नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी, तेरह महीने में मिला न्याय

खबर सार :-

मेरठ के बहुचर्चित हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषियों को मृत्युदंड दिया है। लगभग तेरह महीने चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने यह ऐतिहासिक फैसला पारित किया।
सौरभ राजपूत हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

खबर विस्तार : -

मेरठ :  जिले में गत वर्ष हुए चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपितों को फांसी की सजा सुनाई है। इस सनसनीखेज वारदात में मृतका की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके सहयोगी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड दिया गया है। करीब तेरह माह तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान कुल बाईस गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनके आधार पर यह फैसला तय किया गया।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी और कानूनी प्रक्रिया

बुधवार को जिला कारागार से दोनों दोषियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। अदालत ने सजा तय करने से पहले उनकी दिनचर्या और पक्ष में कुछ कहने की अनुमति दी, जिस पर दोनों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि, मुस्कान ने अपनी बेटी से मिलने की गुहार जरूर लगाई। बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने बच्चियों के भविष्य का हवाला देते हुए नरमी बरतने का अनुरोध किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने पैरवी की थी।

फैसले के बाद दोनों दोषी हुए भावुक

मेरठ के सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के अनुसार, सुबह सबसे पहले सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद न्यायालय ने दोपहर बाद अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रखते हुए दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत कक्ष में जब सजा का ऐलान हुआ, तो दोनों दोषियों की आंखों से आंसू छलक आए और वे काफी भावुक नजर आए।

क्या था मामला?

यह पूरा मामला पिछले साल फरवरी और मार्च के दौरान सामने आया था, जब लंदन से नौकरी छोड़कर लौटे सौरभ राजपूत की तीन मार्च को ब्रह्मपुरी इलाके में हत्या कर दी गई थी। अपराधियों ने बेरहमी से शव के टुकड़े कर एक नीले ड्रम में डाले और उन्हें सीमेंट से सील कर दिया था। मृतक के भाई बबलू की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और मार्च के शुरुआती दिनों में ही दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया था। पिछले महीने तीस सितंबर को अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया था।

सौरभ राजपूत चौबीस फरवरी को लंदन से अपने वतन लौटे थे, जिसके कुछ ही दिनों बाद तीन मार्च को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि इस जघन्य कृत्य को अंजाम देने के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए एक ड्रम का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई पूरी करते हुए मात्र तेरह महीनों के भीतर अपना फैसला सुनाया है।

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