सूरत ने पेश की मानवता की मिसाल: दो वर्षों में हुए 2,645 नेत्रदान, राज्य में 23 प्रतिशत का अहम योगदान
खबर सार :-
गुजरात के सूरत जिले में पिछले दो वर्षों में 2,645 नेत्रदान दर्ज किए गए हैं, जो राज्य के कुल नेत्रदान का 23% है। जानिए स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया द्वारा विधानसभा में दी गई पूरी जानकारी।
खबर विस्तार : -
सूरत: गुजरात के सूरत जिले में नेत्रदान के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि वर्ष 2024-25 और वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की विभिन्न संस्थाओं और अस्पतालों को कुल 2,645 नेत्रदान प्राप्त हुए हैं। राज्यभर में होने वाले कुल नेत्रदान में अकेले सूरत जिले का योगदान लगभग 23 प्रतिशत है, जो सामाजिक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति स्थानीय नागरिकों की सक्रियता को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं सिविल अस्पताल में वर्ष 2024-25 के दौरान 152 और वर्ष 2025-26 के दौरान 118 नेत्रदान दर्ज किए गए। इसके अलावा स्मिमेर अस्पताल में क्रमशः 47 और 32 नेत्रदान हुए। गैर-सरकारी और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका इस अभियान में सबसे बड़ी रही है, जिसमें दिव्य चक्षु आई बैंक को दो वर्षों में कुल 991 (493 और 498) तथा लोकदृष्टि ट्रस्ट को कुल 1,305 (776 और 529) नेत्रदान प्राप्त हुए हैं। इन सभी संस्थानों के सामूहिक प्रयासों से वर्ष 2024-25 में कुल 1,468 और वर्ष 2025-26 में 1,177 नेत्रदान दर्ज किए गए।
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तकनीकी प्रगति से बढ़ी प्रत्यारोपण क्षमता
चिकित्सा क्षेत्र में हुई आधुनिक प्रगति का हवाला देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पहले कॉर्निया का उपयोग केवल एक ही मरीज के नेत्र प्रत्यारोपण के लिए किया जाता था। हालांकि, अब आधुनिक तकनीक और नए शोधों के कारण कॉर्निया की विभिन्न परतों को जरूरत के अनुसार अलग करके अलग-अलग मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इस उन्नत चिकित्सा विधि के माध्यम से अब केवल एक नेत्रदान से 3 से 4 दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लौटाई जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मृत्यु के बाद अधिकतम 6 घंटे के भीतर आंखें दान की जा सकती हैं। नेत्रदान की इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। इसके तहत राज्य में नए आई बैंक की शुरुआत के लिए लगभग 40 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है, जबकि प्रत्येक स्वीकृत नेत्रदान पर 2,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
पारदर्शिता और राष्ट्रीय आंकड़े
देशभर में कॉर्निया प्रत्यारोपण की मांग और उपलब्धता के बीच एक बड़ा अंतराल बना हुआ है। देश में लगभग 1 से 1.5 लाख मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता है, जबकि इसके मुकाबले प्रतिवर्ष केवल 55 से 60 हजार कॉर्निया ही उपलब्ध हो पाते हैं। इस अंतर को पाटने के लिए समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश और राज्य में अंगदान तथा अंग प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) तथा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) के तय नियमों के तहत पूरी तरह पारदर्शी और कंप्यूटर आधारित प्रणाली से संचालित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में व्यक्तिगत सिफारिश या किसी भी प्रकार के पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं होती है।
विशेष उपचार और बाल स्वास्थ्य पहल
जन्मजात कॉर्निया संबंधी दृष्टिहीनता से पीड़ित बच्चों के लिए उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अतिरिक्त, बच्चों के स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की विशेष मंजूरी के बाद कॉक्लियर इम्प्लांट करा चुके 612 बच्चों के सॉफ्टवेयर उन्नयन (अपग्रेडेशन) के लिए प्रति बच्चे 3 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च स्वीकृत किया गया है। इस वित्तीय सहायता से इन बच्चों को सुनने और बोलने में अत्यधिक सहायता मिल रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।
नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण: जरूरत और सरकारी प्रोत्साहन
भारत में नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी मुख्य समस्या मांग और आपूर्ति के बीच का भारी अंतर है। देश में हर साल लाखों लोगों को दृष्टि बहाल करने के लिए कॉर्निया की जरूरत होती है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण कई लोग इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभागों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकारों द्वारा नए आई बैंकों की स्थापना के लिए वित्तीय अनुदान और प्रति नेत्रदान प्रोत्साहन राशि देने की योजनाएं इसी दिशा में एक कदम हैं। इसके साथ ही, चिकित्सा विज्ञान में आई नई तकनीकों ने एक ही नेत्रदान से कई जरूरतमंदों को लाभान्वित करना संभव बना दिया है, जिससे इस क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि हुई है।
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