नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को मिली बड़ी सफलता, बाराबंकी अदालत ने हेरोइन और गांजा तस्करी में सुनाई दस साल की कैद

खबर सार :-

एनसीबी लखनऊ की बड़ी सफलता। 2017 के बाराबंकी हेरोइन और गांजा जब्ती मामले में अदालत ने दो तस्करों को 10 साल की सजा सुनाई।
एनसीबी लखनऊ: 2017 के मादक पदार्थ मामले में दो दोषियों को सजा

खबर विस्तार : -

लखनऊ/बाराबंकी: देशभर में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एनसीबी (NCB) को एक बड़ी सफलता मिली है। लगभग 9 साल पुराने इस मामले में अदालत ने दोनों तस्करों को दोषी मानते हुए 10 साल की कड़ी सजा सुनाई है। इस सख्त फैसले से अपराधियों को एक कड़ा संदेश मिला है।

रेलवे स्टेशन पर हुई थी गिरफ्तारी

यह पूरा मामला 27 मई 2017 का है, जब एनसीबी लखनऊ की टीम को एक पुख्ता खुफिया सूचना मिली थी। इस गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म पर घेराबंदी की। इस दौरान अवध असम एक्सप्रेस से उतर रहे दो संदिग्ध यात्रियों को जांच के लिए रोका गया। तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद काले रंग के थैलों से प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई। जांच प्रक्रिया के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पकड़े गए दोनों आरोपियों के पास से कुल 340 ग्राम हेरोइन और 160 ग्राम गांजा बरामद किया गया था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस खेप को सुदूर पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के दीमापुर शहर से ट्रेन के रास्ते उत्तर प्रदेश लाया गया था। एजेंसी ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था।

अदालत का फैसला और दलीलें

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बाराबंकी की अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों को पुरजोर तरीके से रखा। सरकारी पक्ष ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए दोषियों के लिए कठोरतम सजा की मांग की, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश प्रसारित हो सके।

दोषियों की पहचान

अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद न्यायाधीश ने शकील (निवासी चंदवारा, थाना सफदरगंज, बाराबंकी) और रामप्यारी (निवासी पालहरी, थाना सफदरगंज, बाराबंकी) को तस्करी का दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

नशा मुक्त भारत का संकल्प

इस अदालती फैसले के बाद एनसीबी अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के प्रति एजेंसी की नीति पूरी तरह सख्त यानी जीरो-टॉलरेंस की है। एजेंसी देश को नशामुक्त बनाने के अपने संकल्प पर लगातार काम कर रही है। एनसीबी ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों की जानकारी साझा करने में सहयोग करें।

मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में त्वरित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियां और राज्य पुलिस बल लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। एनसीबी द्वारा संचालित 'मानस' राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर 1933) के माध्यम से आम नागरिक पूरी तरह गोपनीय तरीके से तस्करों और अवैध कारोबार से जुड़ी सूचनाएं साझा कर सकते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

ये भी पढ़ेंः- सुरक्षित डिजिटल सफर: लखनऊ पुलिस चलाएगी विशेष ऑनलाइन साइबर जागरूकता महा-अभियान

अन्य प्रमुख खबरें