नायक ने कहा कि अलग-अलग मौसमों में कई जगहों पर डॉल्फिन की मौजूदगी का लगातार रिकॉर्ड भविष्य में संरक्षण के प्रयासों के लिए एक अहम आधार बनेगा। इससे आबादी के रुझानों को समझने और कच्छ की खाड़ी को उनके लिए एक सुरक्षित आवास के तौर पर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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