दो दशक पहले की याद दिला रहीं सरयू, कटान देख दहशत में ग्रामीण

खबर सार :-

इससे पहले सरयू नदी का जल 20 साल पहले इस रौद्र रूप में देखा गया था। इस बार फिर कटान देख ग्रामीण दहशत में हैं। यहां का एक मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज धारा में समा गए।
बाराबंकी : 20 साल बाद सरयू उफान पर,  हेतमपुर में मंदिर.टेलीफोन एक्सचेंज डूबे

खबर विस्तार : -

बाराबंकी, बरसात के दिनों में नदियों का जलस्तर बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जिस तरह से बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्लॉक के हेतमपुर गांव में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, वह चिंताजनक है। करीब दो दशक बाद इस तरह की बाढ़ यहां के लोग देख रहे हैं। बीते रविवार की रात से सोमवार की सुबह तक नदी की कटान रूक नहीं रहा था। यह नजारा देख ग्रामीण दहशत में हैं। यहां का प्रमुख मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज नदी में समा गए।

सरकार बदलने पर रोक दिए काम

 सरयू नदी की तेज धारा के साथ यहां का कटान अब कहर बरपा रहा है। इस बार इसकी चपेट में नया हनुमान मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज आ गया। यह नदी की धारा में समाए हुए हैं। नदी का जल इस बार उसी स्थान के करीब तक पहुंचा है, जहां दो दशक पहले पहुंचा था। ग्रामीणों में कटान को लेकर दहशत बनी हुई। सरयू नदी अब भी अपना रौद्र रूप दिखा रही है।

इससे पहले भी हेतमापुर में सरयू नदी के पानी से भीषण कटान हुआ था। उस समय पुराना हनुमान मंदिर नदी की धारा में आ गया था। ग्रामीणों की मानें तो टेलीफोन भवन के आसपास नदी का रुख कुछ स्थिर है। इससे लोगों में डर थोड़ा कम हुआ है। नुकसान से बचने के लिए जब कटान रोकना जरूरी हो गया तो लोग बचाव कार्य में जुट गए। उनके प्रयास से बड़ी मात्रा में बोल्डर डाले गए। इसके बाद भी नदी हालातों पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

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कटान रोकने के लिए ग्रामीण कर रहे प्रयास 

 पिछली बार जब बाढ़ आई थी तब, टेलीफोन एक्सचेंज की मशीनरी तक सुरक्षित स्थान पर हटानी पड़ी थी। लोगों ने बताया कि तत्कालीन जेई वीपी सिंह के प्रयास से वहां नया हनुमान मंदिर बनवाया गया था। करीब 20 वर्ष बाद फिर वह मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज का भवन भी नदी की जद में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 20 वर्ष पहले भी नदी इसी तरह मंदिरों के आसपास पहुंची थी। ठीक वैसे ही हालात इस बार भी बन गए हैं। पूर्व भाजपा विधायक राजलक्ष्मी वर्मा ने के अनुसार, पिछली बार की बाढ में उन्होंने सरकार से प्रयास कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये स्वीकृत कराए थे। उसके बाद सत्ता परिवर्तन होने से तत्कालीन सपा सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। 

अधिकारियों के दौरे नहीं निकाल पा रहे समाधान

उन्होंने सत्ता बदलने पर पड़े प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उस समय कार्य हो जाता तो केदारीपुर और हेतमापुर गांव आज नदी के कटान से बचे रहते। यहां के लोगों को दहशत का सामना न करना पड़ता। इस जनसमुदाय की पीडा पर तहसीलदार रामनगर विपुल सिंह का कहना है कि कटान रोकने के उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पीड़ित ग्रामीणों को सरकार मदद दे रही है। यद्यपि तहसीलदार और लेखपाल लोगों की सुविधाओं का ध्यान रख रहे हें, लेकिन यह उनकी परेशानियों को दूर नहीं कर सकते हैं। वर्तमान में प्रशासन और बाढ़ कार्य खंड की ओर से कटान रोकने के लिए बोल्डर डालकर बचाव कार्य कराया जा रहा है।

 हालांकि सरयू कटान करते हुए बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है। कटान के संबंध में जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी बाराबंकी लोगों के संपर्क में हैं। नायब तहसीलदार को भी कटान और बाढ़ पर निगरानी रखने के लिए लगाया गया है। जब तक यहां नदी का पानी काफी कम नहीं हो जाता है, लोगों की समस्या कम नहीं होने वाली है। 

कटान रोकने के प्रबंध नहीं

बाढ़ पर भले ही निगरानी रखने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन वह मिट्टी के कटान पर नियंत्रण नहीं पा सकते हैं। उनकी मूल परेशानी की वजह है की बाढ़ के बाद प्रशासन पूर्व की परेशानियों पर ध्यान नहीं देता। पूर्व विधायक ने बताया भी है कि उन्होंने कुछ धन पास करवाया था, लेकिन सरकार बदल जाने के बाद काम नहीं हुआ इसी तरह यदि वर्तमान की बाढ़ और कटान पर भी ध्यान नहीं दिया गया और पानी कम होने के बाद अगली बारिश तक काम नहीं कराया गया तो परेशानियां बनी रहेंगी। इन परेशानियों के बीच ग्रामीणों को ही मुसीबत का सामना करना पड़ेगा

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