भोपाल में JAYS प्रदर्शन के दौरान हंगामा, महिला कार्यकर्ता ने कांस्टेबल को थप्पड़ मारा

खबर सार :-

पुलिस पर कार्रवाई की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हाथ छोड़ दिया। एक युवती ने पुलिस के जवान पर थप्पड़ जड़ दिया। युवती भूल गई कि कानून सबके लिए समान होता है।
कानून से इंसाफ मांग रहे JAYS प्रदर्शनकारी, युवती ने पुलिस पर जड़ दिया थप्पड़

खबर विस्तार : -

भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। अंबेडकर मैदान में जुटे JAYS कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान यह स्थिति आई थी। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर की मांग की जा रही थी।

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बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश

इस मांग को लेकर सड़क पर उतरे कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर मैदान में एकजुटता दिखाई। इसके बाद तो एक महिला कार्यकर्ता ने ऐसा काम किया कि बवाल खड़ा हो गया। आरोप है कि मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। पुलिस ने प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।

इसी दौरान जयस की एक महिला कार्यकर्ता ने एक कांस्टेबल को थप्पड़ मार दिया। इस पर पुलिस और जयस के कार्यकर्ताओं के बीच हंगामे का दौर शुरू हो गया। माहौल काफी तनावपूर्ण होने के चलते आवागमन पूरी तरह से ठप कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था की आदिवासी छात्रों के साथ पुलिस ने अभद्रता की है। वहीं पुलिस का कहना था कि आपकी महिला कार्यकर्ता ने जो काम किया है, उस पर किस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है?

काफी देर तक चलता रहा प्रदर्शन

बहरहाल, मामला यूं ही काफी देर तक चलता रहा। प्रदर्शन के दौरान टीआई रतन सिंह परिहार के खिलाफ एससी एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसके बिना काम नहीं चलेगा। यह मामला पिछले दिनों से चल रहा है। जयस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए सवाल उठाया कि गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास है। उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह बड़ी कार्रवाई करें। प्रदेश में आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है।

इस पर लगाम लगाने में मुख्यमंत्री पूरी तरह से असफल हैं। नारेबाजी करते हुए जयस के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमको उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर करानी है जिसने गाली गलौज किया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीआई को निलंबित करने के साथ उस पर एफआईआर क्यों नहीं की गई? मामला बढ़ने पर एसीपी शैलेंद्र सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।

गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया

उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जानकारी मिली थी। गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इस पर कार्रवाई भी की गई है। संबंधित अधिकारी जांच के दायरे में है और अभी फिलहाल प्राथमिकता यह है कि प्रदर्शन को समाप्त कर व्यवस्था सुचारु कराया जाए। बता दें कि पूरा मामला भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार से जुड़ा है। 

13 अक्टूबर के मामले में हुई कार्रवाई 

दरअसल, 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों का प्रदर्शन चल रहा था। किसी ने ‘जय जोहार’ बोल दिया, इस पर टीआई अभद्र टिप्पणी करने लगे थे। इसका वीडियो भी सामने आदिवासी संगठन के जरिए लाया गया। यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा और उसके बाद 14 अक्टूबर को टीआई रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने टीआई के खिलाफ सेवा समाप्त करने की मांग की थी।

किसी को छोड़ा भी नहीं जाएगा

 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी घटना को गंभीर बताया। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी मामलें पर सफाई दी है। दरअसल इस मामले पर राजनीति ज्यादा हो रही है। समस्या में सत्तापक्ष को तो जवाब देना ही है। विपक्ष भी मौका तलाश रहा है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई की जा रही है। सरकार का कहना है कि मामले में निलंबन कार्रवाई की गई है। जांच के दायरे में कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। किसी को छोड़ा भी नहीं जाएगा। 

यह भी पढ़ें :  अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, बोले- वोट चोरी और फर्जी वोटिंग से चुनाव जीतना चाहती है बीजेपी

भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। अंबेडकर मैदान में जुटे JAYS कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान यह स्थिति आई थी। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर की मांग की जा रही थी।

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बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश

इस मांग को लेकर सड़क पर उतरे कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर मैदान में एकजुटता दिखाई। इसके बाद तो एक महिला कार्यकर्ता ने ऐसा काम किया कि बवाल खड़ा हो गया। आरोप है कि मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। पुलिस ने प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।

इसी दौरान जयस की एक महिला कार्यकर्ता ने एक कांस्टेबल को थप्पड़ मार दिया। इस पर पुलिस और जयस के कार्यकर्ताओं के बीच हंगामे का दौर शुरू हो गया। माहौल काफी तनावपूर्ण होने के चलते आवागमन पूरी तरह से ठप कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था की आदिवासी छात्रों के साथ पुलिस ने अभद्रता की है। वहीं पुलिस का कहना था कि आपकी महिला कार्यकर्ता ने जो काम किया है, उस पर किस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है?

काफी देर तक चलता रहा प्रदर्शन

बहरहाल, मामला यूं ही काफी देर तक चलता रहा। प्रदर्शन के दौरान टीआई रतन सिंह परिहार के खिलाफ एससी एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसके बिना काम नहीं चलेगा। यह मामला पिछले दिनों से चल रहा है। जयस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए सवाल उठाया कि गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास है। उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह बड़ी कार्रवाई करें। प्रदेश में आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है।

इस पर लगाम लगाने में मुख्यमंत्री पूरी तरह से असफल हैं। नारेबाजी करते हुए जयस के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमको उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर करानी है जिसने गाली गलौज किया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीआई को निलंबित करने के साथ उस पर एफआईआर क्यों नहीं की गई? मामला बढ़ने पर एसीपी शैलेंद्र सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।

गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया

उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जानकारी मिली थी। गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इस पर कार्रवाई भी की गई है। संबंधित अधिकारी जांच के दायरे में है और अभी फिलहाल प्राथमिकता यह है कि प्रदर्शन को समाप्त कर व्यवस्था सुचारु कराया जाए। बता दें कि पूरा मामला भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार से जुड़ा है। 

13 अक्टूबर के मामले में हुई कार्रवाई 

दरअसल, 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों का प्रदर्शन चल रहा था। किसी ने ‘जय जोहार’ बोल दिया, इस पर टीआई अभद्र टिप्पणी करने लगे थे। इसका वीडियो भी सामने आदिवासी संगठन के जरिए लाया गया। यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा और उसके बाद 14 अक्टूबर को टीआई रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने टीआई के खिलाफ सेवा समाप्त करने की मांग की थी।

किसी को छोड़ा भी नहीं जाएगा

 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी घटना को गंभीर बताया। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी मामलें पर सफाई दी है। दरअसल इस मामले पर राजनीति ज्यादा हो रही है। समस्या में सत्तापक्ष को तो जवाब देना ही है। विपक्ष भी मौका तलाश रहा है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई की जा रही है। सरकार का कहना है कि मामले में निलंबन कार्रवाई की गई है। जांच के दायरे में कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। किसी को छोड़ा भी नहीं जाएगा। 

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