यूपी डीजीपी ने कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग सुधार पर दिए सख्त निर्देश, आई-गॉट पोर्टल पर प्रदेश को मिली बड़ी उपलब्धि

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उच्चस्तरीय बैठक में जीरो टॉलरेंस की नीति को कार्यशैली का हिस्सा बनाने और बीट पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर दिया। आगामी त्योहारों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए गए।
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक आयोजित

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में गुरुवार को एक उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने की। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के समस्त जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, परिक्षेत्रीय महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक और जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी त्योहारों को सकुशल संपन्न कराने के साथ-साथ अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण और जनसुनवाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।

आई-गॉट पोर्टल पर ऐतिहासिक उपलब्धि और प्रशिक्षण

बैठक की शुरुआत में पुलिस महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 'आई-गॉट पोर्टल' के जरिए एक करोड़ से ज्यादा कोर्स पूरे करने की देशव्यापी उपलब्धि पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग का यह दायरा पुलिस बल की काम करने की क्षमता को बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो रहा है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि वीकेंड (सप्ताहांत) ट्रेनिंग कार्यक्रमों में ऐसे विषयों को प्राथमिकता दी जाए, जिनका सीधा फायदा जमीन पर बीट पुलिसिंग और रोजमर्रा के कामकाज को निभाने में मिल सके। इसके साथ ही, ट्रेनिंग की गुणवत्ता और उसके व्यावहारिक इस्तेमाल को लगातार बेहतर बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

जीरो टॉलरेंस और अपराध के मूल कारणों पर वार

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान यह साफ किया गया कि 'जीरो टॉलरेंस' (अपराध के प्रति बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति) सिर्फ एक कागजी नियम नहीं, बल्कि पुलिस के काम करने का मुख्य तरीका होना चाहिए। कोई भी आपराधिक घटना सामने आते ही तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ, उसके मूल कारणों और उसे रोकने में कहां कमी रह गई, इसकी गहराई से जांच करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि 'यक्ष ऐप' में जांच होने के बावजूद यदि कोई अपराधी दोबारा वारदातों को अंजाम देता है, तो उसके खिलाफ बेहद सख्त और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए।

बीट पुलिसिंग, पेट्रोलिंग और पुलिस विजिबिलिटी 

चोरी, नकबजनी और चेन स्नेचिंग जैसे संपत्ति से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए पुलिस की गश्त और मौजूदगी (विजिबिलिटी) बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख बाजारों और भीड़भाड़ या संवेदनशील जगहों पर तकनीकी उपकरणों और पीआरवी वाहनों का सही ढंग से इस्तेमाल करने को कहा गया है। बीट पुलिसिंग को अपराध रोकने की मुख्य नींव बताते हुए पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की गई है। इसके अलावा, अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री और स्थानीय स्तर पर उनके बनने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बीट स्तर पर नियमित ब्रीफिंग और विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जनसुनवाई और लंबित विवेचनाओं का समयबद्ध निस्तारण

थाना और चौकी स्तर पर आने वाले हर पीड़ित की शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनने और उसका सही तरीके से समाधान करने को सबसे ऊपर रखा गया है। आईजीआरएस पर आने वाले मामलों की लगातार समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके। इसके अलावा, साठ और नब्बे दिन से ज्यादा समय से लंबित पड़ी मामलों की फाइलों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है। गंभीर और अनसुने (ब्लाइंड) मामलों का खुलासा करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर निगरानी रखने और तकनीकी सबूतों के आधार पर अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

आगामी त्योहारों और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

आने वाले त्योहारों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत रखने के आदेश दिए गए हैं। खासकर मूर्ति विसर्जन और स्नान के कार्यक्रमों के दौरान पानी में डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, जिससे किसी भी तरह की अनहोनी या जनहानि को पूरी तरह रोका जा सके। इसके अलावा, जुलूस के रास्तों पर बिजली के तारों से होने वाले हादसों को टालने के लिए सुरक्षा के सभी नियमों का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग द्वारा जनता के मन में सुरक्षा का भाव मजबूत करने और अपराधों को लगातार कम करने के लिए समय-समय पर ऐसी उच्च स्तर की बैठकें की जाती हैं। इन बैठकों का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मैदानी स्तर पर पुलिस का काम पूरी पारदर्शिता से हो, 'यक्ष ऐप' और 'आई-गॉट पोर्टल' जैसी आधुनिक तकनीकों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, और फील्ड पर काम करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था हमेशा बेहतर बनी रहे।

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