साइबर अपराधों को रोकने के लिए लखनऊ पुलिस ने शुरू किया ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’, पीड़ितों से शिकायत करने की अपील

खबर सार :-

लखनऊ पुलिस ने साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ शुरू किया है। पुलिस ने पीड़ितों से न घबराने और शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
लखनऊ में साइबर अपराध रोकने की कोशिश, जागरूकता अभियान शुरू

खबर विस्तार : -

लखनऊ: डिजिटल युग में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, लखनऊ पुलिस ने नागरिकों के लिए 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनकी निजी तस्वीरें या वीडियो उनकी सहमति के बिना सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शेयर या प्रसारित किए जाते हैं या फिर ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता है तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए और न ही चुप रहना चाहिए; बल्कि तुरंत इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

पुलिस के अनुसार, निजी तस्वीरें या वीडियो लीक होने के कई पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर, परिवार की प्रतिक्रिया या समाज में बदनामी के डर से शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। इससे अपराधियों के हौसले और बुलंद होते हैं। लखनऊ पुलिस ने इस बात पर जोर दिया है कि पीड़ितों को ऐसी घटनाओं के लिए खुद को दोष नहीं देना चाहिए और कानूनी मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

सबसे पहले सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित कर लें

लखनऊ पुलिस (Lucknow Police) ने पीड़ितों से अपील की है कि वे सबसे पहले सभी डिजिटल सबूतों (digital proofs) को सुरक्षित कर लें। इसमें संबंधित पोस्ट, URL, प्रोफाइल लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट लॉग और धमकी भरे संदेशों को संभाल कर रखना शामिल है; हालांकि, पीड़ितों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे इस कंटेंट को किसी और के साथ शेयर न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी तस्वीरें या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे या कोई अन्य मांग करता है, तो उसके दबाव में न आएं, बल्कि तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें। इसके अलावा, पीड़ितों को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उस पोस्ट, वीडियो या अकाउंट की रिपोर्ट करनी चाहिए और कंटेंट को हटाने का अनुरोध करना चाहिए। साथ ही, उन्हें अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए केंद्र सरकार का 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) उपलब्ध है, जिसके जरिए पीड़ित ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

रेफरेंस नंबर को संभाल कर रखें शिकायतकर्ता

लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को 'StopNCII.org' के बारे में भी जानकारी दी है। यह एक मुफ्त ऑनलाइन टूल है, जिसे उन निजी तस्वीरों और वीडियो को और अधिक फैलने से रोकने के लिए बनाया गया है, जिन्हें बिना सहमति के ऑनलाइन शेयर कर दिया गया है। पीड़ितों को सलाह दी जाती है कि पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद मिलने वाले रेफरेंस नंबर को संभाल कर रखें, क्योंकि इसका इस्तेमाल केस का स्टेटस ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह सेवा औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराने का विकल्प नहीं है, बल्कि यह इस तरह के कंटेंट को फैलने से रोकने के लिए एक अतिरिक्त उपाय है। लखनऊ पुलिस के अनुसार, जो लोग निजी तस्वीरों या वीडियो को लीक करते हैं या फैलाते हैं, या फिर उनका इस्तेमाल ब्लैकमेल करने के लिए करते हैं, उनके खिलाफ 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' (Information Technology Act, 2000) और 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े कुछ मामलों में, अपनी पहचान उजागर किए बिना भी NCRP पोर्टल पर शुरुआती जानकारी दी जा सकती है; हालांकि, यह विकल्प सभी तरह के साइबर अपराधों के लिए उपलब्ध नहीं है। 

मामले की गंभीरता के आधार पर सजा और जुर्माना

मामले की गंभीरता के आधार पर, दोषियों को जेल की सजा और जुर्माना हो सकता है। ब्लैकमेल करने, डराने-धमकाने, पीछा करने (स्टॉकिंग) या जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) जैसे मामलों में अतिरिक्त आरोप भी लगाए जा सकते हैं। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव ने कहा कि अगर किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के फैलाए जाते हैं—या उनका इस्तेमाल ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता है—तो पीड़ित को न तो डरना चाहिए और न ही चुप रहना चाहिए। इसमें पीड़ित की कोई गलती नहीं है, और कानून ऐसे मामलों में मदद और सुरक्षा प्रदान करता है। पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों को लेकर जागरूक और सतर्क रहने की अपील की है।

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