फर्जी भारतीय नोटों के साथ पकड़े गए नेपाली नागरिक को नौ साल से अधिक की सजा, तीस हजार रुपये का जुर्माना

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा साल 2015 में इंडो-नेपाल बॉर्डर से पकड़े गए एक नेपाली नागरिक को विशेष अदालत ने जाली भारतीय मुद्रा के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को नौ वर्ष सात माह के कठोर कारावास और तीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
जाली भारतीय मुद्रा तस्करी में नेपाली नागरिक को कठोर कारावास

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की विशेष एटीएस अदालत ने बुधवार को एक पुराने जाली भारतीय मुद्रा तस्करी मामले में फैसला सुनाते हुए एक नेपाली नागरिक को नौ वर्ष और सात महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर तीस हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। आरोपी को फरवरी 2015 में महाराजगंज के सोनौली सीमा क्षेत्र से भारी मात्रा में फर्जी नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था।

साल 2015 में हुई थी गिरफ्तारी और बरामदगी

राज्य के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने 23 फरवरी 2015 को भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने शेख जावेद इकबाल उर्फ अशफाक अंसारी उर्फ जावेद को हिरासत में लिया था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से छब्बीस लाख तीन हजार पांच सौ रुपये मूल्य की जाली भारतीय मुद्रा बरामद की गई थी। इस सिलसिले में एटीएस थाने, लखनऊ में भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

उच्च गुणवत्ता की विदेशी मुद्रा और धाराओं का दायरा

जांच के दौरान जब बरामद फर्जी नोटों की फॉरेंसिक जांच कराई गई, तो यह बात सामने आई कि वे बेहद उच्च गुणवत्ता के थे और उन्हें विदेश से आयात किया गया था। इस खुलासे के बाद विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर मामले में यूए (पी) एक्ट, 1967 की धारा 16 की वृद्धि की गई। एटीएस ने अपनी तकनीकी और फील्ड जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

दोषी ठहराए गए व्यक्ति की पहचान नेपाल के नारायनी परसा, बेलवा के रहने वाले शेख सफी अहमद अंसारी के पुत्र शेख जावेद इकबाल के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के वक्त वह लखनऊ के हुसैनाबाद स्थित महताबबाग इलाके में रह रहा था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एटीएस तथा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) की अदालत में चल रही थी।

प्रभावी पैरवी और कानूनी परिणाम

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए गए और प्रभावी पैरवी की गई। इन सभी साक्ष्यों और तर्कों का परीक्षण करने के बाद न्यायाधीश ने अभियुक्त को भारतीय जाली मुद्रा के परिचालन और तस्करी का दोषी पाया। न्यायालय ने 22 अक्टूबर 2026 को इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सजा की घोषणा की। एटीएस की ओर से लगातार की गई कानूनी पैरवी के कारण यह मामला अपने तार्किक अंजाम तक पहुंचा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी सीमा पार से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के अवैध नेटवर्क में सक्रिय रूप से संलिप्त था। अदालत के इस निर्णय से सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध मुद्रा के कारोबार पर लगाम कसने के प्रयासों को और मजबूती मिली है।

भारत-नेपाल सीमा पर अवैध मुद्रा और प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं। इसी कड़ी में वर्ष 2015 में एटीएस द्वारा की गई यह कार्रवाई एक बड़ी सफलता मानी गई थी, क्योंकि बरामद नोटों की गुणवत्ता सामान्य नहीं बल्कि उच्च स्तर की थी, जो देश की वित्तीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती थी।
 

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