लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो इनामी अभियुक्त गिरफ्तार
खबर सार :-
लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में अपहरण कर फिरौती वसूलने के मामले में पुलिस और सर्विलांस टीम ने दो इनामी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 1,34,500 रुपये नकद बरामद किए हैं।
खबर विस्तार : -
Lucknow crime news : लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस और सर्विलांस सेल जोन-दक्षिणी की संयुक्त टीम ने अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में 25-25 हजार रुपये के दो वांछित इनामी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 1,34,500 रुपये की नगदी भी बरामद की गई है। इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के खुलासे के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के निर्देश पर अपराधियों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) मो0 मुश्ताक के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) रल्लापल्ली वसंथ कुमार के पर्यवेक्षण में कार्रवाई की गई। इस ऑपरेशन के तहत लखनऊ पुलिस (Lucknow police) ने तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाया।
अपहरण की घटना और पूर्व की कार्रवाई
यह पूरा मामला 13 सितंबर 2026 का है, जब वादी सुदर्शन घोष ने थाना कृष्णानगर में लिखित तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया था और फिरौती वसूली थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान प्रकाश में आए छह अभियुक्तों को पुलिस पहले ही 20 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज चुकी है। इसके बाद भी शेष वांछित और इनामी आरोपियों की तलाश जारी थी।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से हुई गिरफ्तारी
गठित पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया। इसके बाद 19 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने दो मुख्य इनामी अभियुक्तों- पंकज भूषण कुमार और नवनीत सिंह को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है, जिसमें विभिन्न राज्यों के शातिर अपराधी शामिल हैं। यह गिरोह अमीर लोगों को निशाना बनाकर उनकी रेकी करता था और फिर सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन (Police administration) की भूमिका बेहद अहम रही है।
पूछताछ में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
गिरफ्तार आरोपी पंकज ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसके साथी नवनीत ने एंटीक सामान के कारोबार और पीड़ित के पास भारी मात्रा में कैश एवं ज्वेलरी होने की जानकारी दी थी। योजना के तहत आरोपियों ने 12 सितंबर 2026 को पीड़ित सुदर्शन घोष को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर अपनी गाड़ी में बैठा लिया और डराया-धमकाया। इसके बाद पीड़ित की पत्नी से फोन पर फिरौती की मांग की गई। ड्राइवर के माध्यम से 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को शहीद पथ के पास छोड़ दिया था। घटना के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों में छिप गए थे और बाद में दोबारा लखनऊ लौट आए थे।
अब पुलिस गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ विधिक कार्रवाई पूरी कर चुकी है और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अन्य किन जगहों पर ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है। इस सफल ऑपरेशन से पुलिस को अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में मदद मिली है। दिनांक 13 सितंबर 2026 को थाना कृष्णानगर में वादी सुदर्शन घोष की शिकायत पर अपहरण और फिरौती का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने पहले ही 20 सितंबर 2026 को छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि अन्य वांछितों की तलाश के लिए सर्विलांस और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।
ये भी पढ़ेंः- Lucknow Crime: पत्नी को आपत्तिजनक हालत में देख भड़के पति ने युवक पर डाला तेजाब, आरोपी गिरफ्तार!
Lucknow crime news : लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस और सर्विलांस सेल जोन-दक्षिणी की संयुक्त टीम ने अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में 25-25 हजार रुपये के दो वांछित इनामी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 1,34,500 रुपये की नगदी भी बरामद की गई है। इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के खुलासे के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के निर्देश पर अपराधियों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) मो0 मुश्ताक के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) रल्लापल्ली वसंथ कुमार के पर्यवेक्षण में कार्रवाई की गई। इस ऑपरेशन के तहत लखनऊ पुलिस (Lucknow police) ने तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाया।
अपहरण की घटना और पूर्व की कार्रवाई
यह पूरा मामला 13 सितंबर 2026 का है, जब वादी सुदर्शन घोष ने थाना कृष्णानगर में लिखित तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया था और फिरौती वसूली थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान प्रकाश में आए छह अभियुक्तों को पुलिस पहले ही 20 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज चुकी है। इसके बाद भी शेष वांछित और इनामी आरोपियों की तलाश जारी थी।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से हुई गिरफ्तारी
गठित पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया। इसके बाद 19 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने दो मुख्य इनामी अभियुक्तों- पंकज भूषण कुमार और नवनीत सिंह को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है, जिसमें विभिन्न राज्यों के शातिर अपराधी शामिल हैं। यह गिरोह अमीर लोगों को निशाना बनाकर उनकी रेकी करता था और फिर सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन (Police administration) की भूमिका बेहद अहम रही है।
पूछताछ में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
गिरफ्तार आरोपी पंकज ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसके साथी नवनीत ने एंटीक सामान के कारोबार और पीड़ित के पास भारी मात्रा में कैश एवं ज्वेलरी होने की जानकारी दी थी। योजना के तहत आरोपियों ने 12 सितंबर 2026 को पीड़ित सुदर्शन घोष को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर अपनी गाड़ी में बैठा लिया और डराया-धमकाया। इसके बाद पीड़ित की पत्नी से फोन पर फिरौती की मांग की गई। ड्राइवर के माध्यम से 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को शहीद पथ के पास छोड़ दिया था। घटना के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों में छिप गए थे और बाद में दोबारा लखनऊ लौट आए थे।
अब पुलिस गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ विधिक कार्रवाई पूरी कर चुकी है और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अन्य किन जगहों पर ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है। इस सफल ऑपरेशन से पुलिस को अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में मदद मिली है। दिनांक 13 सितंबर 2026 को थाना कृष्णानगर में वादी सुदर्शन घोष की शिकायत पर अपहरण और फिरौती का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने पहले ही 20 सितंबर 2026 को छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि अन्य वांछितों की तलाश के लिए सर्विलांस और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।
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