यूपी पुलिस के महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए आयोजित किया राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश पुलिस के WCSO ने मिशन शक्ति के तहत एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 19 जनपदों से सर्वाइवर्स ने हिस्सा लिया।
यूपी पुलिस ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स के पुनर्वास के लिए उठाया कदम

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO) ने 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस बैठक का मकसद इन महिलाओं के इलाज, मदद और फिर से सामान्य जीवन में लौटने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना था।इस कार्यक्रम में प्रदेश के 19 जिलों से एसिड अटैक की शिकार महिलाएं शामिल हुईं। उन्होंने खुलकर अपनी जिंदगी के अनुभवों और आज की परेशानियों के बारे में बताया। इस कार्यक्रम की खास बात यह थी कि इन महिलाओं को केवल मदद पाने वाला नहीं, बल्कि इस पूरी व्यवस्था को सुधारने में अहम हिस्सा माना गया। इसमें अलग-अलग विभागों के बड़े अधिकारियों को भी बुलाया गया, ताकि वे इन महिलाओं की परेशानियों को खुद समझ सकें और उन्हें समय पर सही मदद दिला सकें।

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विभिन्न विभागों की सहभागिता और प्रत्यक्ष संवाद

बैठक में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, कानून और विधिक सेवा से जुड़े बड़े अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने इन महिलाओं को बताया कि उनके विभाग क्या-क्या मदद और योजनाएं दे सकते हैं। इस आमने-सामने की बातचीत से पीड़िताओं को अपनी बात सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने और उनका हल जानने का मौका मिला। महिलाओं ने बताया कि घटना के इतने साल बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उन्होंने मुख्य रूप से इन समस्याओं का जिक्र किया:

  • चेहरे और शरीर की सर्जरी (रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी) का खर्च और जरूरत
  • जमानत पर बाहर आए आरोपियों द्वारा धमकाना और दबाव बनाना
  • रहने के लिए सुरक्षित घर न होना
  • सरकारी मुआवजा मिलने में बहुत देरी होना

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पुनर्वास, आजीविका और विधिक चुनौतियाँ

इस कार्यक्रम में सबसे बड़ी बात जो सामने आई, वह थी इन महिलाओं के लिए रोजगार और कमाई के पक्के साधन होने की जरूरत। कई पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उन्हें अपने बच्चों की देखभाल, पढ़ाई और घर का खर्च चलाने में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। शरीर पर हमले के गहरे निशान और शारीरिक तकलीफ होने के बाद भी वे अपने परिवार को इज्जत की जिंदगी देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उनके अनुभवों से यह बात साफ हो गई कि इन महिलाओं के सही पुनर्वास के लिए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, नए हुनर सिखाना और रोजगार के अवसर देना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, कुछ महिलाओं ने ऐसे मामलों का मुद्दा भी उठाया जिनमें आरोपी को किशोर न्यायालय (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) द्वारा नाबालिग माना गया था। इन मामलों में आगे कानूनी लड़ाई लड़ने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

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व्यक्तिगत प्रकरण और प्रेरणादायी प्रसंग

इस कार्यक्रम में कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो दिल को छू लेने वाली थीं। गौतम बुद्ध नगर से एक महिला अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ आई थीं। हैरानी की बात यह है कि जब वह खुद सिर्फ आठ साल की थीं, तब उन पर एसिड से हमला हुआ था। उनके बच्चे को आज भी आर्थिक मदद और इलाज की जरूरत है। वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि उन पर साल 1997 में हमला हुआ था, लेकिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट साल 2023 में तब दर्ज की, जब आगरा जोन के एडीजी (अपर पुलिस महानिदेशक) ने इसमें दखल दिया। इस पूरे कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी हिस्सा उन महिलाओं की हिम्मत थी। शरीर पर गंभीर जख्म और दर्द होने के बावजूद वे दूर-दूर के जिलों से लखनऊ आईं और बिना डरे अधिकारियों के सामने अपनी बात रखीं। कार्यक्रम के आखिर में इन सभी पीड़ित महिलाओं को उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में पूरे मान-सम्मान के साथ सम्मानित किया गया।

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बाल सुरक्षा संगठन ने मदद करने का संकल्प लिया

इस कार्यक्रम का सबसे अहम निष्कर्ष यह रहा कि महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO) ने हर एक पीड़ित महिला के मामले में व्यक्तिगत रूप से आगे भी नजर रखने और मदद करने का संकल्प लिया है। संगठन ने वादा किया है कि वह सभी पीड़ित महिलाओं से संपर्क में रहेगा और अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर उनके इलाज, सर्जरी, मुआवजे, सुरक्षित रहने की जगह और कानूनी मदद का इंतजाम करवाएगा। यह कार्यक्रम इस बात को साबित करता है कि एसिड अटैक की शिकार महिलाओं को सही मायनों में तब ही मदद मिल सकती है, जब सभी विभाग मिलकर काम करें और उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं। WCSO की कोशिश है कि इस बातचीत के आधार पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हर पीड़ित महिला को न्याय और पूरा सम्मान मिल सके।

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